हरियाणा के हिसार जिले में बंद, विवादित उपदेशक रामपाल 11 साल बाद जेल से बाहर आ गया है। शुक्रवार को उसे जमानत पर रिहा किया गया है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उसे 8 अप्रैल को जमानत दे दी थी। जमानत मिलने के बाद रामपाल जेल से शुक्रवार को अब रिहा हुआ।
जेल के बाहर उसके परिवार के सदस्य और वकील उन्हें लेने के लिए मौजूद थे। रामपाल के कई अनुयायी भी उनकी एक झलक देखने के लिए वहां इकट्ठा हो गए थे। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जेल परिसर के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी।
रामपाल ने हिसार की एक अदालत के 25 सितंबर 2025 के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। उस आदेश में उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
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क्यों 11 साल से जेल में था रामपाल?
साल 2014 के एक हिंसा मामले में रामपाल पर आरोप है कि उसने अपने 900 से ज्यादा समर्थकों के साथ हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में अपनी गिरफ्तारी का विरोध किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कई समर्थक हथियारबंद थे और रामपाल ने कथित तौर पर महिलाओं और बच्चों को ढाल की तरह इस्तेमाल किया, जिससे हिंसा भड़क गई थी।
कौन है संत रामपाल?
रामपाल, सतलोक आश्रम का संस्थापक है। वह खुद को कबीरपंथ का संस्थापक बताता है। उसका असली नाम रामपाल सिंह जतिन है। वह साल 1951 में सोनीपत जिले में पैदा हुआ था। पहले वह हरियाणा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर था, बाद में कबीपंथी संत बना।
साल 2006 में संत रामपाल ने आर्य समाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। इससे उसके अनुयायियों और आर्य समाज समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।
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संत कैसे बना रामपाल?
रामपाल शुरू में हनुमान, कृष्ण और खाटूश्याम जैसे देवताओं के भक्त था, फिर वह गरीब दास संप्रदाय के स्वामी रामदेवानंद से मिला। स्वामी ने उसे बताया कि पारंपरिक हिंदू पूजा से मुक्ति नहीं मिलती। रामपाल ने भगवद्गीता और कबीर सागर पढ़े।
1993 में कबीरपंथी संत बन गया रामपाल
साल 1993 में रामदेवानंद ने उन्हें प्रवचन देने को कहा और 1994 में अपना उत्तराधिकारी बना दिया। 1995 में रामपाल ने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह आध्यात्मिक काम में लग गए। बाद में वह खुद को कबीर का वंशज बताने लगा। रामपाल चमत्कार करने का दावा करता है, वह कहता है कि उसके संपर्क में आने से बीमारियां खत्म हो जाती हैं, वह अपना अभिषेक कराता था, खुद को ईश्वर बताता था। वह कबीर को परमात्मा बताता था।
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जिस मुकदमे में सजा हुई, वह क्या है?
रामपाल हमेशा विवादित रहा है। उस पर दंगा, सरकार के खिलाफ हिंसा, कोर्ट की अवमानना के आरोप लगते रहे। नवंबर 2014 में जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने सतलोक आश्रम पहुंची तो उसके समर्थकों ने पुलिस से हिंसक झड़प की। आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
साल 2018 में संत रामपाल को चार महिलाओं और एक बच्चे की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह मौतें 2014 में उसके आश्रम के पास पुलिस से हुई झड़प के दौरान हुई थीं। फिलहाल वह उम्रकैद की सजा काट रहा है, अब जमानत पर रिहा हुआ है।
