पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की धूम मची है। सिलीगुड़ी शहर में सैकड़ों पोस्टर लगे हैं, जिन पर हंगामा बरपा है। इन पोस्टरों में लोगों से बिरयानी और पूजा का सामान सिर्फ हिंदू व्यापारियों से खरीदने की अपील की गई है। दुर्गा पूजा 12 अक्टूबर से शुरू है, पोस्टर दुर्गा पूजा शुरू होने से पहले ही लग गए थे। पोस्टरों ने नवरात्रि के मांसाहार वाली बहस भी छेड़ दी है।

ये पोस्टर हिंदू जागरण मंच लगाए हैं। मंच के नेताओं का कहना है कि वे किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं। वे चाहते हैं कि त्योहार की कमाई का फायदा हिंदू व्यापारियों को मिले। तृणमूल कांग्रेस, लेफ्ट और कांग्रेस ने ऐसे पोस्टरों की आलोचना की है। विपक्ष ने सत्तारूढ़ BJP को निशाना बनाते हुए कहा है कि धर्मनिरपेक्ष देश में ऐसा नहीं होने दिया जा सकता।

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रेणुका चौधरी, सांसद, कांग्रेस:-
ऐसे पोस्टर बनाने वाला व्यक्ति छोटी सोच और संकीर्ण मानसिकता का होगा। जो अनाज उगा रहा है, क्या आप जानते हैं कि वह किस धर्म का है? जब आप अस्पताल में भर्ती होंगे और आपको खून की जरूरत पड़ेगी, तो क्या अपनी जान बचाने के लिए आप खून देने वाले व्यक्ति का धर्म और जाति देखकर खून लेंगे?

पोस्टरों में क्या लिखा गया है?

  • 'आपको बिरयानी खाने से कोई नहीं रोक रहा, लेकिन हिंदू की दुकान से खाइए'
  • 'मांस हिंदू की दुकान से खरीदें'
  • 'QR कोड से भुगतान करने से पहले दुकानदार का नाम देख लें'

कुछ पोस्टर में हिंदुओं की अलग-अलग जातियों को एकजुट रहने और नशा मुक्त समाज बनाने की भी अपील की है। 

 

 

हिंदू जागरण मंच और विपक्ष ने क्या कहा?

हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिरयानी हिंदू दुकानों से लोग खाएं, फूल और आरती के सामान भी हिंदू दुकानदारों से ही लें। इंडियन एक्सप्रेस ने हिंदू जागरण मंच के नेता नीलांजन पांडा से बातचीत की है और लिखा है कि मंच का कहना है कि दुर्गा पूजा के आसपास बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था रहती है। हिंदुओं को इसका फायदा क्यों न मिले। हिंदू जागरण मंच का कहना है कि पंडालों के पास सिर्फ हिंदू दुकानदारों को जगह दी जाए। 

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क्या चाहता है हिंदू जागरण मंच? 

हिंदू जागरण मंच एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन है। यह संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक अनुषांगिक संगठन माना जाता है। इसकी स्थापना 1980 में हुई थी। बंगाल में यह 2008 के आसपास सक्रिय हुआ। इस संगठन ने भी बीजेपी की जड़ों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। 

 

सत्तारूढ़ दल के विरोधी क्या कह रहा है?

CPM के राज्य सचिव और पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने इसे सोची-समझी साजिश बताया है। उनका कहना है कि ऐसे पोस्टरों का मकसद एक समुदाय को अलग-थलग करना और समाज में बंटवारा करना है। उन्होंने इसे आर्थिक बहिष्कार की कोशिश कहा। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि धर्मनिरपेक्ष देश में ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने पुलिस से ऐसे लोगों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मंच को सलाह दी कि हिंदुओं की इतनी चिंता है तो वह राज्य और केंद्र सरकार से बात करे।