भारत में 16 फरवरी से लेकर 20 फरवरी तक, हुआ AI इम्पैक्ट समिट, दुनियाभर में सुर्खियों में रहा। देश में 5 दिनों तक चले इस कार्यक्रम में 20 देशों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया। दिल्ली के 'भारत मंडपम' में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। सारी चर्चा दो शब्दों के इर्द-गिर्द हुई। AI और रोबोटिक डॉग। AI पर समिट था तो लोग, जाहिर सी बात है कि AI का ही नाम लेते। एक शब्द और भी छाया रहा। रोबोटिक डॉग।

लोगों ने इस 'डॉग' के साथ खूब तस्वीरें खिंचवाई। यह डॉग, लोगों से मिलता, हाथ मिलाता, उनका अभिवादन करता। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने इसे खरीदा था लेकिन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने इसे गलगोटिया मेड बता दिया। इसे केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री अश्विनी वैष्णव तक ने इसे X पर शेयर कर दिया।

होना क्या था, भारत की दुनियाभर में खूब किरकिरी हुई। गलगोटिया यूनिवर्सिटी को 'AI इम्पैक्ट समिट' के एक्सपो से बाहर कर दिया गया। गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ से खूब सफाई पेश की गई। सरकार की खूब आलोचना हुई, विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया। लोगों ने खूब खरी-खोटी सुनाई।

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तो क्या हम सच में रोबोटिक की दुनिया में एक डॉग तक बनाने के लिए लायक नहीं हैं? पूरी दुनिया रोबोटिक में ऐसा क्या कर रही है, जो हम नहीं कर रहे हैं? रोबोटिक का इस्तेमाल क्या सिर्फ फोटो खिंचवाने या मनोरंजन तक है, कहां-कहां किस सेक्टर में इसका इस्तेमाल हो रहा है, कितना बड़ा बाजार है, रोबोटिक्स की दुनिया में क्या हो रहा है, इतिहास क्या है? आइए जानते हैं इन सारे सवालों का जवाब-

फिल्मी दुनिया से बिलकुल अलग हैं आज के रोबोट

रोबोटिक फिल्मों के इतिहास में रोबोट्स को अक्सर दो तरह से पेश किया गया। एक तरफ उन्हें महाविनाशक दिखाया गया है, दूसरी तरफ उद्धारक। 

एक तरफ 'रोबोट', 'द टर्मिनेटर', 'मैट्रिक्स' और '2001: ए स्पेस ओडिसी' जैसी फिल्में हैं, जहां रोबोट को मानवता के लिए एक विनाशकारी खतरे और क्रूर विलेन के रूप में पेश किया गया है। दूसरी तरफ, 'वॉल-ई', 'इंटरस्टेलर', 'ट्रांसफॉर्मर' और 'बिग हीरो 6' जैसी फिल्में हैं, जिनमें रोबोट्स को भावनाओं से भरपूर, वफादार साथी और रक्षक के तौर पर दिखाया गया है।

 

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पर असल कहानी, इससे अलग है-
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रोबोटिक डॉग से आगे बहुत बड़ी है रोबोट की दुनिया

  • इंडस्ट्रियल रोबोट: दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल इन रोबोट का होता है। कारखानों और फैक्ट्रियों में इनका इस्तेमाल बढ़ा है। बड़े-बड़े रोबोटिक आर्म वाले रोबोट, दिन-रात फैक्ट्रियों में काम करते हैं।
  • कोबोट्स: ये रोबोट इंसानों का काम आसान करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। हल्के-फुल्के कामों में मदद करते हैं। छोटे-मोटे कारखाने, दुकानों और होटल सेक्टर में इनका इस्तेमाल होता है।
  • सर्विस रोबोट: इनका इस्तेमाल घरों में खूब हो रहा है। फर्श साफ करना हो, होटल में डेस्क तक खाना पहुंचाना हो, डांस कराना हो, नजर रखनी हो, देखरेख करनी हो, ऐसे रोबोट्स के लिए संभावना बड़ती जा रही है।  
  • ह्यूमनॉइड रोबोट: ये इंसान जैसे दिखने वाले रोबोट होते हैं। दुनिया के कई देश इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। AI का सबसे ज्यादा इस्तेमाल, इसी सेक्टर में हो रहा है। ये रोबोट, बात कर सकते हैं, काम सिखा सकते हैं, किसी भी सवाल का जवाब दे सकते हैं। सोफिया रोबोट और टेस्ला का ऑप्टिमस, ह्यूमनॉइड रोबोट के उदाहरण हैं।  
  • मेडिकल रोबोट: हेल्थ सेक्टर की दुनिया आसान बनाने में इस तरह के रोबोट का खूब इस्तेमाल हो रहा है। बहुत बारीक और जटिल ऑपरेशन करने के लिए इनका इस्तेमाल होता है। विंची सर्जिकल सिस्टम, इसी का उदाहरण है। दिल्ली एम्स में 13 महीने में 1000 से ज्यादा रोबोटिक सर्जरी हो चुकी है। 
  • मिलिट्री और डिफेंस रोबोट: अमेरिका, चीन से लेकर भारत तक, इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। ऐसे रोबोट, बम को निष्क्रिय कर सकते हैं, जासूसी कर सकते हैं, दुश्मन के घातक इलाकों में जाकर निगरानी कर सकते हैं। ड्रोन प्रणाली भी इसी का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, ऐसे हथियारों को अस्वीकार्य और नैतिक रूप से घृणित बता चुके हैं। 
  • एग्रीकल्चर रोबोट: कृषि क्षेत्र में रोबोट की मांग बढ़ती जा रही है। अमेरिका और चीन जैसे देशों में फसल काटने, कीटनाशक छिड़कने, बीज बोने, खरपतवार हटाने जैसे कामों में इन्हें आजमाया जा रहा है। अमेरिका, चीन और जर्मनी इस सेक्टर में भारत से कोसों आगे हैं। 
  • मोबाइल रोबोट: ऐसे रोबोट, ऑटोनोमस मोबाइल रिमोट (AMRs) कहलाते हैं। ये खुद-ब-खुद चलने-फिरने वाले रोबोट होते हैं। गोदामों में सामानों की ढुलाई कर सकते हैं, दवाइयों को इधर से उधर पहुंचा सकते हैं, फैक्ट्री में पार्ट्स ले जा सकते हैं। इनमें पहले से इंस्ट्रक्शन फीड होते हैं, ये बिना किसी इंसान के कंट्रोल के अपना काम करते हैं। 
  • एक्सप्लोरेशन रोबोट: इस तरह के रोबोट का इस्तेमाल, अंतरिक्ष और जोखिम भरे क्षेत्रों में होता है। बात समंदर की हो या आसमान की, इन्हें बेहतर बनाने की कोशिशें की जा रहीं हैं। सैटेलाइट में इस तरह के उपग्रहों का इस्तेमाल खूब हो रहा है। 
  • एजुकेशनल रोबोट: बच्चों और छात्रों को इससे समझाना बेहद आसान होता है। रोबोटिक्स, कोडिंग और साइंस सिखाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में इनका खूब उपयोग हो रहा है।

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मार्केट पर चीन का 'कब्जा'

आंकड़े बताते हैं कि 2025 में दुनिया के 87 फीसदी ह्यूमनॉइड रोबोट चीन में बने हैं। अकेले एगिबॉट और यूनीट्री जैसी कंपनियां ही मार्केट का बड़ा हिस्सा संभाल रही हैं। वहीं, अमेरिकी कंपनियों की हिस्सेदारी अभी 13 फीसदी से भी कम है। 

कितना बड़ा है रोबोट बाजार?

'परसिस्टेंस मार्केट रिसर्च' की साल 2025 की रिपोर्ट बताती है कि साल 2032 तक, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स का बाजार 47 अरब डॉलर के पार हो सकता है। साल 2025 में रोबोटिक्स बाजार का मूल्य 23.5 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया था, जिसके 2032 तक 47.1 अरब डॉलर तक पहुंने का अनुमान जताया गया है।

क्यों बढ़ रहा है रोबोटिक्स का बाजार?

साल 2025 से 2032 के बीच यह बाजार 10.5 फीसदी की दर से सालाना बढ़ेगा। इस बढ़त के पीछे एक वजह, दुनियाभर के उद्योगों की ओर से अपनाई गई नई औद्योगिक नीतिया हैं। अब ज्यादातर उद्योग, 'इंडस्ट्री 4.0' की तरफ बढ़ रहे हैं। एक जमाने में फैक्ट्रियां, सिर्फ मशीनों से चलती थीं, अब बड़े उद्योगों में मशीनें, इंटर्नमल कम्युनिकेशन सिस्टम पर काम करती हैं। डेटा विश्लेषण, स्क्रूटनी और ऑटोमेशन पर रोबोटिक मशीनें खुद काम कर रहीं हैं। 

बढ़ते मांग की एक वजह यह भी है कि अब रोबोटिक मशीनें, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करती हैं। मशीनें खुद सीखती हैं और बेहतर हो रहीं हैं। आम घरों में झाड़ू पोछा करने वाली मशीनें हों, सर्जरी और हेल्थ सेक्टर में काम करने वाली रोबोटिक मशीनें हों, या विजिलेंस वाली मशीनें, रोबोट की मांग हर सेक्टर में है।  
 

एक वजह यह भी है कि विकसित देशों में मजदूरों की भारी कमी है और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। मार्च 2024 तक 95 फीसदी निर्माता स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग की तरफ रुझान दिखाने लगे थे।इंटरनेशनल रोबोटिक्स फेडरेशन की रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में ऑपरेशन रोबोटों की संख्या में 14 फीसदी का इजाफा हुआ था। 

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किन रोबोट्स की ज्यादा मांग है?

सबसे ज्यादा, जिन रोबोट की मांग बढ़ी है, उनमें आर्टिकुलेटेड रोबेट एक है। आर्टिकुलेटेड रोबोट उन रोबोट्स को कहते हैं, जिनके कई हिस्से फंक्शनल होते हैं। ये हिस्से, उन्हें इंसानी हाथ की तरह मुड़ने, घुमाने और लचीले ढंग से काम करने की क्षमता देते हैं। आर्टिकुलेटेड रोबेट का इस्तेमाल, फैक्ट्रियों में वेल्डिंग, पेंटिंग, सामान उठाने-पकड़ने और अस्पतालों में सर्जरी जैसे जटिल कामों में होता है। 

दुनिया में इस तरह के रोबोट का बाजार, करीब 44 फीसदी है। इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में ऐसे रोबोट, बेहद सटीक साबित हुए हैं। तकनीकी भाषा में इसे 'सलेक्टिव कंप्लायंस अर्टिकुलेटेड रोबोट आर्म (SCARA) कहते हैं। SCARA रोबोट 11.2 फीसदी की दर से सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं। 

20 किलोग्राम तक के पेलोड वाले रोबोट की बाजार हिस्सेदारी 35 फीसदी है, जबकि 21 से 60 किलोग्राम वाले सेगमेंट में 11.2 फीसदी का इजाफा देखा गया है। 20 किलोग्राम तक के पेलोट वाले रोबोट का इस्तेमाल, मोबाइल फोन के पुर्जे जोड़ना, पैकेजिंग, क्वालिटी चेकिंग, मॉनिटरिंग, से जुड़ा है। 

21 से 60 किलो तक का वजन उठाने वाले रोबोट की भी मांग तेजी से भढ़ी है।  अब कारखाने केवल छोटे-मोटे काम ही नहीं, बल्कि वेल्डिंग करना, भारी पुर्जे उठाने के लिए भी इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।  कंपनियां, अब भारी वजन उठाने का काम, AI क्षमता वाले रोबोट को सौंपना चाहती हैं।

दुनिया भर के निर्माता अभी श्रमिकों की कमी और बढ़ती मजदूरी से जूझ रहे हैं। सर्वे के अनुसार, 42 फीसदी निर्माता इस कमी को पूरा करने के लिए ऑटोमेशन का सहारा ले रहे हैं। स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग अपनाने से उत्पादन में 10 से 20 फीसदी और कर्मचारियों की उत्पादकता में 7 से 20 फीसदी का सुधार देखा गया है।

रोबोट अब केवल मशीन ही नहीं रहे। अब रोबोट, AI, सेंसर और क्लाउड एनालिटिक्स के साथ मिलकर 'इंटेलिजेंट सिस्टम' की तरह एडवांस किए जा रहे हैं। 

 
हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में रोबोटिक्स की मांग 12.4 फीसदी की दर से बढ़ रही है। दवाइयों के बनाने और लैब टेस्टिंग की बदलती जरूरतें इस मांग के पीछे जिम्मेदार हैं। अब कोलेबोरेटिव रोबोट का चलन भी बढ़ रहा है। ये रोबोट, इंसानों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। 


कैसे तय होता है कौन सा रोबोट बेहतर है?

  • चलने-फिरने की क्षमता 
  • वजन उठाने की ताकत 
  • हाथों का कौशल  
  • AI लर्निंग
  • उत्पादन क्षमता

रोबोट बनाने वाली बड़ी कंपनियां कौन सी हैं?

  • एजिबॉट
  • यूनिट्री
  • यूबीटेक
  • लेजु रोबोटिक्स
  • इंजन AI
  • फूरियर इंटेलिजेंस
  • फिगर AI
  • एजिलिटी रोबोटिक्स
  • टेस्ला 

रोबोट इंडस्ट्री की चुनौतियां क्या हैं?

तुषार उपाध्याय, रोबोटिक इंजीनियर:-
रोबोट के तेजी से बढ़ते बाजार के सामने कुछ रुकावटें भी हैं। छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) के लिए रोबोट लगाना बेहद महंगा सौदा हो रहा है। अभी हार्डवेयर के साथ-साथ ट्रेनिंग और मेंटेनेंस पर ज्यादा खर्च होता है। जैसे-जैसे रोबोट इंटरनेट और क्लाउड से जुड़ रहे हैं, उन पर साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ सकता है। अलग-अलग कंपनियों के रोबोट के बीच तकनीकी तालमेल की कमी भी एक बड़ी चुनौती हो सकती है। 

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स (IFR) ने 'वर्ल्ड रोबोटिक्स 2025' रिपोर्ट में बताया है कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है। चीन ने दुनिया में पहली बार अपनी फैक्ट्रियों में 20,27,000 एक्टिव इंडस्ट्रियल रोबोट का आंकड़ा पार कर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

चीन कैसे रोबोटिक्स में विस्तार कर रहा है?

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में चीन में 2.95 लाख नए रोबोट लगाए गए, जो वैश्विक मांग का 54 फीसदी हिस्सा है। चीन की यह उपलब्धि मैन्युफैक्चरिंग बेस को आधुनिक बनाने की रणनीति का नतीजा माना जा रहा है। सिर्फ तीन साल में वहां रोबोट का स्टॉक दोगुना हो गया है। चीन में पहली बार घरेलू रोबोट निर्माताओं ने विदेशी कंपनियों को पछाड़ दिया है।

बाजार में चीनी सप्लायर्स  की हिस्सेदारी बढ़कर 57 फीसदी हो गई है। स्थानीय कंपनियां अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स या ऑटोमोटिव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और लकड़ी के सामानों की मांग बढ़ गई है। नए क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार हो रही है। टेक्सटाइल और गार्टमेंट सेक्टर में चीन ने वैश्विक स्तर पर होने वाली 95 फीसदी रोबोट इंस्टॉलेशन अकेले ही की है।

भारत कहां है?

भारत अब औद्योगिक रोबोट लगाने के मामले में दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश है। साल 2024 में भारत में रिकॉर्ड 9,120 रोबोट इंस्टाल हुए हैं, साल 2024 की तुलना में यह 7 फीसदी ज्यादा है। भारत की इस छलांग के पीछे ऑटोमोटिव सेक्टर का हाथ है। पुर्जे बनाने वाले निर्माताओं ने निवेश में 40 फीसदी इजाफा किया है। हालांकि, चीन के 20 लाख के मुकाबले भारत का कुल स्टॉक अभी 52,570 है, जो भविष्य में विकास की बड़ी संभावनाओं को दर्शाता है।

अमेरिका और यूरोपियन यूनियन को पीछे छोड़ रहा चीन

जहां एशिया में रोबोटिक्स का ग्राफ ऊपर जा रहा है, वहीं अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका में 2024 के दौरान नई इंस्टॉलेशन में 9 फीसदी की गिरावट देखी गई। साल 2025 तक, चीन के पास अमेरिका के मुकाबले 5 गुना ज्यादा रोबोट बना लिए गए थे। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ के ऑटोमोटिव सेक्टर में रोबोट अपनाने की दर में 5 फीसदी गिरावट आई है।

जर्मनी, रोबोटिक्स सेक्टर में यूरोप का सबसे बड़ा बाजार है, फिर भी वहां, ऑटो सेक्टर में रोबोट इंस्टॉलेशन में 25 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। राजनीतिक अस्थिरता और मंदी की वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में भारी कमी आई है। कई कंपनियों के इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट रुके हैं। 

उम्मीद क्या है?

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि चीन 2028 तक हर साल, औसतन 10 फीसदी का इजाफा होगा। चीन दुनिया का सबसे बड़ा रोबोटिक्स बाजार बना रहेगा।  की वृद्धि के साथ दुनिया का मुख्य रोबोटिक्स बाजार बना रहेगा। भारत में भी साल 2025 में और इजाफा होने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर, अमेरिका में लेबर की कमी और प्रोडक्शन की घटती दर की वजह से भारत में इसके विस्तार की ज्यादा उम्मीद इस रिपोर्ट में जताई गई है। 


किस सेक्टर में सबसे ज्यादा मांग है?

IFR की रिपोर्ट बताती है कि मेडिकल रोबोट्स की मांग दुनिया में तेजी से बढ़ी है। सर्जिकल सेक्टर में 41 फीसदी से ज्यादा मांग बनी हुई है, रिहैबिलिसेशन एंड नॉन इनवेसिव थेरेपी में मांग 106 फीसदी तक बढ़ गई है। डायग्नॉस्टिक और मेडिकल लैब एनालिसिस सेक्टर में 610 फीसदी तक, रोबोटिक सर्जरी की मांग बढ़ी है। 

इंटरनेशनल फेडरेशन रोबोटिक्स (IFR) ने साल 2025 में 'वर्ल्ड रोबोटिक्स 2025' रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दुनिया भर की फैक्ट्रियों में रोबोट्स की मांग पिछले 10 साल में दोगुनी हो गई है। साल 2024 में दुनिया भर में 5,42,000 नए इंडस्ट्रियल रोबोट लगाए गए हैं। वर्तमान में पूरी दुनिया में कुल 46.6 लाख से ज्यादा रोबोट काम कर रहे हैं। IFR के अध्यक्ष ताकायुकी इतो बाते हैं कि उद्योगों का तेजी से होता डिजिटलीकरण इस भारी मांग की मुख्य वजह है।

यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका या एशिया, आगे कौन?

रोबोटिक्स की दुनिया में एशिया सबसे आगे है। दुनिया के कुल नए रोबोट्स में से 54 फीसदी अकेले चीन में लगाए जा रहे हैं। चीन अपनी घरेलू तकनीक को इतनी तेजी से बढ़ा रहा है कि वहां के बाजारों में अब 57 फीसदी रोबोट्स चीनी कंपनियों के ही बने होते हैं। वहीं, जापान और अमेरिका जैसे देशों में पिछले साल के मुकाबले रोबोट्स की मांग में थोड़ी गिरावट देखी गई है।

भारत इस रेस में कहां है?

इंटरनेशनल फेडरेशन रोबोटिक्स (IFR) की रिपोर्ट बताती है कि भारत इस रेस में 6वें पायदान पर है। भारत इस सेक्टर में खरीदार से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। भारत में जो कंपनियां, रोबोटिक्स के बाजार में उतरीं हैं, अभी शुरुआती स्टेज में हैं। भारत ऑटोमोबाइल सेक्टर सबसे बड़ा खरीदार देश जरूर है। भारत अब फैक्ट्रियों में रोबोट लगाने के मामले में दुनिया में भी छठे स्थान पर पहुंच गया है। भारत में रोबोटिक्स की इस रफ्तार की सबसे बड़ी वजह, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री है, जहां रोबोट्स के इस्तेमाल में 16 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ देखी गई है। 

यूरोप और अमेरिका का हाल क्या है?

यूरोप और अमेरिका रोबोटिक इनोवेशन के हब रहे हैं। यूरोप में करीब 85,000 यूनिट्स इंस्टाल हैं। जर्मनी, रोबोटिक्स वर्ल्ड में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। अमेरिका में करीब 50,100 इंडस्ट्रियल, रोबोट यूनिट हैं। साल 2025 में वैश्विक रोबोट बाजार 6 फीसदी की दर से बढ़ेगा और इंस्टॉलेशन की संख्या 5.75 लाख तक पहुंच जाएगी। एक अनुमान के मुताबिक साल 2028 तक हर साल लगाए जाने वाले रोबोट्स की संख्या 7 लाख के पार पहुंच सकती है।

किस-किस सेक्टर में रोबोट की संभावनाएं बढ़ी हैं?

  • मेडिकल: रोबोट, सर्विस और मेडिकल सेक्टर में कमाल कर रहे हैं। विजिलेंस से लेकर अस्पतालों में ऑपरेशन और सर्जिकल टूल तक में, रोबोट की मदद ली जाती है। मेडिकल रोबोट अब सर्जरी और लैब टेस्ट में इंसानों से ज्यादा सटीक साबित हो रहे हैं। रोबोट की मांग इस सेक्टर में 91 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया है। 
  • लॉजिस्टिक्स: गोदामों और फैक्ट्रियों के अंदर सामान ढोने वाले रोबोट्स की मांग काफी बढ़ी है। इंडस्ट्रियल सेक्टर में रोबोट की जरूरतें बढ़ती जा रहीं हैं। पहले जिन कामों के लिए ज्यादा मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, उस सेक्टर में ये रोबोट, काम आसान कर रहे हैं। रोबोट, मानवीय त्रुटियों की गुजाईश भी कम कर रहे हैं। 
  • डोमेस्टिक: घरेलू रोबोटिक सेक्टर की मांग भी तेजी से बढ़ी है। अब वैक्यूम क्लीनर जैसे कंज्यूमर रोबोट्स की बिक्री भी 11 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। इनकी संख्या दुनिया में बढ़कर, 2 करोड़ यूनिट्स के पार पहुंच गई है।

कहां से आया यह टर्म, कैसे हुई शुरुआत, इतिहास क्या है?

साल 1920 में चेक लेखक कारेल चापेक ने एक नाटक लिखा था। नाटक का नाम 'रॉसम यूनिवर्सल रोबोट्स' था। यह नाटक, R.U.R नाम से खूब प्रसिद्ध हुआ। यह शब्द, स्लाविक शब्द 'रोबोटा' से आया था, जिसका मतलब बंधुआ मजदूरी है। साल 1954 तक, दुनिया को पहला रोबोट मिला। इसे तैयार किया था जॉर्ज डेवोल ने। 

एक बड़े तबके का मानना है कि'रोबोटिक्स का जनक' जॉर्ज डोवोल हैं। उन्होंने 1954 में 'यूनिमेट' नाम का पहला डिजिटल रूप से प्रोग्राम किया जाने वाला रोबोट बनाया था। जोसेफ एंगेलबर्गर ने डेवोल के साथ मिलकर उन्होंने दुनिया की पहली रोबोट कंपनी 'यूनिमेशन' शुरू की। इसीलिए एंगेलबर्गर को भी आधुनिक रोबोटिक्स का पितामह माना जाता है।

यूनिमेट का आविष्कार 1954 में हुआ, लेकिन इसका व्यावसायिक उपयोग 1961 में जनरल मोटर्स की फैक्ट्री में शुरू हुआ। जॉर्ज डोवोल ने 1956 में जोसेफ एंगेलबर्गर के साथ यूनिमेशन कंपनी शुरू की थी। पहला पेटेंट भी इसी साल हुआ था। यहीं से रोबोट के सफर की शुरुआत हुई थी।