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पहाड़ों में कम बर्फबारी फिर भी इतनी ठंड क्यों पड़ रही?

देश के कई राज्यो में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा में सड़कों पर घना कोहरा छाया है। जिस दिन धूप निकल रही है, उस दिन भी भीषण ठंड पड़ रही है। ऐसा क्यों हो रहा है, आइए समझते हैं।

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लाहौल स्पीति में भी इस बार कम बर्फ पड़ी है। Photo Credit: PTI

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देश के कई राज्यों में शीतलहर और गलन का प्रकोप जारी है। तेज हवाएं, सर्दी और बढ़ा रही हैं। उत्तर भारत के सभी राज्यों में ठंड से लोग बेहाल हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अभी आने वाले 5 दिन और सर्द रहेंगे। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में गंभीर शीतलहर की स्थिति रह सकती है। यह तब हो रहा है, जब पहाड़ों पर बर्फबारी कम है, फिर भी भीषण ठंड, मैदानी इलाकों में पड़ रही है। 

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक दिसंबर और जनवरी में कहीं भी बारिश नहीं हुई। हिमाचल प्रदेश में साल 1901 के बाद दिसंबर में सबसे कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जम्मू और कश्मीर में भी न के बराबर बारिश और बर्फबारी हुई है। सर्दी में हिमाचल की ज्यादातर चोटियों पर बर्फ नहीं जमी है, सैलानी बर्फबारी न होने की वजह से निराश हैं। 

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चिंता क्या है?

हिमाचल की गोद से कई नदियां निकलती हैं। हिमालयी राज्यों में पहाड़ों की चोटियों पर बर्फ का दिखना, आने वाले कल के लिए खतरा है। नदियों के सूखने की आशंका है, जंगल में आग फैलने का डर है, सींचाई के लिए किसानों को तरसना पड़ सकता है। इस बार की सर्दी में सिर्फ गलन है, सूखी सर्दी है, कई दिनों तक शीतलहर ही नहीं पड़ी, अब खेती को लेकर किसान निराश हो रहे हैं।

जनवरी महीने के 15 दिन बीत गए हैं, बारिश की उम्मीद थी लेकिन बेहद कम बारिश हुई है। उत्तर और पश्चिमी हिस्से से उम्मीद थी कि बारिश होगी लेकिन 8 फीसदी से भी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों में सर्दियां पिछले एक दशक में तेजी से सूखी होती जा रही हैं। 

भारत से नेपाल तक पड़ रही है सूखी सर्दी। Photo Credit: PTI

जब बारिश नहीं हो रही है, फिर क्यों कड़ाके की ठंड पड़ रही है?

मौसम विभाग के मुताबिक पहाड़ों में बर्फबारी के लिए पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना जरूरी है। इस साल ये विक्षोभ उत्तर भारत तक तो पहुंच रहे हैं, लेकिन उनमें नमी की कमी है। नमी न होने की वजह से बादल नहीं बन रहे हैं। बादल नहीं नहीं बन रहे हैं तो बर्फ भी नहीं गिर रही है। ये विक्षोभ अपने साथ ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों और साइबेरिया की तरफ से आने वाली बर्फीली उत्तर-पश्चिमी हवाएं ला रहे हैं, जिसकी वजह से तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है।


दूसरा कारण यह भी है कि जब आसमान में बादल नहीं होते हैं तो धूप तेज निकलती है। रात के वक्त धरती की गर्मी का बाहर निकलना आसानी से होता है, इसकी वजह से भी सर्दी बढ़ जाती है। बादल, कंबल की तरह काम करते हैं, अगर बादल रहेंगे तो धरती की गर्मी रोकेंगे। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वायुमंडल की ऊपरी परत में चलने वाली तेज हवाएं, इस बार काफी नीचे की तरफ खिसक आई हैं। ये हवाएं ध्रुवीय क्षेत्रों की ठंडक को सीधे मैदानी और निचले पहाड़ी इलाकों तक पहुंचा रही हैं।

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क्यों नहीं पड़ रही है बर्फ, गायब है बारिश?

सर्दियों के दौरान आमतौर पर उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम तीव्रता की बारिश होती है। पश्चिमी विक्षोभ होता है और पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक में बारिश की बूंदे गिरती हैं। यह बारिश रबी की फसलों के लिए अमृत का काम करती है। ज्यादा ऊंचाई पर, चट्टानों में वाटर स्टोरेज के लिए बर्फबारी और बारिश दोनों जरूरी है।

मौसम विभाग के मुताबिक दिसंबर और जनवरी में, पश्चिमी विक्षोभ की धाराएं आमतौर पर बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाली नमी से भरी पूर्वी या पश्चिमी हवाओं के संपर्क में आता है, हिमालय पर हवाओं का संगम होता है, जिसके बाद बर्फबारी या बारिश होती है। इस साल पश्चिमी विक्षोभ में नमी है।

17 जनवरी तक पश्चिमी विक्षोभ में अभी नमी बहुत कम है। कम दबाव वाला इलाका उथला है, जिसकी वजह से इसका असर, उत्तरी अक्षांश पर फैल रहा है। यही वजह है कि कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में थोड़ी बारिश हो रही है। यह पहले उन इलाकों को काटता है और वहां नमी छोड़ रहा है। उत्तराखंड पूर्वी अक्षांश पर है इसलिए बारिश नहीं हो रही है। 

उत्तर भारत के कई राज्य शीतलहर की चपेट में हैं। Photo Credit: PTI

क्यों जरूरी है सर्दी की बारिश? 

नेपाल में भी सर्दी सूखी रही है। बारिश में देरी की वजह बर्फ का कम जमाव है।  है। यह कई रबी फसलों के लिए फायदेमंद है। भले ही पहली बारिश के बाद वेस्टर्न डिस्टर्बेंस में देरी हो, लेकिन जल्दी बर्फबारी और बारिश फायदेमंद होती है। बर्फबारी के बाद जमीन पर बर्फ के रहने का समय बेहद कम है। जब दिसंबर में बर्फ गिरती है तो नमी रिसती है और यह लंबे समय तक बनी रहती है। पिघलने की प्रक्रिया भी तेज नहीं

कब हो सकती है बारिश?

18 जनवरी से 20 जनवरी के दौरान एक और पश्चिमी विक्षोभ आ सकता है। उत्तर-पश्चिमी भारत में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम भारत को छोड़कर, पूरे देश में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। हिमालय के अलग-अलग हिस्सों में, और खासकर नंदा देवी नेशनल पार्क में वैली ऑफ़ फ्लावर्स रेंज के कुछ हिस्सों में जंगल में आग लगी हुई है। इसका कारण बर्फ़बारी कम होने से जंगल के ज़मीन में नमी की कमी बताया जा रहा है। कहानी इस ऐड के नीचे जारी है।

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