logo

मूड

ट्रेंडिंग:

AI पर अरबों का दांव, क्या कंपनियों की कमाई भी उसी रफ्तार से बढ़ेगी?

'गोल्डमैन सैक्स' के एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया की 5 सबसे बड़ी AI कंपनियों का संयुक्त खर्च लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। 

Representative Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

दुनिया भर में आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस एक चर्चित और एक्सपेरिमेंटल विषय बन गया है। दिग्गजों के बीच AI की दौड़ इतनी तेज हो चुकी है कि बुनियादी ढांचे पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। 'गोल्डमैन सैक्स' के एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया की 5 सबसे बड़ी AI 'हाइपरस्केलर' कंपनियों का संयुक्त पूंजीगत व्यय (CapEx) 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

 

इस निवेश के बीच वॉल स्ट्रीट और निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। क्या AI से होने वाला मुनाफा इस भारी-भरकम खर्च की भरपाई उस रफ्तार से कर पाएगा?

 

यह भी पढ़ें: हफ्ते के पहले दिन शेयर बाजार सुस्त, सेंसेक्स-निफ्टी गिरा; सोना-चांदी कितने में?

AI पर इतना पैसा क्यों बह रहा है?

मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, गुगल और ऐमेजन जैसी कंपनियां सिर्फ भविष्य के वादों पर खर्च नहीं कर रही हैं बल्कि वे मौजूदा मांग और क्षमता के बीच के अंतर को भरने की कोशिश कर रही हैं। जैसे-जैसे कंपनियां और व्यक्तिगत उपभोक्ता AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, डेटा सेंटर्स, हाई-एंड AI सर्वर, एडवांस्ड चिप्स जैसे Nvidia H100/Blackwell और हाई-स्पीड नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग में विस्फोटक उछाल आया है।

 

यह खर्च केवल मौजूदा सेवाओं को चलाने के लिए नहीं है। इसका एक बड़ा हिस्सा 'फ्यूचर-प्रूफिंग' और नए AI मॉडल्स की ट्रेनिंग क्षमता बढ़ाने में जा रहा है। कंपनियों का मानना है कि अगर वे आज इंफ्रास्ट्रक्चर में पीछे रह गईं तो टेक जगत की अगली बड़ी क्रांति से हमेशा के लिए बाहर हो जाएंगी।

खर्च और कमाई का अंतर

AI पर हो रहे खर्च की तुलना जब कंपनियों की कमाई से की जाती है तो तस्वीर के दो पहलू सामने आते हैं। इसे दो बड़ी कंपनी के खर्च और कमाई के अंतर से समझते हैं। पहला उदाहरण हैं मेटा। Meta ने पिछले तीन सालों में अपने CapEx  में भारी बढ़ोतरी की है।  2022-23 में कंपनी का पूंजीगत खर्च करीब 28 से 30 बिलियन डॉलर के दायरे में था। वहीं अब यह बढ़कर 37 से 40+ बिलियन डॉलर सालाना तक पहुंच चुका है।

 

फायदा कहां दिख रहा है? Meta अपने AI निवेश का सीधा फायदा अपने प्रचार बिजनेस में देख रही है। AI-संचालित कंटेंट रेकमेंडेशन और ऐड-टार्गेटिंग के कारण रिल्स पर यूजर टाइम बढ़ा है और विज्ञापनों का कनवर्जन रेट सुधरा है। इससे कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन मजबूत रहे हैं। समस्या कहां है? Llama जैसे ओपन-सोर्स AI मॉडल्स और डायरेक्ट AI प्रॉडक्ट्स (Meta AI) से अभी बहुत बड़ा 'डायरेक्ट रेवेन्यू' जनरेट नहीं हो रहा है।

 

दूसरा Tesla, इसके मामले में बाजार AI जैसे Robotaxi और Optimus आदि और उसके पारंपरिक ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के आंकड़ों को अलग-अलग करके देख रहा है। टेस्ला का कार बिक्री से मिलने वाला ऑटोमोटिव ग्रॉस मार्जिन दबाव में रहा है, जबकि कंपनी AI सुपरकंप्यूटर (Dojo) और इंफ्रास्ट्रक्चर पर CapEx बढ़ा रही है। निवेशक यह समझ रहे हैं कि जब तक FSD और AI उत्पाद व्यावसायिक रूप से बड़े पैमाने पर लागू नहीं होते तब तक AI इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च कंपनी के फ्री कैश फ्लो पर दबाव बनाए रखेगा।

निवेशकों को किस बात का डर है?

निवेशकों के लिए परेशानी की बात केवल इतना पैसा खर्च होना नहीं है बल्कि रिटर्न ऑन इन्वेस्टेड कैपिटल का अनिश्चित होना है। क्लाउड और AI सर्वर जैसी संपत्तियों का अवमूल्यन तेजी से होता है। अगर 1.2 ट्रिलियन डॉलर के निवेश से अगले 3-5 सालों में ठोस अतिरिक्त रेवेन्यू नहीं आया तो कंपनियों का फ्री कैश फ्लो और मुनाफा बुरी तरह प्रभावित होगा।

 

विश्लेषकों का अनुमान है कि हाइपरस्केलर कंपनियों को अपने CapEx को भुनाने के लिए सैकड़ों अरब डॉलर के नए वार्षिक AI राजस्व की आवश्यकता होगी। फिलहाल यह केवल क्लाउड सर्विसेज जैसे Azure, AWS, Google Cloud आदि ही AI से ठोस रेवेन्यू दिखा पा रही हैं, जबकि सॉफ्टवेयर एक्सपेरिमेंट से सीधी कमाई अभी शुरुआती चरण में है।

 

यह भी पढ़ें: जब फर्जी खातों से IPO में हुआ था खेल, 2005 के एक घोटाले ने बदलवा डाले नियम

 

1.2 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े से यह समझना जरूरी है कि टेक कंपनियां केवल अपनी क्षमता का रखरखाव नहीं कर रहीं, बल्कि नई डिजिटल दुनिया का बुनियादी ढांचा तैयार कर रही हैं। हालांकि, अभी ऐसा लग सकता है कि अत्यधिक CapEx के कारण कंपनियों के फ्री कैश फ्लो पर असर पड़ रहा है। आने वाली तिमाहियों में बाजार यह बहुत बारीकी से देखेगा कि क्या AI सेवाओं से होने वाला अतिरिक्त राजस्व इन कंपनियों के ऑपरेटिंग खर्चों की भरपाई कर पाता है या यह केवल एक 'कैपेक्स बबल' साबित होता है।

Related Topic:#Business News

और पढ़ें