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हरियाणा सरकार ने दो अधिकारियों गिराई गाज, क्या होती IAS के निलंबन की प्रक्रिया?

हरियाणा सरकार ने दो आईएएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। हालांकि इसके पीछे कारणों को स्पष्ट नहीं किया है। आइये ऐसे में जानते हैं कि आईएएस अधिकारी को निलंबित करने प्रक्रिया क्या है?

IAS Officer

प्रतीकात्मक फोटो। (AI Generated Image)

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हरियाणा सरकार ने गुरुवार को आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार और राम कुमार सिंह को निलंबित कर दिया है। माना जा रहा है कि 590 करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक स्कैम मामले में यह एक्शन लिया गया है। हालांकि आधिकारिक आदेश में सरकार ने निलंबन की वजह नहीं बताई है। 

 

प्रदीप कुमार 2011 और राम कुमार सिंह 2012 बैंच के आईएएस अधिकारी हैं। इनके खिलाफ निलंबन आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने यह आदेश जारी किया है। आदेश की प्रति भारत सरकार समेत अन्य अधिकारियों और विभागों को भेजी गई है। 

 

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आईएएस राम कुमार सिंह हरियाणा सरकार में आपदा प्रबंधन और राजस्व विभाग के विशेष सचिव थे। इसके अलावा वह पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के अतिरिक्त सीईओ थे। प्रदीप कुमार राज्य परिवहन विभाग के निदेशक पद पर तैनात थे। अपने आदेश में सरकार ने बताया कि दोनों अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम0 1969 के नियम 4 के अनुसार निर्वाह भत्ते मिलेगा। 

क्या है आईएएस अधिकारी को सस्पेंड करने की प्रक्रिया?

  • कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के एक सर्कुलर के मुताबिक अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम- 1969 के तहत आईएएस अधिकारियों के निलंबन की प्रक्रिया दी गई। अगर राज्य सरकार किसी अधिकारी पर एक्शन लेती है तो उसे निलंबन के कारणों और आधार के साथ आदेश की एक प्रति केंद्र सरकार में कैडर नियंत्रक प्राधिकरण को 48 घंटे घंटे के अंदर भेजनी होती है।

 

  • अगर अखिल भारतीय सेवा का कोई सदस्य किसी भी मामले में आधिकारिक तौर पर 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहा तो उसे सरकार निलंबित मान लेती है। वहीं केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत आईएएस अधिकारियों को केवल केंद्रीय समीक्षा समिति की सिफारिशों पर ही निलंबित किया जा सकता है। 

 

  • अधिकारी को जिस तारीख को निलंबित किया गया है, उससे 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजना अनिवार्य है। अगर कोई राज्य सरकार किसी आईएएस अधिकारी को निलंबित करती है तो यह आदेश 30 दिनों के लिए वैध होता है। अगर निलंबन को आगे बढ़ाना है तो केंद्र सरकार से मंजूरी लेना आवश्यक है।

 

  • अगर निलंबन का आदेश बढ़ाया गया तो यह 120 दिनों से अधिक समय तक वैध होगा, जब तक कि केंद्रीय/राज्य समीक्षा समिति की सिफारिश पर इसे पहले ही रद्द न किया जाए। वहीं केंद्रीय/राज्य समीक्षा समिति की सिफारिश पर निलंबन की अवधि को एक बार में 180 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।

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  • भ्रष्टाचार के अलावा अन्य आरोपों पर अगर किसी अधिकारी को निलंबित किया गया तो उसकी अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं होगी। हालांकि केंद्रीय समीक्षा समिति की सिफारिशों पर इसे एक साल से अधिक बढ़ाया जा सकता है। वहीं भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत आईएएस अधिकारी को अधिकतम दो वर्ष तक निलंबित रखा जा सकता है। यहां भी केंद्रीय समीक्षा समिति की सिफारिश पर यह अवधि और बढ़ाई जा सकती है।

 

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