गुजरात में नकली नोट के एक बड़े रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के DCP अजीत राजयान ने शुक्रवार कहा है कि अब तक इस केस में कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मुकेश थुम्मर, इस रैकेट का मास्टरमाइंड है। उन्होंने बताया कि योग गुरु प्रदीप जोतांगिया भी इसी रैकेट से जुड़ा है। 

गुजरात पुलिस ने 'प्रदीप गुरुजी' नाम से चर्चित योग गुरु को भी गिरफ्तार किया है। ये लोग, नकली नोटों के कारोबार से जुड़े थे। यह गैंग नकली 500 रुपये के नोट छाप रहे थे। पुलिस ने बताया है कि अभी तक 2 करोड़ 38 लाख रुपये के नकली नोट जब्त किए गए हैं।

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क्या था योग गुरु प्रदीप का रोल?

प्रदीप जोतांगिया ने पुलिस से दावा किया है कि यह सब लोगों की भलाई के लिए किया है। वह सूरत में सत्यम योग फाउंडेशन की आड़ में नकली नोटों का कारोबार कर रहा था। प्रदीप जोतांगिया ने पुलिस से कहा है कि वह गरीबों को इलाज के लिए मदद करता है, खाने-पीने की व्यवस्था कराता है। 

3 महीने से फल-फूल रहा था नकली नोटों का कारोबार

प्रदीप जोतांगिया ने कहा कि फाउंडेशन के पास पैसे कम पड़ गए थे, इसलिए उसने अवैध तरीके से पैसे जुटाने का प्लान बनाया। 3 से 4 महीने के भीतर इस गैंग ने प्रिंटर, कटर और दूसरी मशीनें खरीदीं हैं। सुरत में एक घर में नकली 500 के नोट छापे जा रहे थे। 

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असली जैसे दिखने वाले नोटों की हो रही थी छपाई 

गुजरात पुलिस ने बताया है कि ये नोट इतने अच्छे क्वालिटी के थे कि लोग अंतर नहीं कर पा रहे थे। इन्हें बेचने के लिए वे खरीदार ढूंढ रहे थे। पुलिस को जैसे ही भनक लगी, रेड डाली गई। नोटों के छापने का चाइनीज एंगल सामने आया। अहमदाबाद के अमराईवाड़ी इलाके में पुलिस ने नकली नोटों से भरी गाड़ी जब्त कर ली। 

कितने लोग पकड़े गए हैं?

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के DCP अजीत राजयान ने कहा, 'कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मुकेश थुम्मर, अशोक, रमेश, दिव्येश, प्रदीप, भरत और एक महिला शामिल हैं। प्रदीप महाराज खुद को योग गुरु बताता है। पुलिस उनके बारे में जांच कर रही है।'

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कैसे पकड़े गए आरोपी?

 DCP अजीत राजयान ने कहा, '8 मार्च को, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को एक टिप मिली। मामले की जांच के बाद, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक छानबीन की। जांच के दौरान, हमें पता चला कि सात लोग हाई क्वालिटी वाले नकली नोटों की तस्करी कर रहे थे। पूछताछ में पता चला कि ये लोग, चीन की ओर से आए हाई क्वालिटी पेपर और दूसरी सामग्रियों का इस्तेमाल जाली नोट बनाने के लिए कर रहे थे।' 

कैसे बनाए जा रहे थे नकली नोट?

अजीत राजयान ने कहा, 'ये नोट असली की तरह दिखते थे। इन्हें आसानी से पहचानना मुश्किल था। पहले आरोपियों ने छोटी-मोटी दुकानों पर इसे चलाया फिर इसका इस्तेमाल बढ़ा दिया। आरोपियों ने नोट छापने के लिए इंडस्ट्रियल-ग्रेड प्रिंटर का इस्तेमाल किया था। असली नोटों की तरह बनाने के लिए ChatGPT और दूसरे AI टूल्स का भी इस्तेमाल किया था।'

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अब तक क्या पता चला है?

गिरफ्तार किए गए 7 आरोपियों के साथ पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस इनकी रिमांड मांग रही है। मुख्य आरोपी मुखेश थुम्मर को बताया जा रहा है। यह रैकेट गुजरात के भीतर ही काम करता था। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को रंगे हाथों पकड़कर उनसे 2.10 करोड़ रुपये से अधिक के नोट जब्त किए। 


अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने सूरत पुलिस की मदद से सूरत में तलाशी अभियान चलाया और वहां से 28 लाख रुपये बरामद किए हैं। पुलिस ने प्रिंटिंग सामग्री और प्रिंटिंग मशीनें बरामद कीं हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस गैंग का कारोबार किन राज्यों तक फैला है।

 

पुलिस ने बताया है कि 20 प्रतिशत कमीशन के जरिए इन नोटों को चलाया जा रहा था। नोटों को जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया है।