एक तरफ अविमुक्तेश्वरानंद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ मुखर हैं। दूसरी तरफ कई संगठनों ने मिलकर 8 मार्च को 'दिल्ली चलो' का नारा दिया है। केंद्र की बीजेपी सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी है। यति नरसिंहानंद, करणी सेना और अब स्वामी आनंद स्वरूप ने बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। काली सेना के संस्थापक और शंकराचार्य परिषद के अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धनानंद और खुद को चाणक्य बताया है। उनका कहना है कि अब वह नरेंद्र मोदी की सत्ता का समूल नाश करके ही रहेंगे। 8 मार्च के आंदोलन का एलान करने वाले इन लोगों का कहना है कि वे किसी दल के एजेंट नहीं हैं और अपने हक पर अडिग हैं।
मंगलवार को पंजाब के पटियाला में एक ही मंच पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी, यति नरसिंहानंद, नवल किशोर महाराज और आनंद स्वरूप जुटे थे। इस मंच से रवींद्र पुरी ने बीजेपी की तारीफ की तो स्वामी आनंद स्वरूप ने इसकी आलोचना की। उन्होंने लिखा है, 'कभी भी धर्म सत्ता को राजसत्ता के सामने घुटने नहीं टेकना चाहिए जैसा आज हो रहा है हमें चट्टान की तरह संतों के साथ खड़ा होना चाहिए ये षड्यंत्र किसी के साथ हो सकता है जो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ हुआ।'
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मोदी को धनानंद क्यों बता रहे आनंद स्वरूप?
स्वामी आनंद स्वरूप का एक बयान खूब चर्चा में है जिसमें वह पीएम मोदी को धनानंद बता रहे हैं। वह कहते हैं, 'मोदी आज का धनानंद है और मैं आज का चाणक्य हूं। मोदी रूपी धनानंद की सत्ता का समूल नाश करने का प्रण मैंने ले लिया है। यह धर्म के खिलाफ है, देश के खिलाफ है और मानवता के खिलाफ है। लगातार ऐक्ट लाकर जैसे सवर्णों का शोषण हो रहा है, उनका दमन हो रहा है, उन्हें दलित बनाया जा रहा है। इसीलिए संन्यासी सड़कों पर है। इस देश को समझने की जरूरत है कि जब संन्यासी सड़कों पर है तो देश कितने संकट में होगा।'
उनका कहना है कि 8 मार्च को दिशा दिखा देंगे। आनंद स्वरूप का कहना है, 'मुझे तो चुनाव नहीं लड़ना है लेकिन मैं चाणक्य हूं और चंद्रगुप्त तैयार करूंगा। इन नरेंद्र मोदी और अमित शाह रूपी धनानंदों की सत्ता का समूल नाश किया जाएगा।'
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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) को भी आड़े हाथ लेते हुए स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा था, 'इनका नाम रसूल सेवा संघ हो गया है और मोहन भागवत का नाम मोहम्मद मोहन भागवत हो गया है। मोहन भागवत अब हिंदू नहीं कठमुल्ले हो गए हैं।'
क्यों है आंदोलन की तैयारी?
स्वामी आनंद स्वरूप ने 8 मार्च के आंदोलन के बारे में लिखा है, '8 मार्च रामलीला मैदान का आंदोलन अब जन–जन की आवाज़ बन चुका है। यह न किसी पार्टी के पक्ष में है, न किसी के खिलाफ। यह सवर्ण समाज की पीड़ा, सम्मान और अधिकार की लड़ाई है। UGC Act और 1990 के बाद से हुए प्रहारों के विरोध में यह राष्ट्रीय चेतना का आह्वान है। हम किसी दल के एजेंट नहीं — हम अपने हक़ पर अडिग हैं।'
