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KPMG ने 10 फीसदी ऑडिट पार्टनर्स की कर दी छंटनी, वजह क्या रही?

केपीएमजी कंपनी के कर्मचारियों ने खुद से अर्ली रिटायरमेंट नहीं ली, जिसके बाद कंपनी ने 10 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की है।

KPMG company lays off

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Sora

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दुनिया की सबसे मशहूर टैक्स एडवाइजरी कंपनियों में से एक केपीएमजी (KPMG) कंपनी ने अहम घोषणा की है। इसके तहत अब कंपनी कर्मचारियों को नौकरियों से निकाल रही है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अब अमेरिका के ऑडिट और इश्योरेंस विभाग के 10 फीसदी लोगों को नौकरी से निकाल रही है। इसके तहत कंपनी के करीब 100 सीनियर पार्टनर्स को कंपनी छोड़नी पड़ेगी। 

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने पहले सीनियर पार्टनर्स से खुद से अर्ली रिटायरमेंट लेने की मांग की थी, लेकिन वे कर्मचारी समय से पहले रिटायरमेंट नहीं ले रहे थे, जिस वजह से उन्हें नौकरी से निकालने का फैसला लिया गया है। कंपनी ने यह घोषणा 22 अप्रैल के दिन सुनाई। इसके बाद उन सभी पार्टनर्स को बता दिया गया कि उन्हें नौकरी छोड़नी होगी। इस फैसले के बाद सवाल उठता है कि किन वजहों से यह फैसला लिया गया है। साथ ही यह भी सवाल है कि छंटनी के बाद कंपनी की आगे की प्लानिंग क्या है।

 

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छंटनी की वजह क्या है?

 

कंपनी ने सीनियर पार्टनर्स को उनके कम काम करने की वजह से नहीं निकाला है। इसके बजाय कंपनी का कहना है कि महामारी (Pandemic) के दौरान ज्यादा लोगों को नौकरियां दी गई थीं। अब कंपनी अपनी जरूरत के हिसाब से टीम को छोटा कर रही है, क्योंकि फिलहाल उसे ज्यादा वर्कफोर्स की जरूरत नहीं है।

 

कंपनी की आगे की प्लानिंग क्या है?

 

कंपनी के अधिकारियों ने बताया है कि वे अपने ऑडिट टीम में नए कर्मचारियों की भर्ती कर टीम को और मजबूत करना चाहते हैं, ताकि उनकी कंपनी कस्टमर्स को बेहतर से बेहतर सर्विस दे सके। इसके अलावा कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि यह छंटनी एक खास रणनीति का हिस्सा है, ताकि टीम के स्किल्स को बढ़ाया जा सके और AI जैसे टूल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके, जिससे बाजार की मांग के साथ तालमेल बैठाया जा सके।

 

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कंपनी छोड़ने वालों का क्या होगा?

 

कंपनी से निकाले गए पार्टनर्स को आर्थिक मदद दी जाएगी, साथ ही नई नौकरी तलाशने में भी मदद की जाएगी। इस फैसले से साफ होता है कि केपीएमजी के पास काम से ज्यादा कर्मचारी हो गए थे। पुराने पार्टनर्स के रिटायर न होने की वजह से नए कर्मचारियों के लिए जगह नहीं बन पा रही थी और खर्च भी बढ़ रहा था, इसलिए कंपनी ने यह फैसला लिया है।

 

 

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