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एयर प्यूरीफायर से हवा साफ, लेकिन कितना बढ़ता है कार्बन उत्सर्जन?

हवा साफ करने का दम भरने वाले एयर प्यूरिफायर कंपनी खुद प्रदुषण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। साथ ही कार्बन क्रेडिट के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाने से भी पिछे हटती है। आइए जानते हैं कैसे?

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Grok Generated Image

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दुनिया भर में प्रदुषण एक बहुत बड़ी समस्या है। कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) या अन्य ग्रीनहाउस गैसों (GHG) को कम करने या हटाने के लिए कई तरीकों का प्रयोग किया जाता है। कार्बन क्रेडिट इसी व्यवस्था को सुधारने का तरीका है। कार्बन क्रेडिट मुख्य रूप से वे उद्योग खरीदते हैं जो भारी मात्रा में GHG या कार्बन का उत्सर्जन करते हैं। इन्हें प्रदूषण कम करने के लिए कानूनी या स्वैच्छिक लक्ष्यों को पूरा करना होता है। यह तो हो गई कार्बन क्रेडिट की बात।

 

अब बात करते हैं पॉल्यूशन की जिसके बढ़ते ही भारत में खासकर एयर प्यूरीफायर का बाजार उछाल मारता है। एयर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनियां पाल्यूशन बढ़ने की वजह से लोगों को साफ हवा का देने की बात करते हैं। इस परिस्थिति में गड़बड़ी के लिए इनकी क्या भूमिका रहती हैै। आइए समझते हैं। कार्बन क्रेडिट हर उन कंपनी को खरीदना चाहिए जो किसी न किसी रूप में पॉल्यूशन करते हैं। सवाल यह उठता है कि  एयर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनी खुद अपनी जिम्मेदारी निभा रही है या नहीं। 

 

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कार्बन क्रेडिट कैसे काम करता है?

एक कार्बन क्रेडिट का मतलब है कि धारक को 1 टन CO₂ या उसके बराबर की GHG उत्सर्जित करने की अनुमति है। जो कंपनियां या परियोजनाएं जैसे सौर, पवन ऊर्जा या पेड़ लगाना प्रदूषण को कम करती हैं, वे कार्बन क्रेडिट अर्जित करती हैं। जो कंपनियां तय सीमा से अधिक प्रदूषण करती हैं, वे कम प्रदूषण करने वाली या पर्यावरण के लिए काम करने वाली कंपनियों से ये क्रेडिट खरीदती हैं। 


अब बात करते हैं एयर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनियों की जो पाल्यूशन बढ़ने की वजह से लोगों को साफ हवा का देने की बात करते हैं। लेकिन क्या यह कंपनियां इस तरह के तकनीक का इस्तेमाल करके मशीन बनाकर कितनी मात्रा में पॉल्यूशन बढ़ाती है? साथ ही इसे अपनी जिम्मेदारी समझ कर कम करने की कोशिश भी करती है या नहीं। 

PM2.5 हटाने से नहीं मिलता 'कार्बन क्रेडिट'

सर्दियों का मौसम आते ही देश के महानगरों में एयर प्यूरीफायर की बिक्री अचानक उछाल मारने लगती है। 'साफ हवा', '99.9% बैक्टीरिया-फ्री' और 'ग्रीन टेक्नोलॉजी' जैसे लुभावने वादों के साथ हर साल हजारों करोड़ रुपये के एयर प्यूरीफायर बेचे जाते हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि जो मशीन आपके कमरे के भीतर की हवा से जहरीला PM2.5 और धूल हटा रही है, क्या वह पर्यावरण के लिए वाकई 'ग्रीन' है? या फिर क्या इसे बनाने वाली कंपनियां इस 'साफ हवा' के बदले कार्बन मार्केट से पैसे भी कमा सकती हैं? सामान्य तौर पर, एयर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनियां कार्बन क्रेडिट नहीं खरीदती हैं।

 

कई लोग मानते हैं कि हवा साफ करने वाली मशीनें पर्यावरण बचा रही हैं, तो इन्हें कार्बन क्रेडिट मिलता होगा। लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। एयर प्यूरीफायर केवल स्थानीय प्रदूषकों जैसे PM2.5, PM10, धूल को फिल्टर में फंसाता है। कार्बन क्रेडिट केवल तब मिलता है जब हवा से CO2 या GHG की मात्रा को मापने योग्य तरीके से कम किया जाए। भारत के आधिकारिक कार्बन क्रेडिट ट्रेडिग स्कीम (CCTS) और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के पास इंडोर एयर प्यूरीफायर से कार्बन क्रेडिट जनरेट करने की कोई मान्यता प्राप्त नियम ही नहीं है।

 

यह सबसे बड़ा विरोधाभास है। जिस मशीन को हम 'ग्रीन' समझकर घर लाते हैं वह अपनी पूरी लाइफसाइकिल में कार्बन उत्सर्जित करती है। यदि आपके घर में प्यूरीफायर चलाने के लिए आ रही बिजली कोयले से बन रही है, तो वह कमरे के भीतर तो हवा साफ कर रहा है लेकिन कमरे के बाहर दुनिया में CO2 उत्सर्जन बढ़ा रहा है।

 

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कंपनियों के ESG रिपोर्टिंग का सच

ब्रांड्स अपनी रिपोर्ट्स में पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन प्यूरीफायर से उनके कनेक्शन को बारीकी से समझना जरूरी है। भारत में Eureka Forbes इस सेक्टर में सबसे बड़ी कंपनी है। FY26 की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने अपने कार्बन उत्सर्जन में 4% की कमी की है और 20% रिन्यूएबल एनर्जी अपनाई है। लेकिन यह कमी उनकी फैक्ट्रियों की वजह से है ना कि उनके बेचे गए एयर प्यूरीफायर्स के कारण।


Philips कंपनी 2045 तक Net-Zero और EcoDesign पर काम कर रही है। भारत में इसका नेट ऑपरेशनल कार्बन फुटप्रिंट शून्य दर्ज है लेकिन यह उनके पूरे ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशन्स के कारण है। Coway की बात करें तो वह 2030 तक 50% एमिशन कम करने और रीसाइक्लिंग पर काम कर रही है पर इनका भी प्यूरीफायर से सीधे क्रेडिट जनरेट करने का कोई दावा नहीं है। Xiaomi ने 2040 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी का लक्ष्य रखा है और लाइफसाइकिल अप्रोच अपनाती है। पर उनका प्यूरीफायर भी सीधे कार्बन क्रेडिट नहीं देता।


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