उत्तर प्रदेश का हरदोई जिला हिन्दू धर्म के लोगों के लिए बेहद खास है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हरदोई में ही भगवान विष्णु जी ने दो बार अवतार लिए थे, जहां एक बार नरसिंह के रूप में अवतार लिया था, वहीं दूसरी बार उन्होंने वामन रूप में अवतार लिया था। इन दोनों अवतारों के जरिए भगवान विष्णु जी ने लोगों को अधर्म से धर्म के रास्ते पर चलने की राह दिखाई थी, साथ ही घमंडी राजाओं का अहंकार तोड़ा था। धार्मिक कथाओं के मुताबिक भगवान विष्णु जी का चौथा अवतार नरसिंह था। इस अवतार में सबसे खास बात यह है कि नरसिंह जी का आधा शरीर नर का था और आधा शरीर सिंह का था। इसी वजह से उनका नाम नरसिंह रखा गया था।

 

भगवान विष्णु जी ने वामन अवतार हरदोई के सांडी क्षेत्र में लिया था, जहां उस दौरान राजा बलि राजा थे, जो अपनी शक्तियों और धन को लेकर बेहद अहंकारी हो गए थे। उन्हें ही सबक सिखाने के लिए वामन जी ने अवतार लिया था। अब सवाल उठता है कि नरसिंह और वामन जी के अवतार की कहानी क्या है?

 

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नरसिंह जी के अवतार के पीछे की कहानी क्या है?

 

पौराणिक कथाओं के अनुसार हरदोई जिले में हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा था, जो भगवान और धर्म में विश्वास नहीं करता था। इसके अलावा वह अपने राज्य में लोगों को पूजा-पाठ और भगवान का नाम लेने से भी रोकता था। हिरण्यकश्यप अपने राज्य के लोगों को बेहद परेशान करता था, जिस वजह से हरदोई के लोग दुखी रहते थे। हिरण्यकश्यप को अपनी शक्तियों पर बेहद घमंड था। इसके पीछे एक खास रहस्य है।

 

प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी को खुश करने के लिए तपस्या की थी। इससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान दिया था। इस वरदान के मुताबिक हिरण्यकश्यप को न कोई इंसान और न ही कोई जानवर मार सकता था। इस वरदान की वजह से ही हिरण्यकश्यप को अहंकार हो गया था। वह खुद को ही भगवान समझने लगा और देवी-देवताओं की पूजा-पाठ छोड़ दी।

 

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हिरण्यकश्यप का बेटा प्रह्लाद था, जो भगवान विष्णु जी का परम भक्त था। वह हर रोज विष्णु जी की पूजा-पाठ किया करता था। यह देखकर हिरण्यकश्यप गुस्सा हो गया और उसने अपने बेटे प्रह्लाद को मारने की कोशिश की थी। इसके बाद अपने भक्त की रक्षा करने के लिए नरसिंह जी प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर दिया।

 

वामन जी के अवतार की पौराणिक कहानी

 

विष्णु जी का पांचवां अवतार वामन था। पौराणिक कहानियों के मुताबिक हरदोई के सांडी क्षेत्र में राजा बलि राज करता था, जिसने पूजा-पाठ के जरिए भगवान के आशीर्वाद से अत्यधिक धन और शक्ति प्राप्त कर ली थी। इंद्र के प्रभाव को खत्म करते हुए उसने पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग तीनों पर अधिकार जमा लिया था।

 

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इसके बाद देवताओं का अधिकार छिन गया और असुरों का प्रभाव बढ़ गया। राजा बलि को अपने धन और शक्ति पर घमंड हो गया था। इसी घमंड को तोड़ने के लिए वामन जी ने बलि से तीन पग जमीन मांगी। जैसे ही बलि ने दान का संकल्प लिया, वामन देव ने अपना आकार बढ़ाकर विराट रूप धारण कर लिया। इससे डरकर बलि ने माफी मांग ली थी।

 

डिस्क्लेमर- यह खबर मान्यताओं पर आधारित है, हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।