संजय सिंह, पटना: बिहार के सीवान जिले में सोमवार की सुबह उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पुलिस की कई गाड़ियां सायरन बजाते हुए एक साथ दो अलग-अलग ठिकानों पर पहुंचीं। यह कोई सामान्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे और रघुनाथपुर से  राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक ओसामा शहाब के ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की। इस हाई-प्रोफाइल ऐक्शन ने पूरे जिले की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

 

पुलिस ने एक साथ हुसैनगंज थाना क्षेत्र के प्रतापपुर स्थित पैतृक आवास और नगर थाना क्षेत्र के नई किला स्थित घर पर दबिश दी। करीब 40 मिनट तक चली सघन तलाशी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। दोनों इलाकों को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया, ताकि कार्रवाई में किसी तरह की बाधा न आए।

 

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डीआईजी और एसपी खुद मोर्चे पर

इस कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका नेतृत्व सारण रेंज के डीआईजी नीलेश कुमार और सीवान के एसपी पूरन कुमार झा खुद कर रहे थे। उनके साथ कई थानों की पुलिस, एसडीपीओ अजय कुमार सिंह, गौरी कुमारी समेत भारी संख्या में जवान मौजूद रहे। छापेमारी के बाद डीआईजी नीलेश कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि सीवान के भू-माफिया अब शहर छोड़ दें क्योंकि पुलिस उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के मूड में है। उनके इस बयान ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में ऐसे तत्वों पर शिकंजा और कसने वाला है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह कार्रवाई महादेवा थाना क्षेत्र में दर्ज एक गंभीर मामले से जुड़ी है। गोपालगंज के मांझागढ़ निवासी डॉक्टर विनय कुमार सिंह की पत्नी डॉ. सुधा सिंह ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन पर रंगदारी के बल पर कब्जा करने की कोशिश की गई। इस मामले में जांच के दौरान विधायक ओसामा शहाब समेत कई लोगों के नाम सामने आए। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद कोर्ट से सर्च वारंट हासिल किया गया, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि, फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है लेकिन पुलिस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज होगी।

 

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अचानक हुई इस छापेमारी से प्रतापपुर और नई किला इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोग पहले तो समझ नहीं पाए कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिस क्यों पहुंची है लेकिन जैसे ही मामला सामने आया, चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। कई लोगों ने इसे सीवान में चल रहे कथित भू-माफिया नेटवर्क पर बड़ी चोट बताया है, तो कुछ इसे सियासी हलकों में आने वाले बड़े बदलाव की आहट के रूप में देख रहे हैं।