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बजट 2025 से हेल्थ सेक्टर को क्या मिलेगा? जानें एक्सपर्ट्स की राय

बजट 2025 पर सभी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। आइए जानते हैं, स्वास्थ्य क्षेत्र में एक्सपर्ट क्या उम्मीद कर रहे हैं?

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।(Photo Credit: PTI File Photo)

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आगामी केंद्रीय बजट 2025 को लेकर आम जनता और विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं, खासकर स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े बदलावों पर। बीते वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं का बजटत लगातार बढ़ा है। साथ ही कई ऐसी दवाएं हैं जिनकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और अस्पताल में भर्ती होने पर भारी खर्च आम आदमी को उठाना पड़ता है। यही वजह है कि इस बार बजट में मेडिकल क्षेत्र को लेकर विशेष घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है।

 

बात दें कि 2024-25 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए बजट आवंटन 90,658.63 करोड़ रुपये था, जो 2023-2024 के बजट में संशोधित अनुमान 80,517.62 करोड़ रुपये से 12.59% अधिक है।

दवाओं की कीमतों में राहत की उम्मीद

बीते सालों में जरूरी दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसका मुख्य कारण कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दवा बनाने की लागत का बढ़ना बताया जाता है। ऐसे में बजट 2025 में सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह जरूरी दवाओं को किफायती बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठा सकती है। इसमें दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने वाले विभाग को ज्यादा आर्थिक सहयोग देने, जरूरी दवाओं को मूल्य नियंत्रण सूची में लाने और शोध पर अधिक निवेश करने जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।

 

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इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल को लेकर भी जरूरी फैसले लिए जाने की संभावना है। इम्पोर्ट किए जाने वाले कच्चे माल पर टैक्स बढ़ाकर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और जैविक दवाओं के स्टडी को बढ़ावा देने से घरेलू कंपनियों को राहत मिल सकती है। इससे मेडिकल इंडस्ट्री को मजबूती मिलेगी और दवाओं की कीमतें नियंत्रण में आ सकती हैं।

अस्पताल में भर्ती होने के खर्च में कमी की जरूरत

भारत में लाखों लोग हर साल अस्पतालों में भर्ती होने के कारण आर्थिक संकट में पड़ जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और निजी अस्पतालों की महंगी सेवाओं के कारण आम जनता को भारी परेशानी होती है। ऐसे में आगामी बजट में सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह अस्पताल में भर्ती होने के खर्च को कम करने के लिए ठोस कदम उठा सकती है।

 

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सरकार स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को ज्यादा आसान बनाए और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका फायदा मिले, इसके लिए नीतियों में बदलाव करना चाहिए। इसके साथ, निजी अस्पतालों को ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में मेडिकल सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे दूर-दराज के इलाकों में भी लोगों को बेहतर मेडिकल सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में सुधार की जरूरत

सरकार द्वारा पहले भी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कई योजनाएं शुरू गई थीं लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में कई कमियां बनी हुई हैं। खासकर सार्वजनिक अस्पतालों की स्थिति को सुधारने की जरूरत है, ताकि आम जनता को कम लागत में बेहतर इलाज मिल सके। इस दिशा में बजट में सरकारी अस्पतालों के लिए अधिक धनराशि दिए जाने की संभावना है।

 

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साथ ही, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर देने से चिकित्सा क्षेत्र की लागत को कम किया जा सकता है। टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों के जरिए दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को सस्ती और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।

कर संबंधी राहत और अन्य पहलें

विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जरूरी सिविधाओं पर टैक्स में छूट दे। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं को कर मुक्त करने, एक्स-रे मशीनों और अन्य चिकित्सा उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी में छूट देने से चिकित्सा सेवाओं की लागत में कमी आ सकती है।


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