बीमा लेना आपके परिवार को सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा फैसला है। अक्सर लोग टर्म इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस के बीच उलझ जाते हैं। असल में लाइफ इंश्योरेंस एक बड़ा बीमा है और टर्म इंश्योरेंस उसी का एक हिस्सा है। लाइफ इंश्योरेंस एक ऐसा समझौता है जिसमें कंपनी आपकी मृत्यु होने पर परिवार को पैसे देने का वादा करती है। टर्म इंश्योरेंस सिर्फ सुरक्षा देता है जबकि दूसरे लाइफ इंश्योरेंस प्लान सुरक्षा के साथ पैसा बचाने में भी मदद करते हैं।
टर्म इंश्योरेंस का काम सिर्फ सुरक्षा देना है। इसमें आप एक तय समय के लिए बीमा लेते हैं। अगर इस बीच आपकी मृत्यु हो जाती है तो आपके परिवार को पूरी बीमा राशि एक साथ मिल जाती है। अगर आप पॉलिसी खत्म होने तक जीवित रहते हैं तो आपको कोई पैसा वापस नहीं मिलता। यह प्लान कम पैसों में बहुत बड़ा बीमा कवर देता है। इसमें निवेश का कोई हिस्सा नहीं होता, इसीलिए यह बहुत सस्ता होता है। सरकार इसमें टैक्स की छूट भी देती है। प्रीमियम भरने पर आयकर की धारा 80सी और मिलने वाले पैसे पर धारा 10(10डी) का फायदा मिलता है। यह प्लान सिर्फ मृत्यु या किसी गंभीर बीमारी के समय काम आता है। यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जो बहुत कम खर्च में अपने परिवार को करोड़ों का कवर देना चाहते हैं।
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लाइफ इंश्योरेंस के दूसरे प्लान
लाइफ इंश्योरेंस में कई तरह के प्लान आते हैं जैसे एंडोमेंट, मनी-बैक, यूलिप और होल-लाइफ पॉलिसी। इन प्लान्स की खासियत यह है कि अगर आप तय समय तक जीवित रहते हैं, तो आपको पॉलिसी पूरी होने पर कुछ पैसे वापस मिलते हैं। इसमें सुरक्षा के साथ-साथ पैसा बचाने का विकल्प भी जुड़ा होता है। इसमें पॉलिसी लेने वाला, नॉमिनी, बीमा राशि, प्रीमियम, मैच्योरिटी और पॉलिसी छोड़ने पर मिलने वाला पैसा जैसे जरूरी हिस्से होते हैं। चूंकि कंपनी इसमें आपके पैसे का निवेश करती है, इसलिए इनका प्रीमियम टर्म इंश्योरेंस के मुकाबले काफी ज्यादा होता है। इन प्लान्स में आप एक निश्चित बचत कर सकते हैं जो भविष्य में एक साथ काम आ सकती है।
निवेश का असली गणित
प्रीमियम के मामले में दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर है। 30 साल के व्यक्ति के लिए 1 करोड़ रुपये के कवर वाला साधारण टर्म प्लान बहुत सस्ता पड़ता है। वहीं, अगर आप 'रिटर्न ऑफ प्रीमियम' वाला टर्म प्लान लेते हैं तो उसका प्रीमियम साधारण प्लान से करीब 125 प्रतिशत तक महंगा हो सकता है। एंडोमेंट और यूलिप प्लान्स का प्रीमियम और भी ज्यादा होता है क्योंकि इसमें बीमा और निवेश दोनों का खर्च जुड़ा होता है। विशेषज्ञों की साफ सलाह है कि बीमा और निवेश को कभी न मिलाएं। अगर आप सस्ता टर्म इंश्योरेंस लेकर सुरक्षा पक्की कर लें और बचे हुए पैसे को अलग से म्यूचुअल फंड में लगाएं तो आपको भविष्य में बहुत ज्यादा फायदा मिलेगा। निवेश और बीमा को अलग रखने से आपका पैसा बेहतर बढ़ता है और आप पर बीमा का खर्च भी कम रहता है।
सही बीमा कवर कैसे चुनें?
सही बीमा कवर चुनने का कोई एक नियम नहीं है, यह आपकी कमाई और खर्चों पर डिपेंड करता है। एक सीधा तरीका यह है कि आपको अपनी सालाना कमाई का 20 से 30 गुना कवर जरूर लेना चाहिए। बीमा राशि तय करते समय भविष्य की महंगाई को भी ध्यान में रखें। अगर आज के समय में आपका खर्च ज्यादा है तो भविष्य में वह महंगाई के कारण और बढ़ेगा, इसलिए आज ही बड़ा कवर लेना समझदारी है।
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अगर आपके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी है और आपने लोन ले रखा है तो टर्म इंश्योरेंस को ही सबसे पहली प्राथमिकता दें। बचत वाले प्लान तभी चुनें जब आप बाजार का जोखिम बिल्कुल न लेना चाहते हों या किसी खास लक्ष्य के लिए पैसे बचाना चाहते हों। बीमा का असली काम पैसा कमाना नहीं, बल्कि किसी मुश्किल समय में आपके परिवार को आर्थिक सहारा देना है।