हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के चंबा प्रवास के दौरान भाषण से ठीक पहले बिजली गुल होने का मामला तूल पकड़ने लगा है। भरमौर में मीडिया से बातचीत के दौरान जयराम ठाकुर ने इस घटनाक्रम पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि आखिर उनके भाषण से पहले बिजली किसके कहने पर काटी जा रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए कांग्रेस सरकार के संरक्षण में इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। हालांकि, बिजली आपूर्ति बाधित होने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि चंबा में पिछले तीन दिनों से उनके प्रवास के दौरान इस तरह की स्थिति सामने आ रही है। उनके अनुसार, पिछले दिन भी भाषण शुरू होने से पहले बिजली काट दी गई थी। उन्होंने इसे सामान्य घटना मानने के बजाय गंभीर मामला बताते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
भाषण से पहले बिजली गुल, अधिकारियों से मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाषण से पहले बिजली काटे जाने की घटना को उन्होंने मौके पर ही गंभीरता से लिया और मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) को फोन कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने अधिकारी से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। जयराम ठाकुर का सवाल है कि यदि यह तकनीकी कारणों से हुआ, तो इसकी वास्तविक वजह सामने आनी चाहिए। वहीं, यदि जानबूझकर ऐसा किया गया है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इसके पीछे किसका निर्देश था और कौन अधिकारी इसमें संलिप्त है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस मामले को उठाया जाएगा और इसमें जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी।
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कांग्रेस सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप
जयराम ठाकुर ने इस घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष की शह पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से इस तरह की शरारत की जा रही है और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को अपनी बात रखने और जनता के सामने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। ऐसे में यदि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाषण से पहले बिजली बाधित होती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, जयराम ठाकुर ने इस घटना के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया है, लेकिन इस संबंध में अभी तक किसी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
तीन दिन के प्रवास में दूसरी बार उठाया मुद्दा
जयराम ठाकुर ने बातचीत के दौरान दावा किया कि वह पिछले तीन दिनों से चंबा में हैं और इस दौरान भाषण से पहले बिजली बाधित होने का मामला सामने आया है। उन्होंने विशेष रूप से पिछले दिन हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने तत्काल मुख्य अभियंता से संपर्क किया था।
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उनके बयान के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह बिजली आपूर्ति में तकनीकी व्यवधान था या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। मामले की वास्तविक स्थिति बिजली विभाग की जांच और संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब किन सवालों के जवाब जरूरी?
इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या भाषण से पहले बिजली आपूर्ति बाधित होने की कोई तकनीकी वजह थी? क्या बिजली कटने की पूर्व सूचना थी? क्या कार्यक्रम के लिए वैकल्पिक बिजली व्यवस्था की गई थी? और सबसे अहम, क्या इस मामले में किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी। फिलहाल, नेता प्रतिपक्ष ने इसे राजनीतिक रूप से गंभीर मामला बताते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही है। अब निगाहें बिजली विभाग के स्पष्टीकरण पर हैं। यदि बिजली तकनीकी कारणों से बाधित हुई थी, तो विभाग को इसकी वजह स्पष्ट करनी होगी। वहीं, यदि जानबूझकर आपूर्ति रोकी गई थी, तो इसकी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग जोर पकड़ सकती है।
