बिहार में सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए चल रहे अभियान पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद एक बहुत बड़ी बात बताई है। उन्होंने बताया कि इस काम के दौरान उनके अपने घर को भी नहीं छोड़ा गया और उनके घर की सीढ़ियों पर भी बुलडोजर चलाकर उन्हें तोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जब नियम उनके खुद के लिए नहीं बदला, तो वह किसी और के लिए भी नहीं बदलेगा। उनका कहना है कि कानून सबके लिए एक जैसा है और बिहार को बेहतर बनाने के लिए यह सख्त कदम उठाना बहुत जरूरी था।
मुख्यमंत्री ने मुंगेर जिले के तारापुर में हुई बुलडोजर कार्रवाई को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बिहार को 'सुंदर और खुशहाल' बनाना है। सम्राट चौधरी का मानना है कि जब तक सड़कों और सरकारी जगहों से अवैध कब्जे नहीं हटेंगे, तब तक बिहार का विकास नहीं हो पाएगा। उन्होंने साफ किया कि यह सब राज्य की तरक्की के लिए किया जा रहा है।
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विपक्ष का विरोध
इस कार्रवाई को लेकर बिहार में राजनीति काफी तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन (CPI-ML Liberation) ने इस अभियान का कड़ा विरोध किया है। इन पार्टीयों का आरोप है कि सरकार गरीबों को परेशान कर रही है और बिना सोचे-समझे लोगों के घरों को तोड़ रही है। विपक्ष इस कार्रवाई को 'बुलडोजर राज' कह रहा है और सरकार पर सवाल उठा रहा है।
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किसे डरने की जरूरत है और किसे नहीं
मुख्यमंत्री ने आम लोगों को भरोसा दिया है कि जिनके पास अपनी जमीन के सही और कानूनी कागजात हैं, उन्हें बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है। बुलडोजर सिर्फ वही चलेगा जहां किसी ने सरकारी सड़क, स्कूल, अस्पताल या तालाब की जमीन पर कब्जा करके कुछ बनाया है। उन्होंने सरकारी अधिकारियों को भी सख्त आदेश दिया है कि किसी भी बेकसूर व्यक्ति को तंग न किया जाए और सिर्फ अवैध तरीके से बने हुए पर ही कार्रवाई की जाए।