भारतीय एथलीट्स ने एशियन पैरा गेम्स की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में तीसरे दिन (बुधवार) भी अपना दबदबा बरकरार रखते हुए 3 गोल्ड सहित 10 मेडल जीत लिए। आयुष वर्मा ने मेंस शॉट पुट F53 स्पर्धा में भारत को दिन का पहला पैरा-एथलेटिक्स गोल्ड मेडल दिलाया। इसके बाद प्रवीण कुमार (मेंस हाई जम्प T44/64) और सचिन खिलारी (मेंस शॉट पुट F46) ने भी पोडियम पर टॉप पर फिनिश किया।

 

भारत की तरफ से सुबह के सत्र में बंटी (मेंस हाई जम्प T44/64), भाग्यश्री जाधव (विमेंस शॉट पुट F34), मोहम्मद यासर (मेंस शॉट पुट F46) और मनजीत (मेंस जैवलिन थ्रो F12/13) ने सिल्वर मेडल हासिल किए। अनुभव चौधरी (मेंस 100 मीटर T35), परवीन (मेंस शॉट पुट F46) और राकेशभाई भट्ट (मेंस 100 मीटर T37) ने ब्रॉन्ज मेडल जीते।

 

प्रतियोगिता के दूसरे दिन मंगलवार को भारत ने एथलेटिक्स में 5 गोल्ड मेडल सहित 14 मेडल जीते थे। आयुष का मौजूदा गेम्स में यह दूसरा मेडल है। उन्होंने मंगलवार को मेंस जैवलिन थ्रो F53/F54 स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

 

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आयुष ने पांचवें प्रयास में झटका गोल्ड 

आयुष ने अपने पांचवें प्रयास में 8.16 मीटर का थ्रो करके पहला स्थान हासिल किया। ईरान के अलीरेजा हेमामी 8.09 मीटर के साथ दूसरे, जबकि कजाकिस्तान के मखाम्बेट सेरिक्कालियेव 6.81 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे। F53 उन एथलीट्स के लिए है, जिनकी धड़ और पैरों की गति अत्यधिक जबकि हाथों की पकड़ कम प्रभावित होती है। वे बैठकर प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपनी छाती, ऊपरी पीठ और कंधों का उपयोग करके ताकत लगाते हैं।

हाई जम्प में प्रवीण और बंटी ने किया कमाल

प्रवीण कुमार ने मेंस हाई जम्प T44/64 स्पर्धा में गेम्स के नए रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि बंटी ने इसी स्पर्धा में सिल्वर मेडल हासिल किया। प्रवीण ने 2.05 मीटर का जम्प लगाया। वहीं बंटी ने 1.92 मीटर के जम्प के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाजोव 1.86 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे।  

 

T64 और T44 वर्ग के एथलीट अक्सर संयुक्त स्पर्धा में एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं, क्योंकि वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स पर्याप्त प्रतियोगियों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए निचले अंगों के वर्गों को एक समूह में रखता है। T64 उन एथलीट्स के लिए है जो कृत्रिम निचले अंगों का उपयोग करते हैं, जबकि T44 उन एथलीट्स के लिए है जो निचले अंगों से दिव्यांग होते हैं लेकिन वह कृत्रिम अंगों का उपयोग नहीं करते हैं।

 

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मेंस शॉट पुट F46 स्पर्धा में भारत ने किया क्लीन स्वीप

सचिन खिलारी ने मेंस शॉट पुट F46 स्पर्धा में गेम्स के नए रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि भारतीय खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में क्लीन स्वीप किया।   पेरिस पैरालंपिक में रजत मेडल जीतने वाले सचिन ने इस तरह से पिछले एशियन पैरा गेम्स में जीते गए अपने गोल्ड मेडल का अच्छी तरह से बचाव किया। उन्होंने अपने छठे और अंतिम थ्रो में 15.87 मीटर फेंककर पहला स्थान हासिल किया और 15.67 मीटर के गेम्स के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया। भारत के ही मोहम्मद यासर ने तीसरे प्रयास में 15.06 मीटर का थ्रो करके रजत मेडल जीता, जबकि परवीन 14.94 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे।  

 

F46 श्रेणी उन एथलीट्स के लिए है जिनका कोहनी के ऊपर या नीचे एक हाथ कटा होता है, या वे ऊपरी अंग से दिव्यांग होते हैं। वे खड़े होकर प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपने कूल्हों और पैरों का उपयोग करके गोला फेंकने के लिए शक्ति लगाते हैं।