पश्चिम बंगाल के नदिया जिले का शांतिपुर इलाका, बुनकरों के लिए जाना जाता है। शांतिपारा में ही एक गांव ढाकापार है। यहां सैकड़ों बुनकर परिवार रहते हैं। कपड़े की सिलाई, कटाई और कारीगरी यहां की जाती है। यह इलाका, बुनकरों का केंद्र कहलाता है। मतुआ इलाके में यह जगह, बेहद चर्चित है। यहीं के एक बुनकर सुबोध देबनाथ ने सिर्फ इस डर में खुदकुशी कर ली कि उन्हें चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिलीजन (SIR) की प्रक्रिया के तहत एक नोटिस दिया है। खुदकुशी करने वाले शख्स की उम्र 56 साल है।
सुबोध देबनाथ के परिवार में एक बेटा और उनकी पत्नी हैं। 4 जनवरी को चुनाव आयोग की ओर से SIR सुनवाई का नोटिस उन्हें दिया गया था। नोटिस के बाद से ही सुबोध देबनाथ गंभीर तनाव में थे। नाम न होने की वजह से वह डर गए थे। उनके परिवार का कहनाहै कि 2010 की वोटर लिस्ट में उनका नाम था लेकिन 2002 की SIR लिस्ट में उनका नाम नहीं था। सुबोध के परिवार ने कहा कि इस गम में उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया। उन्हें लगता था कि इस वजह से उनकी नागरिकता चल जाएगी, भारत से बाहर कर दिया जाएगा।
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गिरफ्तारी के डर से खुदकुशी कर ली
सुबोध की पत्नी लिपि ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में बताया, 'नोटिस मिलने के बाद वह परेशान थे। वह बार-बार कह रहे थे कि अगर दस्तावेज अधिकारियों को नहीं दिखाया तो जेल भेज देंगे। उन्होंने बार-बार कहा कि हम सुनवाई में नहीं जाएंगे।'
नोटिस मिला तो खाना छोड़ बैठा शख्स
सुबोध ने नोटिस मिलने के बाद खाना-पीना छोड़ दिया था। वह कई दिनों से परेशान थे। उन्होंने पड़ोसियों से भी इस डर के बारे में बताया था। सुबोध के पड़ोसियों ने कहा है कि वे चुनाव आयोग के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत देंगे।
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पश्चिम बंगाल में SIR के लिए क्या बवाल मचा है?
पश्चिम बंगाल में SIR लेकर भारी हंगामा हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग, आमने-सामने है। चुनाव आयोग का तर्क है कि मतदाता सूची संशोधन के जरिए राज्य में फर्जी और अवैध वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। TMC और ममता बनर्जी इसे BJP की साजिश बता रही हैं। कई जगह इस प्रक्रिया का हिंसक विरोध भी हुआ है। कई BDO ऑफिस में तोड़फोड़, आगजनी की घटनाएं समने आईं हैं। टीएमसी का दावा है कि काम के बढ़ते बोझ की वजह से कई बूथ स्तरीय अधिकारियों ने जान दी है।
