हिमाचल प्रदेश सरकार आर्थिक तंगी से गुजर रही है। जब से केंद्र सरकार ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद करने का फैसला किया है तब से राज्य सरकार संकट में पड़ गई है। इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने अब खर्चे में कटौती करना शुरू कर दिया है। माचल प्रदेश सरकार ने 'कैबिनेट रैंक' के दर्जे को वापस लेकर कल मंगलवार को आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही इन सभी के वेतन में अब 20 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी।
इस फैसले पर हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, 'हमारी सरकार ने सभी बोर्ड, निगम और आयोगों के चेयरमैन, वाइस-चेयरमैन और सलाहकारों को मिलने वाली कैबिनेट रैंक की सभी सुविधाएं खत्म कर दी हैं। इसके साथ ही, इनकी 20 प्रतिशत सैलरी और भत्ते भी 30 सितंबर 2026 तक स्थगित किए गए हैं। 16वें वित्त आयोग ने RDG बंद कर दिया है, जिससे प्रदेश को हर साल लगभग 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।' सीएम ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह के और भी फैसले लिए जाएंगे।
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किन नेताओं के पास था कैबिनेट रैंक?
हिमाचल प्रदेश की सरकार ने राज्य वन निगम में केहर सिंह खाची, प्रधान मीडिया सलाहाकार नरेश चौहान, पॉलिटिकल एडवाइजर सुनील कुमार बिट्टू, राज्य योजना बोर्ड में भवानी सिंह पठानिया, राज्य पर्यटन निगम में आरएस बाली, 7वें वित्त आयोग में चेयरमैन नंदलाल और सीएम के आईटी सलाहाकार गोकुल बुटेल को कैबनेट रैंक दे रखा था। इन सभी से अब कैबिनेट रैंक ले लिया गया है।
सालाना 85 लाख हो रहे थे खर्च
कैबिनेट रैंक राज्य सरकार में एक उच्च-स्तरीय पद है। यह रैंक आम तौर पर बड़े नेताओं और बोर्ड के चेयरमैन को दिया जाता है। यह पद एक कैबिनेट मंत्री के बराबर तो नहीं होता लेकिन इसमें मिलने वाली सुविधाएं एक पूर्ण कैबिनेट मंत्री के बराबर होती हैं, जिसमें सैलरी, भत्ते और सुरक्षा सुविधाओं के साथ-साथ प्रोटोकॉल और अन्य भी शामिल होते हैं। इसके अलावा 5 कर्मचारियों का स्टाफ भी कैबिनेट रैंक के साथ मिलता है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी की सैलरी पर सरकार सालाना 85 लाख रुपये खर्च कर रही थी। अब 20 प्रतिशत सैलरी में कटौती के बाद सरकार को 85 लाख रुपये का फायदा होगा। हालांकि, रघुबीर सिंह बाली और केहर सिंह सरकार से कोई सैलरी नहीं लेते थे। गोकुल बुटेल भी 2.50 लाख रुपये सैलरी की बजाय टोकन के रूप में 1 रुपया ही लेते थे। कैबिनेट रैंक चले जाने के बाद मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह फैसला कड़ा है। ऐसे फैसले लेने के लिए नेता में साहस की जरूरत होती है।
सरकार ने क्या बताया?
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार ने विभिन्न प्राधिकरणों को दिए गए कैबिनेट रैंक के दर्जे को वापस लेने का निर्णय लिया है। इसमें बोर्ड, निगम और आयोगों के चेयरमैन, वाईस चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन, प्रधान सलाहकार और राजनीतिक सलाहकार शामिल हैं। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि यह निर्णय प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के तहत लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही इन पदों को दिए गए कैबिनेट रैंक से संबंधित सभी प्रावधान तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए गए हैं।
जयराम ठाकुर ने क्या कहा?
हिमाचल प्रदेश में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने सरकार के इस फैसले को महज एक दिखावा बताया है। उन्होंने कहा, 'कैबिनेट रैंक वापस लेने की हालिया प्रक्रिया महज जनता की आंखों में धूल झोंकने का एक असफल प्रयास है, क्योंकि अगर सरकार वास्तव में फिजूलखर्ची रोकना चाहती थी, तो यह निर्णय न्यायालय द्वारा मुख्य संसदीय सचिवों को हटाए जाने के तुरंत बाद लिया जाना चाहिए था। जब सारा सरकारी खजाना अपने खास मित्रों में लुटा दिया गया है, तब केवल सुर्खियां बटोरने के लिए किए जा रहे ऐसे दिखावटी पैंतरे जनता स्वीकार नहीं करेगी और सरकार को सदन के भीतर एक-एक पैसे के हिसाब और अपने कुशासन का जवाब देना ही होगा।'
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कैबिनेट रैंक की राजनीति
कैबिनेट रैंक वैसे तो अधिकार और जिम्मेदारी भरा पद होता है लेकिन इस पद को रूठे को मनाने वाला पद भी कहा जाता है। आमतौर पर देखा जाता है कि सरकार में जिन नेताओं को जगह नहीं मिलती या फिर जिन नेताओं को टिकट नहीं मिलता, उन नेताओं को किसी बोर्ड का चेयरमैन बनाकर कैबिनेट रैंक दे दिया जाता है। एक किस्म से यह पद सिर्फ व्यक्ति के कद को बड़ा करने के लिए भी दिया जाता है। रूठों को मनाने के लिए इस तरह के फैसले हर एक सरकार लेती है।
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार कैबिनेट रैंक के कारण ही विवादों में भी आ गई थी। कर्नाटक सरकार ने कुल 90 लोगों को कैबिनेट रैंक दे दिया था, जिसमें सिर्फ 34 ही मंत्री थे। ऐसे में सरकार पर सवाल उठने लगे थे। पंजाब, हरियाणा से लेकर कर्नाटक, तमिलनाडु तक हर राज्य में पार्टी के सीनियर नेताओं को इन रैंक पर रखा जाता है।
हिमाचल के सीएम के सामने चुनौती है कि उनकी सरकार को अब 2 साल से कम समय रह गया है और पार्टी कार्यकर्ता नाराज हैं। ऐसे में कैबिनेट रैंक हटाने से भी नेताओं में और कार्यकर्ताओं में नाराजगी हो सकती है। राज्य के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री तो पहले ही कह चुके हैं कि सरकार के जो खाली पद हैं उस पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को बैठाया जाए। अब जब सीएम ने यह फैसला लिया है तो उन्हें नाराजगी का भी डर सताएगा। फिलहाल किसी नेता ने इस फैसले का विरोध नहीं किया है।
