कारोबार की दुनिया में ग्राहक को अपने पास जोड़े रखना हर कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस चुनौती से निपटने के लिए कंपनियां रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक या मुफ्त चीजों का ऑफर देती हैं। देखने में यह ग्राहकों को मिलने वाला तोहफा लगता है लेकिन असल में यह कंपनियों की ओर से ग्राहक की 'आदत' बनाने का तरीका है। मैकडॉनल्ड्स, स्टारबक्स और टाटा न्यू जैसी बड़ी कंपनियां इसी तरीके से काम करती हैं।
बाजार में बढ़ते कॉम्पिटिशन के बीच ब्रांड्स ग्राहकों के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत करते हैं। ब्रांड्स सिर्फ सामान नहीं बेचते बल्कि ग्राहकों को अपने साथ हमेशा जोड़े रखने के लिए एक पूरा सिस्टम तैयार करते हैं। जब कोई ग्राहक बार-बार एक ही जगह से खरीदारी करता है तो कंपनियों के लिए नए ग्राहकों पर विज्ञापन का खर्च बच जाता है और पुराना मुनाफा सुरक्षित रहता है।
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1. कस्टमर बार-बार आता है
अगर किसी कंपनी के पॉइंट्स जमा होते हैं तो ग्राहक किसी दूसरी जगह जाने के बजाय उसी कंपनी से सामान खरीदता है। वह वहीं जाता है क्योंकि तभी उन पॉइंट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कंपनियों की बिक्री लगातार बढ़ती रहती है। 'सीएक्स डाइव' वेबसाइट पर छपी मैकडॉनल्ड्स की अप्रैल से जून 2025 तक की तिमाही (Q2 2025) की मीटिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस केम्पचिंस्की ने एक बात बताई।
उन्होंने कहा कि जो लोग लॉयल्टी प्रोग्राम का हिस्सा नहीं होते वे साल में औसतन 10.5 बार आते हैं लेकिन 'माई मैकडॉनल्ड्स रिवॉर्ड्स' प्रोग्राम जॉइन करने के बाद यह आना-जाना बढ़कर साल में 26 बार हो जाता है। 'हॉस्पिटैलिटी टेक्नोलॉजी' पर छपी स्टारबक्स की Q2 अर्निंग्स रिलीज की रिपोर्ट बताती है कि उनके रिवॉर्ड्स मेंबर्स अकेले अमेरिका में कंपनी की पूरी कमाई का 57 प्रतिशत हिस्सा लेकर आते हैं।
2. कस्टमर एक बार में ज्यादा शॉपिंग करता है
5,000 रुपये की शॉपिंग पर 500 बोनस पॉइंट्स जैसे ऑफर ग्राहकों को ज्यादा पैसे खर्च करने के लिए उकसाते हैं। भले ही उस समय उतने सामान की जरूरत न हो। इसे कंपनियां एवरेज ऑर्डर वैल्यू कहती हैं। 'जॉय डॉट एसओ' पर छपी 'स्टारबक्स लॉयल्टी प्रोग्राम: 2026 रिवॉर्ड्स ओवरहाल' रिपोर्ट के मुताबिक रिवॉर्ड्स मेंबर्स आम ग्राहकों के मुकाबले ढाई से तीन गुना ज्यादा पैसे खर्च करते हैं।
अमेरिका में उनके 3.55 करोड़ एक्टिव मेंबर्स हैं और इनसे कंपनी को हर साल 13 अरब डॉलर की कमाई होती है। लॉयल्टी प्रोग्राम सिर्फ छोटे-मोटे पॉइंट्स देने का जरिया नहीं है बल्कि यह करोड़ों रुपये कमाने का एक बहुत बड़ा बिजनेस मॉडल है, जहां लॉयल्टी मेंबर्स सामान्य ग्राहकों की तुलना में काफी बड़ी रकम खर्च करते हैं।
3. कस्टमर दूसरे प्रोडक्ट्स भी खरीदने लगता है
टाटा न्यू का न्यूकॉइन्स मॉडल इसकी सबसे अच्छा उदाहरण है। टाटा न्यू के आधिकारिक एफएक्यू पेज और न्यूपास प्रोग्राम की शर्तों के साथ-साथ 'बिहाइंड द फीचर' पर छपे 'हाउ टाटा न्यू बिल्ट द स्टीकिएस्ट लॉयल्टी ऐप' के मुताबिक, क्रोमा से इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने पर जो न्यूकॉइन्स मिलते हैं उनका इस्तेमाल बिगबास्केट पर राशन खरीदने, तनिष्क पर गहने खरीदने या एयर इंडिया की फ्लाइट बुक करने में भी किया जा सकता है एक बार खाते में न्यूकॉइन्स जमा हो जाते हैं तो किसी दूसरे ब्रांड पर जाना नुकसान का सौदा लगने लगता है। इसे 'महंगा स्विच करना' कहा जाता है।
4. कंपनी के पास कस्टमर का डेटा पहुंच जाता है
हर खरीद के साथ कंपनी के पास यह जानकारी पहुंच जाती है कि ग्राहक क्या और कब खरीद रहा है। 'लॉयल्टी एंड रिवॉर्ड कंपनी' पर मई 2026 में छपे लेख 'डू लॉयल्टी प्रोग्राम्स वर्क? जस्ट आस्क मैकडॉनल्ड्स' के मुताबिक, कंपनी के पास 21 करोड़ से ज्यादा एक्टिव लॉयल्टी यूजर्स हैं। मैकडॉनल्ड्स इस जानकारी का उपयोग करके ड्राइव-थ्रू, मोबाइल ऐप और डिलीवरी ऑर्डर की सभी जानकारियों को जोड़ता है और ग्राहकों को उनकी पसंद के मुताबिक ऑफर देता है।
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5. पुराने कस्टमर को रोकना सस्ता होता है
विज्ञापन के जरिए नया ग्राहक बनाना हमेशा महंगा पड़ता है। लॉयल्टी प्रोग्राम की वजह से पुराना ग्राहक खुद वापस आ जाता है जिससे नए ग्राहक को जोड़ने का खर्च कम हो जाता है। 'पेमेंट डॉट कॉम' पर फरवरी 2025 में छपे मैकडॉनल्ड्स सीज बूस्ट इन लॉयल्टी अमिद चैलेंजेस इन Q4 अर्निंग्स' के मुताबिक, मैकडॉनल्ड्स ने साल 2024 में लॉयल्टी मेंबर्स से 30 अरब डॉलर की कमाई की। यह पिछले साल से 30 प्रतिशत ज्यादा थी जबकि यूजर्स सिर्फ 15 प्रतिशत ही बढ़े थे। इसका मतलब है कि यह कमाई पुराने ग्राहकों के बार-बार आने और ज्यादा खर्च करने से बढ़ी है।