संजय सिंह, पटना: राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को और जवाबदेह, संवेदनशील और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को बड़ा फैसला लिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि अब हर पंचायत में महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे, जहां आम लोगों की समस्याएं सुनी जाएंगी और उन पर 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से निर्णय लिया जाएगा।
अधिवेशन भवन में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला और समीक्षात्मक बैठक में मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को दो टूक संदेश दिया कि लटकाने-भटकाने की प्रवृत्ति खत्म करें, प्रशासन जनता का सहयोगी बने। उन्होंने कहा कि सुशासन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के अनुभव में दिखना चाहिए।
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क्राइम-करप्शन पर जीरो टॉलरेंस, अफसर बनें जनता के सहयोगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म के साथ कोई समझौता नहीं होगा। कानून का राज हर हाल में कायम रहना चाहिए और इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रोजाना सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक अपने कार्यालय में बैठकर आम लोगों से मिलें और उनकी समस्याओं का समाधान करें।
उनका मानना है कि अधिकारियों की सीधी पहुंच से ही प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार योजनाएं बनाती है, लेकिन उन्हें धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी प्रशासन की है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ काम करते हुए हर योजना को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा।
बेटियों की सुरक्षा प्राथमिकता, हादसों पर सख्त रणनीति
महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस दीदी कॉन्सेप्ट को और प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल जाने वाली बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। साथ ही, सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए उन्होंने इसे रोकने के लिए व्यवस्थित रणनीति बनाने को कहा।
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शराब माफिया पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने शराबबंदी कानून के सख्त क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अवैध शराब कारोबार को पूरी तरह समाप्त किया जाए और इसमें शामिल या संरक्षण देने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। नारकोटिक्स के खिलाफ अभियान को और तेज करने का भी निर्देश दिया गया।
CCTV और रियल मॉनिटरिंग से बढ़ेगी जवाबदेही
प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने ब्लॉक, अंचल और थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया। साथ ही, इन संस्थानों की गतिविधियों की मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा प्रतिदिन रियल मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे जवाबदेही तय होगी और कामकाज में सुधार आएगा।
अस्पताल होंगे सक्षम, मॉडल स्कूलों से बदलेगी शिक्षा
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर करने की प्रवृत्ति खत्म की जाए। लक्ष्य तय किया गया है कि 1 जुलाई तक सभी जिला अस्पताल और 15 अगस्त तक अनुमंडल अस्पतालों को बेहतर और सक्षम बनाया जाए, ताकि मरीजों को बाहर जाने की जरूरत न पड़े।
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मॉडल स्कूल पर जोर
शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की योजना सामने आई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी 533 प्रखंडों में मॉडल स्कूल विकसित किए जाएं, जिन्हें नेतरहाट विद्यालय और सिमुलतला आवासीय विद्यालय की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। उनका उद्देश्य है कि सरकारी स्कूल भी गुणवत्ता में निजी संस्थानों को टक्कर दें।
हर जिले में बनेंगे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
औद्योगिक विकास को गति देने के लिए हर जिले में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 20 नवंबर 2026 तक 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे निवेशकों को सुरक्षा और सुविधा की गारंटी दें, ताकि उद्योगों का विस्तार हो और रोजगार के अवसर बढ़ें।
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बिहार दर्शन के लिए 2 दिनों का मिलेगा अवकाश
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि बिहार के अधिकारियों और कर्मचारियों को बिहार दर्शन के लिए दो दिन का अवकाश दिया जाएगा, ताकि वे राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समझ सकें। साथ ही, हर जिले में कम से कम 50 पर्यटन स्थलों को चिह्नित कर उन्हें विकसित करने का निर्देश दिया गया है।
