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283 अरब डॉलर का व्यापार घाटा, सर्विस सेक्टर ने कैसे संभाला देश? आंकड़ों से समझिए

आर्थिक सर्वे 2026 में कहा गया है कि सर्विसेज ट्रेड सरप्लस भारत की बाहरी अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। यह व्यापार घाटे को संभालते हुए देश को आर्थिक संकट से बचाए हुए है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। AI इमेज। Photo Credit: ChatGPT

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की चेयरमैन क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने हाल ही में दावा किया था कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के असर से वैश्विक अर्थव्यवस्था बच नहीं सकती है। उन्होंने कहा था कि भले ही अभी तक वैश्विक मंदी के कोई साफ संकेत नहीं दिख रहे हैं, लेकिन खतरों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

 

क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने इशारा किया था कि अगर यह संघर्ष और बढ़ा तो तेल आपूर्ति बाधित होती रहेगी, जिसका सीधा असर वैश्विक विकास पर पड़ेगा। उन्होंने इसे वैश्विक विकास के लिए स्पष्ट खतरा बताया है। IMD की ओर से 8 जुलाई को 'वर्ल्ड इकोनॉमिक ग्रोथ' का नया अनुमान जारी होने वाला है। आर्थिक अनिश्चितता और व्यापारिक घाटे के इस दौर में भी भारत भी संभला हुआ है। 

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सर्विस सेक्टर भारत को कैसे संभाल रहा है?

आर्थिक सर्वे 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि देश को मोबाइल, कपड़े और मशीनों जैसे ठोस सामानों (मर्चेंडाइज) को बेचने के मुकाबले विदेश से खरीदने में लगभग 283.5 अरब डॉलर का भारी घाटा हुआ है। इस नुकसान की भरपाई देश के सर्विस सेक्टर ने बेहतरीन तरीके से की है।

भारत ने वित्त वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 387.5 अरब डॉलर की सेवाएं दुनिया को बेचीं, जबकि सिर्फ 198.7 अरब डॉलर की सेवाएं बाहर से लीं। सामान के व्यापार में जो बड़ा नुकसान हमें हो रहा था, उसे सर्विस सेक्टर से होने वाली तगड़ी कमाई और मुनाफे ने पूरी तरह संभालकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखा है। आईटी, सॉफ्टवेयर और कंसल्टेंसी की तिकड़ी काम आ रही है। 

सर्विस सेक्टर भारत की कैसे कर रहा मदद?

इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर और कंसल्टेंसी जैसे सर्विस सेक्टर की सुविधाओं की बदलौत भारत का व्यापार फायदेम में रहा है। सर्विस सेक्टर के एक्सपोर्ट की वजह से देश को 188.8 अरब डॉलर का मुनाफा हुआ है। यह मुनाफा ठोस उत्पादों के व्यापारिक घाटे के लगभग दो-तिहाई हिस्से के बराबर है। 

सर्विस सेक्टर कैसे बचा रहा बाजार?

भारत विदेश से कई अहम सामानों को खरीदता है। उन्हें खरीदने में जो देश का विदेशी मुद्रा भंडार खर्च होता है, उसकी भरपाई सॉफ्टवेयर, कंसल्टेंसी और बिजनेस जैसी सेवाओं को बेचकर हो जाती है। भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियां और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत विदेश से कच्चा तेल, सोना, पैक्ड फूड ज्यादा खरीदता है लेकिन बेचता कम है।

भारतीय अर्थव्यवस्था को इससे घाटा होता है। भारत अब सॉफ्टवेयर, आईटी और बिजनेस सर्विसेज का हब बन रहा है, इसलिए ज्यादा मुनाफा इसी सेक्टर से हो रहा है। सर्विस सेक्टर से होने वाला यह मुनाफा, सामान के घाटे को बराबर कर देता है और देश की अर्थव्यवस्था को संभाल लेता है। 

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आर्थिक सर्वे के आंकड़े क्या बता रहे हैं?

वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों और अप्रैल से दिसंबर 2025 तक भी, सर्विस सेक्टर में देश का एक्सपोर्ट करीब 304 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। आर्थिक मुनाफा करीब 151.7 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। यह सामानों की खरीद-बिक्री से होने वाले घाटे का करीब 61 फीसदी भरपाई कर रहा था। 

क्यों कामयाब है भारत भारत का सर्विस सेक्टर?

भारत IT, BPO, कंसल्टिंग और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से उबर रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों ने भारत का रुख किया है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की संख्या देश में तेजी से बढ़ी है। आर्थिक सर्वे के मुताबिक सर्विसेज एक्सपोर्ट्स कुल निर्यात में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं और कुल व्यापार घाटे को सीमित रख रहे हैं। भारत ने साल 2024-25 (FY25) में सामान और सेवाओं (सर्विसेज) को मिलाकर कुल 825.3 अरब डॉलर का रिकॉर्ड एक्सपोर्ट किया है, जिसमें हमारी आईटी और अन्य सेवाओं का बहुत बड़ा हाथ रहा।

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विदेश से होने वाली इस तगड़ी कमाई और बाहर रहने वाले भारतीयों की ओर से भेजे गए पैसों (रेमिटेंस) की बदौलत देश का 'करंट अकाउंट डेफिसिट'(CAD) काफी कम हो गया है। इसका मतलब है कि जब देश में आने वाली पैसे और यहां से बाहर जाने वाले कुल पैसों का अंतर काफी कम हो गया है। साल 2025-26 की पहली छमाही में यह नुकसान घटकर देश के सकल घरेलू आय (GDP) का सिर्फ 0.8 फीसदी रह गया है। बीते साल इसका स्तर 1.3 फीसदी पर था। 

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