दिल्ली में तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बने अतिक्रमण को हटा दिया है। दिल्ली नगर निगम (MCD) और पुलिस की टीम ने आधी रात को यह ऑपरेशन चलाया। इस दौरान इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात थी। नगर निगम और पुलिस की टीम जैसे ही यहां पहुंची तो सैकड़ों लोगों ने घेर लिया। इस दौरान पत्थरबाजी भी हुई, जिसमें कुछ पुलिस वाले घायल हो गए। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि लोगों ने नगर निगम की जमीन पर कब्जा कर रखा था। नगर निगम का कहना है कि इस कार्रवाई के दौरान मस्जिद को नुकसान नहीं पहुंचा है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि रात 1 बजे अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माण तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुई थी। इस दौरान स्थानीय लोगों ने पत्थरबाजी कर हालात बिगाड़ने की कोशिश की। फिलहाल हालात काबू में हैं लेकिन आसपास तनाव अब भी बना हुआ है। इलाके में अब भी भारी सुरक्षा तैनात है।
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आधी रात को क्या हुआ?
रामलीला मैदान के पास बनी फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास लोगों ने नगर निगम की जमीन पर कब्जा कर रखा था। हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद रात 1 बजे कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने बताया कि अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माण तोड़ने के लिए 30 बुलडोजर लाए गए थे। लगभग 50 डंपर भी लाए गए थे, जिनमें मलबा रखा जा रहा था। इस पूरी कार्रवाई में नगर निगम के 300 से ज्यादा कर्मचारी शामिल थे।
अधिकारियों ने बताया कि इससे कब्जाया हुआ बड़ा इलाका खाली हो गया है। इसमें ऐसी इमारतें भी शामिल थीं, जिन्हें कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया था। नगर निगम ने साफ किया है कि इस कार्रवाई में मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
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क्या-क्या तोड़ा गया?
अधिकारियों ने यह भी बताया कि फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास एक बैंक्वेट हॉल और डिस्पेंसरी को भी तोड़ दिया गया था। इसे हाई कोर्ट ने अवैध घोषित किया था।
एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर विवेक कुमार ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश पर की गई इस कार्रवाई में 36 हजार वर्ग फीट की जमीन को खाली कराया गया है।
उन्होंने बताया कि एक डायग्नोस्टिक सेंटर, एक मैरिज हॉल और दो दो-मंजिला बाउंड्री वॉल को तोड़ दिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी भी 200 से 250 गाड़ियों में भरा जाने वाला मलबा पड़ा हुआ है और इसे जल्द ही हटा लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अतिक्रमण हटाने की ये कार्रवाई रात भर जारी रही। उन्होंने कहा कि इसमें इतना समय इसलिए लगा क्योंकि इमारतें बहुत मजबूत थीं। दीवारों की मोटाई 9 इंच थी, जिस कारण टूटने में काफी समय लग गया।
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भीड़ आई और फिर होने लगी पत्थरबाजी
अवैध कब्जे को हटाने की कार्रवाई करने से पहले अमन कमेटी के सदस्यों और स्थानीय लोगों के साथ कई बैठकें भी कई थीं। इसके बावजूद जब अतिक्रमण हटाने के लिए टीम पहुंची तो कुछ लोगों ने पथराव कर दिया।
डीसीपी (सेंट्रल) निधिन वलसन ने बताया कि 'एमसीडी के कर्मचारी जेसीबी के साथ यहां आए थे। जैसे ही हमें पता चला, हमने भी अपनी फोर्स तैनात कर दी। हमने सबसे पहले इलाके को लोगों को बुलाया और समझाया।'
उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था लेकिन वहां से स्टे नहीं लगा। इसलिए सभी कानूनी रास्ते बंद हो गए थे।
डीसीपी वलसन ने कहा, 'एमसीडी टीम के साथ हम यहां आए। यहां करीब 150 लोग जमा हो गए। इनमें से ज्यादा लोग सिर्फ यह जानने के लिए आए थे क्या हो रहा है। हमने उन्हें समझाया और उन्हें कोर्ड के ऑर्डर दिखाए। इसके बाद करीब 25 लोग पत्थ फेंकने लगे। जवाबी कार्रवाई में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।'
उन्होंने बताया कि 25-30 लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। उन्होंने बताया कि इस पथराव में 5 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
देर रात हुई इस कार्रवाई के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं। इन वीडियो में पुलिस अधिकारियों को भीड़ पर लाठीचार्ज करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश देते हुए सुना जा सकता है। वीडियो में कथित तौर पर भीड़ की तरफ से पत्थर के अलावा कांच की बोतलें भी फेंकती हुई दिख रही हैं।
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अब कैसे हैं वहां हालात?
जॉइंट सीपी (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा ने बताया था कि इस पूरे इलाके को 9 जोन में बांटा गया था। हर जोन की निगरानी एडिशनल डीसीपी रैंक के अफसर कर रहे थे।
पुलिस का कहना है कि फिलहाल हालात में काबू हैं। हालांकि, एहतियात के तौर पर इलाके में भारी सुरक्षा तैनात है। पुलिस के साथ-साथ रैपिड ऐक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी यहां तैनात किए गए हैं।
वहीं, कार्रवाई के दौरान पत्थरबाजी करने पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221 (सरकारी काम में बाधा डालना), 132 (सरकारी कर्मचारी को उसका काम करने से रोकने के लिए हमला करना), 121 (सरकारी कर्मचारी को उसका काम करने से रोकने के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना), 191 (दंगा), 223(A) (सरकारी आदेश का उल्लंघन करना) समेत कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
सीनियर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बदमाशों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहे वीडियो का एनालिसिस किया जा रहा है।
इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों को भी हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस बात की भी जांच की जा रही है कि हिंसा अचानक हुई थी या डिमोलिशन ड्राइव को रोकने के लिए पहले से प्लान की गई थी।
