संजय सिंह, पटना: बिहार में मकर संक्रान्ति के मौके पर जम कर राजनीति हुई। जनशक्ति जनता दल के सूत्रधार तेजस्वी यादव ने दही चूड़ा का भोज देकर खूब सुर्खियां बटोरी। वहीं पटेल मंच की ओर से आयोजित आयोजित भोज में जनसुराज के नेता आरसीपी सिंह भी पहुंचें। वह मुख्यमंत्री के जाने के बाद भोज में पहुंचे थे। उनके जाने से राजनैतिक कॉरिडोर में यह चर्चा होने लगी की आरसीपी सिंह, जेडीयू में फिर से आ सकते है। उनकी राह इतनी आसान नहीं है।

आरसीपी सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद मंत्री माने जाते थे। आईएस अधिकारी रहते हुए भी वह नीतीश कुमार के साथ थे। उनके नीतीश कुमार के साथ रहते कई नेताओं की दाल नहीं गल पा रही थी। असर यह हुआ कि धीरे धीरे आरसीपी विरोधी नेताओं ने उनकी जड़ काटनी शुरू कर दी।

यह भी पढ़ें: पहाड़ों में कम बर्फबारी फिर भी इतनी ठंड क्यों पड़ रही?

क्यों जेडीयू से दूर गए थे आरसीपी सिंह?

आरसीपी सिंह, घटती राजनीतिक हैसियत को देख आरसीपी ने जेडीयू से अपने को किनारा कर लिया। उन्होंने अपने दम पर एक दल भी बनाया पुरे बिहार का भ्रमण किया लेकिन राजनैतिक रूप से उन्हें सफलता नहीं मिली। चुनाव से पहले वे जनसुराज के नेता प्रशांत किशोर के साथ आ गए लेकिन विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर को कोई सफलता नहीं मिली। विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा ने उनका साथ छोड़ा फिर करगहर से जनसुराज के टिकट पर चुनाव लड़े रितेश पांडेय ने राजनीति से दूर रहने की घोषणा कर दी। अब चर्चा में आरसीपी है। 

यह भी पढ़ें: घना कोहरा, 100 मीटर से कम विजिबिलिटी, सड़क पर संभलकर निकलें

क्यों हो रही है आरसीपी की चर्चा 

पूर्व आइएएस अधिकारी आरसीपी सिंह लगभग ढाई दशक नीतीश कुमार के साथ रहे। जेडीयू में उन्हें राजनैतिक रूप से आगे बढ़ने का काफी मौका मिला। वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाए गए। राज्यसभा में भी एक अरसे तक रहे। राज्यसभा सदस्य रहने के दौरान उन्हें केंद्रीय  मंत्रिमंडल में अपनी जगह भी बनाई।

केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने के बाद उनके राजनैतिक विरोधी सक्रिय हो गए। उनके खिलाफ साजिश रची जाने लगी। साजिश में पड़कर वह धीरे धीरे नीतीश कुमार से दूर होते चले गए। इनके दूर होते ही विरोधियों ने अपनी नजदीकी मुख्यमंत्री से बढ़ा ली। जेडीयू में वापसी को लेकर चर्चा उनके बयान से शुरू हुई है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि नीतीश कुमार उनके अभिवावक हैं। वह कभी उनसे दूर नहीं थे, नहीं रहेंगे। उनके इस बयान को विरोधियों ने भुनाना शुरू कर दिया है। 

यह भी पढ़ें: विचारधारा से कटे, अब हो रही 'सियासी दुर्गति', उद्धव ठाकरे का ऐसा हाल क्यों?

क्या आरसीपी सिंह की घरवापसी हो पाएगी?

आरसीपी सिंह की  घर वापसी आसान नहीं है। जेडीयू के कुछ कद्दावर नेताओं के साथ उनका राजनैतिक रिश्ता बेहतर नहीं है। पार्टी के भीतर इस बात की चर्चा है की केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा आरसीपी के लिए बड़ी बाधा है। असली लड़ाई सियासी ताकत की है। आरसीपी जब नीतीश कुमार के साथ थे तो पूर्व आईएएस अधिकारी होने के कारण उनकी मजबूत पकड़ अधिकारीयों पर भी थी। 

क्यों जेडीयू नेताओं को पसंद नहीं हैं आरसीपी सिंह?

मुख्यमंत्री और आरसीपी के अलावा अधिकारी किसी की बातों पर ध्यान ही नहीं देते थे। ऐसा चर्चाएं छिड़ीं कि आरसीपी सिंह की दखल इस हद तक है कि छोटे काम कराने के लिए भी उनकी मंजूरी लेनी पड़ती थी। आरसीपी मुख्यमंत्री के नजदीक रहते हुए किसी दूसरे नेता को फटकने का मौका भी नहीं देते थे। अब उनके विरोधी नेता नहीं चाहते है कि आरसीपी की फिर से वापसी हो। पार्टी के विधायक श्याम रजक का कहना है की आरसीपी की घर वापसी से पार्टी मजबूत होगी।