हरोली में एक कॉलेज के नामकरण को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब निजी भावनाओं और दिवंगत प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की स्मृति तक पहुंच गई है। भाजपा की ओर से कॉलेज के नाम को लेकर सवाल उठाए जाने के बीच हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह सांत्वना पत्र साझा किया है, जो प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के निधन के बाद उन्हें भेजा गया था।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि आखिर उपमुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री का पत्र सार्वजनिक करने की जरूरत क्यों महसूस हुई? क्या कॉलेज के नामकरण पर उठ रहे राजनीतिक सवालों का जवाब वह एक व्यक्तिगत संदर्भ के जरिए देना चाहते हैं या फिर यह संदेश देना चाहते हैं कि दिवंगत सिम्मी अग्निहोत्री के सम्मान का मुद्दा राजनीतिक दलों की सीमाओं से अलग है?
पत्नी के नाम पर कॉलेज को लेकर घिरे मुकेश
मुकेश अग्निहोत्री हरोली विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच चुनाव जीत चुके हैं। वह वर्तमान में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं। ऐसे में उनके विधानसभा क्षेत्र में उनकी दिवंगत पत्नी के नाम पर सरकारी कॉलेज का नामकरण राजनीतिक बहस का विषय बनना स्वाभाविक है। हालांकि, कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार सरकारी डिग्री कॉलेज हरोली का नाम 12 मार्च 2024 की सरकारी अधिसूचना के बाद 'प्रोफेसर सिम्मी अग्निहोत्री राजकीय महाविद्यालय हरोली' किया गया। कॉलेज वर्ष 2017 में ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
यानी नामकरण कोई हालिया फैसला नहीं है, बल्कि यह निर्णय सिम्मी अग्निहोत्री के निधन के कुछ समय बाद लिया गया था।
डिप्टी सीएम ने खोला निजी पत्र का पन्ना
कॉलेज के नाम को लेकर भाजपा की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद मुकेश अग्निहोत्री की सोशल मीडिया पोस्ट का केंद्र राजनीतिक जवाब से अधिक व्यक्तिगत भावनाएं बन गईं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी दिवंगत महिला को लेकर भाषा और व्यवहार की एक मर्यादा होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सिम्मी अग्निहोत्री के निधन पर भेजे गए सांत्वना पत्र को सार्वजनिक किया।
इस कदम के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। एक तरफ भाजपा कॉलेज के नामकरण को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं अग्निहोत्री यह दिखाने की कोशिश करते नजर आए कि सिम्मी अग्निहोत्री को लेकर सम्मान का भाव केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं था। प्रधानमंत्री की ओर से किसी शोकाकुल परिवार को संवेदना भेजना हालांकि सामान्य सार्वजनिक शिष्टाचार का हिस्सा है। प्रधानमंत्री कार्यालय भी अलग-अलग मौकों पर दिवंगत लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करने की सूचनाएं जारी करता रहा है।
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सवाल नाम का या संस्थान की पहचान का?
इस विवाद का दूसरा पहलू कॉलेज के विकास से जुड़ा है। हाल ही में सिम्मी अग्निहोत्री की जयंती के अवसर पर कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुकेश अग्निहोत्री ने करीब 9.50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले साइंस ब्लॉक की आधारशिला रखी। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि नए ब्लॉक से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी।
कॉलेज की वेबसाइट भी संस्थान को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और विशेष रूप से छात्राओं की शिक्षा एवं सशक्तीकरण पर केंद्रित बताती है। इसलिए राजनीतिक बहस केवल नामकरण तक सीमित नहीं रहती। असली सवाल यह भी है कि जिस व्यक्ति के नाम पर किसी शिक्षण संस्थान का नाम रखा गया है, उस संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियां और भविष्य की दिशा क्या है।
सिम्मी की पहचान सिर्फ मुकेश की पत्नी तक सीमित नहीं
प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग से जुड़ी शिक्षाविद थीं। हाल में उनकी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम की रिपोर्टों में उनके शिक्षा, शोध और सामाजिक सरोकारों में योगदान का उल्लेख किया गया। हरोली में उनके नाम पर कॉलेज का नामकरण इसी सार्वजनिक पहचान के संदर्भ में देखा जा रहा है। उनके नाम पर फाउंडेशन की गतिविधियों और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। कॉलेज का नाम किसके नाम पर रखा जाए, सरकारी संस्थानों का नामकरण किस आधार पर हो और किसी जनप्रतिनिधि के प्रभाव की इसमें कितनी भूमिका होनी चाहिए, ये सभी वैध राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल हैं। लेकिन इन सवालों को दिवंगत व्यक्ति की व्यक्तिगत गरिमा से अलग रखना भी जरूरी है।
मुकेश अग्निहोत्री की पोस्ट का मूल संदेश यही था कि राजनीतिक विरोध व्यक्ति के सार्वजनिक काम और फैसलों तक सीमित रहना चाहिए। उनका तर्क है कि किसी दिवंगत महिला को राजनीतिक विवाद में घसीटना उचित नहीं है।
दूसरी ओर, कॉलेज के नामकरण पर सवाल उठाने वालों के तर्कों को भी राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जाना चाहिए। किसी सरकारी संस्थान के नामकरण पर सवाल उठाना अपने आप में दिवंगत व्यक्ति का अपमान नहीं माना जा सकता। असली प्रश्न यह है कि बहस किस भाषा और किस आधार पर की जा रही है।
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पीएम का पत्र बना सियासी बहस का नया केंद्र
यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सांत्वना पत्र अब इस विवाद का नया केंद्र बन गया है। मुकेश अग्निहोत्री ने पत्र साझा करके मूल विवाद को निजी संवेदना और महिला सम्मान के सवाल से जोड़ दिया है।
अब देखना यह होगा कि आगे राजनीतिक बहस कॉलेज के नामकरण, संस्थान के विकास और सरकारी निर्णय की प्रक्रिया तक रहती है या फिर सिम्मी अग्निहोत्री की व्यक्तिगत स्मृति भी इसका हिस्सा बनी रहती है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि हरोली कॉलेज का नामकरण अब सिर्फ एक सरकारी अधिसूचना का विषय नहीं रहा। यह प्रदेश की राजनीति में स्मृति, सम्मान, संस्थागत नामकरण और राजनीतिक विरोध की मर्यादा, चारों सवालों को एक साथ सामने ले आया है।
क्या बोले उप मुख्यमंत्री
'प्रोफेसर सिम्मी अग्निहोत्री के बारे में अनाप शनाप बोलने वाले चंद भाजपाई पहले देश के प्रधानमंत्री की उनके बारे राय इस पत्र के माध्यम से जान लें।' अग्निहोत्री ने अपने फेसबुक अकाउंट पर नरेंद्र मोदी का पत्र साझा कर यह लिखा है।
