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कमजोर मानसूनी बारिश आपकी जेब पर कैसे असर डालती है?

इस साल मौसम विभाग ने सामान्य से कम मानसून का अनुमान लगाया है, जिसका असर न केवल किसानों पर बल्कि आपकी जेब पर भी पड़ सकता है।

representative image of worried People due to weak monsoon

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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भारतीयों की जेब पर असर सिर्फ वित्त मंत्री की नीतियों से ही नहीं पड़ता, बल्कि मानसून की बारिश भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। यह सुनकर आपको हैरानी हो सकती है कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भारत आज भी काफी हद तक बारिश की बूंदों पर निर्भर है। मानसून अच्छा रहा तो खेती-बाड़ी से लेकर महंगाई तक कई चीजें नियंत्रण में रहती हैं लेकिन अगर बारिश कमजोर पड़ जाए तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर देखने को मिलता है।

 

जब मानसून मेहरबान होता है तो बाजारों में रौनक रहती है, महंगाई काबू में रहती है और सरकार का बजट भी ट्रैक पर रहता है। दूसरी ओर जब मानसून दगा दे जाता है तो देश के बड़े से बड़े अर्थशास्त्री और नीति-निर्माता भी बेबस नजर आते हैं। इस साल मौसम विभाग (IMD) ने सामान्य से कम (करीब 90%) मानसून का अनुमान जताया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस बार मौसम हर किसी की जेब का मजा किरकिरा करने वाला है।

 

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कमजोर मानसून जेब पर कैसे असर डालता है?

  • रसोई का बजट बिगड़ जाता है: भारत की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। कम बारिश होने से दाल, चावल, सब्जियां और तेल जैसी फसलों की पैदावार घट जाती है। मार्केट में सप्लाई कम होने से इनके दाम आसमान छूने लगते हैं, जिससे आपकी थाली महंगी हो जाती है।
  • दूध और डेयरी उत्पाद महंगे हो जाते हैं: बारिश कम होगी तो मवेशियों (गायों-भैंसों) के लिए चारे और पानी की किल्लत हो जाएगी। इसका सीधा असर दूध के उत्पादन पर पड़ता है, जिससे पैकेट वाला दूध, दही, घी और पनीर महंगे हो जाते हैं।
  • बिजली का बिल बढ़ सकता है: जलाशयों में पानी कम होने का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। इससे बिजली बनाने में दिक्कत आती है और कई जगहों पर पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। नतीजतन बिजली महंगी हो सकती है और लोगों को पानी के इंतजाम पर भी ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है। वहीं मानसून कमजोर होने का मतलब है भयंकर गर्मी और उमस। ऐसे में घरों और ऑफिसों में एसी-कूलर का इस्तेमाल बढ़ जाता है।
  • निवेश और कारोबार पर असर पड़ता है: भारत की एक बड़ी आबादी गांवों में रहती है और खेती से कमाती है। फसल खराब हुई तो ग्रामीणों की कमाई घटेगी। जब जेब में पैसा ही नहीं होगा, तो वे नई बाइक, मोबाइल, कपड़े या रोजमर्रा का सामान (FMCG) कम खरीदेंगे। कंपनियों की बिक्री घटेगी तो शेयर बाजार गिरेगा और आपके म्यूचुअल फंड या शेयर्स की वैल्यू भी कम हो जाएगी।
  • लोन की EMI में राहत नहीं मिलती: जब मानसून खराब होने से महंगाई बढ़ती है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ब्याज दरों को कम नहीं कर पाता, बल्कि महंगाई रोकने के लिए उन्हें बढ़ा देता है। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ता है। आपके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI कम होने के बजाय वैसी ही बनी रहती है या और महंगी हो जाती है।


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