साउथ अफ्रीका ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में चारों मैच जीतकर बता दिया है कि उसका पिछले एडिशन के फाइनल में पहुंचना तुक्का नहीं था। एडन मारक्रम की कप्तानी में प्रोटियाज टीम ने उस ग्रुप में टॉप किया, जिसे 'ग्रुप ऑफ डेथ' कहा जा रहा था। साउथ अफ्रीका को न्यूजीलैंड, अफगानिस्तान, UAE और कनाडा के साथ ग्रुप-D में रखा गया था। उसने कनाडा को 57 रन से हराकर अपने अभियान का आगाज किया। इसके बाद उसकी टक्कर अफगानिस्तान से हुई।
प्रोटियाज टीम ने अहमदाबाद में दो-दो सुपर ओवर तक गए उस मुकाबले में अफगानिस्तान को हराकर सुपर-8 में पहला कदम रखा। फिर उसने न्यूजीलैंड को पटखनी देकर अगले राउंड में अपनी जगह पक्की कर ली। साउथ अफ्रीका ने बुधवार को दिल्ली में UAE की चुनौती को आसानी से ध्वस्त किया और अजेय रहते हुए ग्रुप स्टेज का समापन किया। अब उसकी टक्कर रविवार को टीम इंडिया से होने वाली है, जो उसके लिए अब तक की सबसे कठिन परीक्षा होगी।
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भारत जैसी समस्या से जूझ रहा साउथ अफ्रीका
साउथ अफ्रीका का बल्लेबाजी में मजबूत पक्ष उसका टॉप-3 है। एडन मारक्रम और क्विंटन डिकॉक बेहतरीन शुरुआत दिला रहे हैं। वहीं नंबर-3 पर आकर रायन रिकलटन भी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं। इन तीनों बल्लेबाजों ने मिलकर 441 रन बनाए हैं। वहीं बाकी के सभी बल्लेबाज 229 रन ही जुटा पाए हैं। ये आंकड़े उस भारतीय टीम की याद दिलाते हैं, जब रोहित शर्मा, शिखर धवन और विराट कोहली टीम के 70-80 फीसदी रन बनाते थे और मिडिल ऑर्डर को उतना मौका नहीं मिल पाता था।
प्रोटियाज टीम भी कुछ इसी तरह की समस्या से जूझ रही है। हालांकि उनके मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाजों को मौका मिला है लेकिन वे कुछ खास नहीं कर पाए हैं। मारक्रम-डिकॉक-रिकलटन को छोड़कर कोई साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज अर्धशतक तो दूर 40 रन के आंकड़े को भी नहीं छू पाया है। डेवाल्ड ब्रेविस 4 मैच में 86 रन ही बना पाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट सिर्फ 128.35 का रहा है। ट्रिस्टन स्टब्स और डेविड मिलर भी अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं।
भारतीय टीम की कोशिश होगी कि वह पावरप्ले में ही साउथ अफ्रीका के टॉप-3 के ध्वस्त कर दे, जिससे वह उसके अंडर फायर मिडिल ऑर्डर को और दबाव में ला सके। इसके लिए अर्शदीप सिंह का शुरुआती स्पेल अहम होगा। अगर वह पहले दो ओवर में विकेट चटकाने में सफल रहते हैं तो प्रोटियाज टीम को छोटे स्कोर पर रोका जा सकता है। इस टूर्नामेंट में साउथ अफ्रीका के लोअर ऑर्डर तक बात नहीं गई है लेकिन ऊपर से रन नहीं आने पर वे भी दबाव में बिखर सकते हैं।
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रबाडा साबित हो रहे हैं कमजोर कड़ी
दिग्गज तेज गेंदबाज कैगिसो रबाडा के लिए यह टूर्नामेंट अब तक बेहद खराब गुजरा है। कनाडा जैसी टीम के सामने महंगा स्पेल हो या अफगानिस्तान के खिलाफ आखिरी ओवर में दो-दो नो-बॉल डालना, रबाडा पूरी तरह से बेरंग दिखे हैं। उन्होंने चारों ग्रुप मुकाबले खेले और हर बार अपने कोटे के 4 ओवर डाले लेकिन वह महज 2 ही विकेट ले पाए हैं। रबाडा की इकॉनमी 8.61 की रही है। यह बताता है कि वह न तो सफलता दिला रहे हैं और न ही विपक्षी बल्लेबाजों पर लगाम लगाने में सफल हो पा रहे हैं। साउथ अफ्रीकी टीम उन्हें भारत के खिलाफ मुकाबले में ड्रॉप कर सकती है।
रबाडा की जगह लेफ्ट आर्म स्पिन ऑलराउंडर जॉर्ज लिंडे को खिलाया जा सकता है, क्योंकि अहमदाबाद में भारत-साउथ अफ्रीका मैच काली मिट्टी की पिच पर होने वाली है, जो स्पिनरों को मदद करेगी। रबाडा की गैरमौजूदगी में लुंगि एनगिडी पेस अटैक की अगुवाई करेंगे। वह 3 मैचों में 8 विकेट झटक चुके हैं। उन्हें मार्को यानसन और कॉर्बिन बॉश का साथ मिलेगा।
