कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने हाल ही में वृंदावन और अन्य पवित्र तीर्थ स्थलों पर होने वाले प्री-वेडिंग शूट को लेकर एक अहम बयान दिया है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है। दरअसल, देवकीनंदन ठाकुर का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे यह कहते नजर आ रहे हैं कि उन्होंने वृंदावन की पवित्रता बनाए रखने के लिए एक प्री-वेडिंग शूट का विरोध किया और उसे रुकवाया। हालांकि, इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह वीडियो काफी पुराना है, जबकि कुछ का दावा है कि यह प्री-वेडिंग शूट वृंदावन में नहीं, बल्कि जयपुर में हुआ था।
इस पूरे मामले में खबरगांव वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता। देवकीनंदन का कहना है कि वृंदावन कोई पिकनिक स्पॉट नहीं बल्कि कई लोगों की आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि यमुना किनारे लड़के-लड़कियों का रील्स बनाना चिंता का विषय है।
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क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में देवकीनंदन ने कहा, 'वह वृंदावन में घूम रहे थे जहां एक लड़का और लड़की अपना प्री-वेडिंग शूट करवा रहे थे। मैंने देखा और उनसे पूछा कि क्या हो रहा है। बच्चों ने बताया कि शूट चल रहा है। मैंने उनसे कहा कि मंदिर के सामने इस तरह से फोटो खिंचवाना क्या आपको सही लगता है। बच्चों ने कहा कि बड़े अच्छे तरीके से इसका जवाब दिया और तुरंत ही इसे रोक दिया।'
उन्होंने कहा, 'वृंदावन कोई पिकनिक स्पॉट या मनोरंजन का केंद्र नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिरों और यमुना घाटों पर लड़के-लड़कियां फिल्मी गानों पर जिस तरह के 'प्री-वेडिंग शूट' और वीडियो या रील्स बनाते हैं, वह ब्रज की मर्यादा को ठेस पहुंचाता है।'
उनका कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपने लोगों के जरिए कई जगहों पर चल रहे ऐसे शूट को रुकवाया है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से यह मांग है कि ब्रज के धार्मिक स्थलों पर व्यावसायिक और फिल्मी तरीके से होने वाले ऐसे शूट्स पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।
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मंदिरों में ड्रेस कोड
इस विवाद के साथ ही उन्होंने मंदिरों में ड्रेस कोड लागू करने की बात को भी दोहराया है। उनका तर्क है कि अगर आप क्लब या ऑफिस के लिए खास कपड़े पहनते हैं तो मंदिर आने के लिए भी मर्यादित कपड़े होने चाहिए। हाफ पैंट, फटी हुई जींस या छोटे कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश बंद होना चाहिए। केवल देवकीनंदन ठाकुर ही नहीं बल्कि प्रेमानंद जी महाराज और अन्य ब्रजवासी संतों ने भी समय-समय पर इस विषय पर नाराजगी जताई है।