पंजाब में अपनी मांगों को लेकर फिर से सरकारी कर्मचारी सड़क पर उतरेंगे। लगभग 3 लाख कर्मचारियों ने दो दिन यानी 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक कैजुअल लीव पर रहने का ऐलान किया है। इस कारण राज्य के सरकारी दफ्तरों का काम बुरी तरह से प्रभावित होने की उम्मीद है। इस हड़ताल का असर चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के साथ-साथ पंजाब रोडवेज और पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) की बस सेवाओं पर भी साफ देखने को मिल सकता है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार से बार-बार गुहार लगाने और बैठकों के बावजूद उनकी जायज मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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सचिवालय पर प्रदर्शन
सचिवालय की 'जॉइंट एक्शन कमेटी' के महासचिव साहिल शर्मा ने बताया कि इस 2 दिन के सामूहिक छुट्टी की जानकारी पहले ही प्रशासन को दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि कर्मचारी इन दोनों दिनों में दफ्तरों से दूर रहकर सरकार के रवैये के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। साथ ही सरकार को अपनी बात जोरदार तरीके से पहुंचाएंगे। 21 अक्टूबर को कर्मचारी चंडीगढ़ के पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग में इकठ्ठे होकर धरना देंगे।
क्या हैं मुख्य मांगें?
कर्मचारी हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक 18 प्रतिशत पेंडिंग महंगाई भत्ता ( DA) की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ हुई हालिया बैठक में केवल 8 फीसदी DA देने की बात कही गई। कर्मचारियों का कहना है कि यह बहुत ही कम है। साथ ही उनकी मांग है कि राज्य में पुरानी पेंशन प्रणाली दोबारा लागू की जाए जिसपर सरकार अभी विचार ही कर रही है।
पिछले महीने सरकार ने यह ऐलान किया था कि 4 महीने के अंदर वह इस पर फैसला लेगी पर कर्मचारी शायद रुकने के मूड में नहीं है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जो लोग लंबे समय से काम कर रहे यानी अस्थायी या कॉन्ट्रेक्ट वर्कर को तुरंत रेगुलर किया जाए। साथ ही प्रोबेशन पीरियड के दौरान मिलने वाले वेतन की समस्याओं और विसंगतियों को दूर किया जाए।
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हड़ताल से बढ़ेगी परेशानी
सरकारी कामकाज में सुस्ती आने के साथ-साथ आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ने वाली हैं। पंजाब रोडवेज और PRTC के कांट्रैक्ट पर तैनात ड्राइवर, कंडक्टर और मैकेनिक अपने रेगुलर होने की मांग को लेकर इस हड़ताल में शामिल हैं। इसके चलते राज्य के मुख्य रूटों पर सरकारी बसों की आवाजाही रुक सकती है। इससे रोजाना सफर करने वाले लोगों को आवाजाही में खासी दिक्कत आ सकती है।
