हरियाणा के पंचकूला में वित्तीय धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। यहां के सेक्टर 11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक में पंचकूला नगर निगम का पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट के तौर पर जमा था। खाते से करीब 150 करोड़ रुपये की रकम गायब हुई है। हरियाणा सरकार ने मामले की जांच राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SVACB) को सौंपा। मंगलवार की रात ही SVACB ने बैंक के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ साजिश और धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर विनय कुमार का कहना है कि यह गड़बड़ियां लगभग 150 करोड़ रुपये की कुल राशि वाली फिक्स डिपॉजिट में पाई गई हैं। नगर निगम का दावा है कि उसके रिकॉर्ड और कोटक महिंद्रा बैंक के रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये का अंतर है।
यह भी पढ़ें: LPG छोड़ PNG में शिफ्ट हुए 2.20 लाख लोग, राज्यों को दिया जा रहा मिट्टी का तेल
दर्ज एफआईआर के मुताबिक पंचकूला के सेक्टर 11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक में नगर निगम के 16 फिक्स्ड डिपॉजिट थे। इनमें करीब 145 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि थी। परिपक्वता पर यह धनराशि 158 करोड़ रुपये से अधिक बनती है। 16 फरवरी 2026 को इनमें से 59 करोड़ रुपये से अधिक की एफडी मैच्योर हो गई।
16 मार्च को मिले बैंक स्टेटमेंट के मुताबिक 13 मार्च तक बैलेंस सिर्फ 2,17,74,394 रुपये था, जबकि यह 50 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए था। बैंक ने बताया कि कोई भी चालू टर्म डिपॉजिट नहीं है। 18 मार्च तक खाते में करीब 12 करोड़ रुपये का बैलेंस दिखाया गया।
नगर निगम रिकॉर्ड के मुताबिक बैंक में उसके कुल 16 एफडी थे। इनकी कुल राशि 145 करोड़ रुपये है। मैच्योरिटी के बाद यह रकम 158 करोड़ से ज्यादा बनती है। एफआईआर में बैंक द्वारा वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई गई। एफआईआर में कहा गया कि सत्यापन में दो अकाउंट मिले हैं, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं थे।
यह भी पढ़ें: क्या है ट्रंप का 15 सूत्रीय युद्धविराम प्लान, क्या इन शर्तों को मानेगा ईरान?
कोटक महिंद्रा बैंक ने क्या कहा?
उधर, कोटक महिंद्रा बैंक के प्रवक्ता का कहना है कि बैंक ने नगर निगम के फिक्स्ड डिपॉजिट और उनसे जुड़े बैंक खातों का विस्तार से मिलान शुरू किया। इस प्रक्रिया के तहत बैंक ने अब तक जांचे गए रिकॉर्ड के आधार पर पुष्टि की है कि अकाउंट खोलने की सभी प्रक्रियाएं, केवाईसी दस्तावेज, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और नगर निगम से प्राप्त निर्देश पूरी तरह से सही मिले। अकाउंट के लेन-देन का संचालन उचित प्रक्रिया और बैंकिंग मानदंडों का पालन करते हुए किया गया था।
इन धाराओं में मामला दर्ज
पंचकूला स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 (5) (आपराधिक विश्वास भंग), 318 (4) (धोखाधड़ी), 336 (3) (जालसाजी), 338 (मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत आदि की जालसाजी), 340 (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड), 61 (आपराधिक साजिश), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (2) और 13 (1) (a) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
