हरियाणा में 1984 के हौंद चिल्लर हत्याकांड के पीड़ितों को 42 साल बीत जाने बाद भी इंसाफ नहीं मिला। पीड़ित परिवार आज भी इंसाफ की खातिर दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं। 1984 में हरियाणा के गुरुग्राम, पटौदी, महेंद्रगढ़, चिल्लर और गुड़ा में सिखों को निशाना बनाकर हिंसा की गई थी। शुक्रवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में होंद चिल्लर सिख जस्टिस कमेटी ने एक आपातकालीन बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कमेटी ने कहा कि 42 साल बाद भी पीड़ितों को इंसाफ न मिलने से केंद्र और राज्य सरकार के प्रदर्शन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। 

 

होंद चिल्लर सिख जस्टिस कमेटी के अध्यक्ष दर्शन सिंह घोलिया ने कहा कि पिछले चार दशकों में सरकारों ने सिर्फ आश्वासन और घोषणाएं की। मगर पीड़ितों को अभी तक न्याय नहीं मिला। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की नाकामी को दिखाता है। उन्होंने दोषियों को सजा नहीं मिलने को पीड़ित परिवारों के साथ बहुत बड़ा अन्याय करार दिया। बैठक में हरियाणा के अलावा अन्य राज्यों के 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवार पहुंचे। सभी ने कानूनी संघर्ष के अगले पड़ाव पर चर्चा की।

 

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19 जनवरी को गुरुग्राम में बड़ी बैठक 

कमेटी ने कहा कि हरियाणा सरकार ने पीड़ित परिवारों को अपॉइंटमेंट लेटर दिया है। उन्हें कैंसिल कर दिया जाएगा, क्योंकि पीड़ितों का मानना है कि नौकरी या अधूरे फायदे न्याय का विकल्प नहीं हो सकते। असली न्याय तभी माना जाएगा, जब दोषियों को सजा मिलेगी। कमेटी की अगली बैठक 19 जनवरी को गुरुग्राम में आयोजित की जाएगी। यहां बड़े पैमाने पर संघर्ष की रूपरेखा तय की जाएगी। दर्शन सिंह घोलिया का कहना है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक चिल्लर और दूसरे इलाकों में हत्याकांड को अंजाम देने वालों को सजा नहीं मिल जाती। उन्होंने विभिन्न संगठनों से साथ देने की अपील भी की। 

 

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बैठक में पीड़ित राम सिंह (गुड़गांव), गोपाल सिंह (रेवाड़ी), दर्शन सिंह हेली (मंडी पटौदी), अंकित कुमार, हरभजन सिंह (हनुमानगढ़), रोबिन कौर (गुड़गांव), हरदीप सिंह (पटियाला), रविंदर सिंह (हरियाणा), अमरीक सिंह, कुलतार सिंह (कालियांवाली मंडी) और हरप्रीत सिंह खालसा (अमृतसर) के अलावा अन्य पहुंचे। बता दें कि दर्शन सिंह घोलिया पिछले चार दशक से 1984 के हौंद चिल्लर हत्याकांड की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि नौकरी या पैसे की मदद न्याय का विकल्प नहीं है, दोषियों को सजा मिलना ही असली न्याय है।