पश्चिम बंगाल में आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। पश्चिम बंगाल के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष, 2021 के चुनावों के नतीजों के बाद हाशिए पर चले गए थे। पार्टी में उनकी भूमिका सीमित हो गई थी। पार्टी में तृणमूल कांग्रेस से आए नेताओं को शामिल करने को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद वह पार्टी से दूरी बनाने लगे थे। अब एक बार फिर विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक से पहले बीजेपी ने उन्हें मना लिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मीटिंग के बाद घोष जनवरी से प्रचार शुरू करने वाले हैं। चुनाव अप्रैल में होने की संभावना है। बीजेपी से जुड़े नेताओं का कहना है कि दिलीप घोष जनवरी में 16 रैलियां करेंगे। 6 जनवरी को बैरकपुर में पहली रैली होगी। उसके बाद दुर्गपुर और कूच बिहार में भी रैलियां होंगी। बोर्ड परीक्षाओं की वजह से लाउडस्पीकर पर बैन लगने से पहले ज्यादा से ज्यादा प्रचार करना चाहते हैं।
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दिलीप घोष:-
पार्टी ने मुझे चुनाव की तैयारी में लगने को कहा है। मैं 24 घंटे उपलब्ध हूं। कुछ हथियार खास मौकों पर इस्तेमाल होते हैं। राज्य में 294 सीटें हैं, सबको कवर करना है। अलग-अलग बैठकें करनी पड़ेंगी।
दिलीप घोष को मिली बड़ी जिम्मेदारी
दिलीप घोष के बयानों से साफ है कि उन्हें अब पार्टी एक बार फिर प्रमुखता दे रही है। उनकी अध्यक्षता में ही 2021 में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसमें बीजेपी ने खुद को साबित किया था। 2016 में हुए विधानसभा चुनावों में महज 3 सीटों पर सिमटी बीजेपी, 2021 में 60 से ज्यादा सीटो पर काबिज थी। पश्चिम बंगाल के लिए यह हैरान करने वाली प्रगति है। अब बीजेपी की नजर, ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने पर है। बीजेपी अब दिलीप घोष की मौजूदगी का एक बार फिर फायदा लेना चाहती है।
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कैसे हाशिए पर चले गए थे दिलीप घोष
साल 2021 के चुनावी नतीजों के बाद दिलीप घोष की भूमिका सिमटती चली गई थी। वह हाशिए पर थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को यह बात खटक रही थी। अमित शाह ने उन्हें पार्टी की कोर ग्रुप मीटिंग में बुलाया। पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, सुवेंदु अधिकारी और सुकांता मजूमदार के साथ अब वह पश्चिम बंगाल में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा होंगे।
दिलीप घोष ने कहा कि अगर पार्टी टिकट देगी तो चुनाव लड़ेंगे। उन्हें खड़गपुर सीट पसंद है। पहले जिन नेताओं से वह नाराज रहे, अब उनके साथ मंच साझा करने के लिए तैयार हैं। अब उन्होंने कहा है कि सुवेंदु अधिकारी के साथ मंच साझा करने में कोई दिक्कत नहीं है। बीजेपी को उम्मीद है कि घोष की वापसी से कार्यकर्ताओं में जोश आएगा और चुनाव में अच्छा प्रदर्शन होगा।
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दिलीप घोष को आगे करने की मजबूरी क्या है?
बीजेपी दिलीप घोष को पश्चिम बंगाल में आगे कर रही है। अमित शाह ने उन्हें संगठन में वापस लाना चाह रहे हैं, वजह यह है कि बीजेपी के पास दिलीप घोष से बड़ा चेहरा नहीं है, जो बीजेपी के कोर कार्यकर्ताओं को लुभा सके। सुवेंदु अधिकारी पर टीएमसी से आने का ठप्पा है। सुकांता मजूमदार की लोकप्रियता, दिलीप घोष जैसी नहीं है। समिक भट्टाचार्य के साथ भी ऐसा है।
दिलीप घोष, 2021 के चुनावों में बेहद सक्रिय थे। कैलाश विजयवर्गीय और उनकी जुगलबंदी लोगों को पसंद आ रही थी, अब उनके सामने एक बार फिर वही जिम्मेदारी है। जमीनी स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2019 में उन्होंने बीजेपी के लिए कैंपेनिंग की थी, जिसका असर चुनावी नतीजों में भी दिखा था। वह पूर्व अध्यक्ष रहे हैं, बीजेपी को उनके अनुभवों की जरूरी है।
