घर पर आने वाले पिसे मसाले में कई बार मिलावट के मामले सामने आ जाते हैं। कहीं कोई धनिया पाउडर के नाम पर गधे की लीद बेच देता है तो कहीं लाल मिर्च पाउडर की जगह पर केमिकल डाल देता है। अब एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें खड़े मसालों में ही खेल कर दिया गया है। मध्य प्रदेश में एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है जो नकली जीरा बेच रहा था। इसमें लगभग 80 रुपये किलो के हिसाब से मिलने वाली सौंफ पर सीमेंट की परत चढ़ा दी गई और उसे जीरा बताकर बेच दिया गया। 

 

गुजरात के एक कारोबारी की शिकायत पर हुई कार्रवाई के बाद मध्य प्रदेश के ग्वालियर में इस गिरोह का फंडाफोड़ हुआ है। गुजरात के मशहूर शिवपुरी जीरा के मालिक विमल पटेल ने इसकी शिकायत मध्य प्रदेश पुलिस से की थी। अब जब मध्य प्रदेश पुलिस ने दबिश दी तो ग्वालियर से 46 बोरी नकली जीरा पकड़ा गया है। तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

 

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क्या है मामला?

 

गुजरात के मेहसाणा के जीरा कारोबारी विमल कुमार पटेल को खबर मिली थी कि उनकी कंपनी के नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है। उन्हें यह भी पता चला कि न सिर्फ गलत इस्तेमाल हो रहा है बल्कि सौंफ लेकर उस पर केमिकल और सीमेंट का खोल डाला जाता है जिससे उसका रंग जीरे जैसा हो जाता है। फिर इसी को सुखाकर पॉलिस करके बेच दिया जाता है और नाम इस्तेमाल होता है 'शिवपुरी जीरा' का। विमल ने अपने स्तर पर इसकी जांच की तो मामला सही मिला।

 

उन्होंने इसकी शिकायत मध्य प्रदेश की पुलिस से की। ग्वालियर जिले की पुलिस ने बहोड़ापुर में स्थित एक ठिकाने पर छापा मारा तो वहां से 46 बोरी नकली जीरा बरामद किया। अगर मार्केट में इतना जीरा बेचा जाता तो इसकी कीमत लगभग ढाई लाख रुपये से ज्यादा आंकी गई है। अब पुलिस ने हितेश सिंघल, मनोज और टीटू अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है।

 

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सौंफ का जीरा क्यों बना रहे?

 

दरअसल, सौंफ का भाव 80 से 100 रुपये प्रति किलो के आसपास है। वहीं, जीरा 350 से 450 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। दोनों के दाम का यही अंतर इस कालाबाजारी का पहला और अहम कारण बनता है। दूसरी वजह है कि दोनों के रंग को छोड़ दें तो बनावट एक जैसी ही होती है। रंग बदलने के लिए इन लोगों ने केमिकल और सीमेंट का इस्तेमाल किया। अब यह केमिकल वाला जीरा सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।