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8.1 लाख करोड़ खरीदारों के पास ही बकाया, MSME का भविष्य बचाएगा कौन?

देश के MSME सेक्टर का लगभग 8.1 लाख करोड़ रुपये का वर्किंग कैपिटल खरीदारों के पास विलंबित भुगतान के तौर पर फंसी है। ऐसे में यह कितनी बड़ी समस्या है, आइए समझते हैं।

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MSME। AI इमेज। Photo Credit: ChatGPT

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 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) अब भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रहे हैं। आर्थिक सर्वे 2025-26 में दावा किया गया है कि ये उद्यम देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का 35.4 प्रतिशत, निर्यात का करीब 48.58 प्रतिशत और कुल जीडीपी का 31.1 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। देशभर में 7.47 करोड़ से ज्यादा MSMEs हैं, जो 32.82 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। 

आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम उद्योग, अभी भी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या कर्ज का न मिलना है। कई छोटे उद्यमों के पास संपत्ति गिरवी रखने के लिए भी सही दस्तावेज नहीं होते। विश्व बैंक की रिपोर्ट भी कहती है कि 27 प्रतिशत MSME फाइनेंस को अपनी सबसे बड़ी समस्या मानते हैं। 

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सरकार क्या सुधार कर रही है? 

सरकार ने महिलाओं को उद्यम में बढ़ावा देने के लिए नई क्रेडिट सुविधाओं की पहल की है। उद्यम रजिस्ट्रेशन से महिलाओं को मदद मिल रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में MSME क्रेडिट की वृद्धि बड़ी कंपनियों से कहीं ज्यादा रही। सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दिए गए ऋण में अगस्त 2025 तक 20.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि बड़ी कंपनियों में सिर्फ 1.8 प्रतिशत की। ये आंकड़े बेहतर भविष्य की ओर इशारा तो कर रहे हैं लेकिन कई जोखिम भी हैं।  

सरकार ने क्रेडिट गारंटी स्कीम को अप्रैल 2023 से अपडेट किया। अब गारंटी कवर ₹10 करोड़ तक बढ़ा दी गई है। महिलाओं के उद्यमों के लिए गारंटी कवर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। SRI फंड के जरिए 15,442 करोड़ रुपये की इक्विटी सपोर्ट 682 MSME को दी जा चुकी है। 

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MSME की सबसे बड़ी मुश्किल क्या है?

कॉर्पोरेट एडवोकेट सौरभ शर्मा ने कहा, 'MSME की सबसे बड़ी परेशानी देरी से भुगतान का मिलना है। MSME का 8.1 लाख करोड़ रुपये का पैसा इस वजह से अटका हुआ है। इसे दूर करने के लिए ऑनलाइन डिस्प्यूट रिजोल्यूशन (ODR) पोर्टल शुरू किया गया है। यह आसान, सस्ता और डिजिटल तरीका है, जिसमें बातचीत, समझौता और आखिर में फैसला तीनों स्तर पर हो सकता है। इससे बिना रिश्ता खराब किए पैसे वसूले जा सकते हैं।'

क्या MSME को बचा सकेगा ORD?

MSME देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये लाखों लोगों को रोजगार देते हैं, लेकिन इनकी सबसे बड़ी समस्या है देरी से भुगतान। अभी MSME क्षेत्र में करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये का भुगतान अटका पड़ा है, जिससे इनकी नकदी बुरी तरह प्रभावित हो रही है और कारोबार बढ़ने में रुकावट आ रही है। 

आर्थिक सर्वे ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब कोई MSME अपना बकाया वसूलने के लिए कानूनी शिकायत करता है तो अक्सर खरीदार नाराज हो जाता है। नतीजा यह होता है कि आगे से ऑर्डर बंद कर दिया जाता है। लंबे समय के रिश्ते टूटने का डर MSME को कोर्ट जाने से रोकता है। अब सरकार ऐसी मुश्किलों से बचने के लिए ऑनलाइन डिस्प्यूट रेजोल्यूशन (ODR) लेकर आई है। 

यह भी पढ़ें: 26 करोड़ लोगों को रोजगार, GDP में तगड़ा शेयर, MSME की पूरी कहानी

कैसे सुलझाए जाते हैं विवाद?

एडवोकेट सौरभ शर्मा ने कहा कि MSME ODR पोर्टल के जरिए अब विवाद आसानी और कम खर्चीले तरीके से सुलझाया जा रहा है। शिकायत के बाद दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया जाता है, अगर बात नहीं बनती है तो सुलह और मध्यस्थता कराई जाती है। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन है और 24 घंटे के लिए उपलब्ध है। यह सुविधा कई भाषाओं में है। 

 

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि MSME अपना पैसा वसूल कर सकता है बिना खरीदार के साथ रिश्ता खराब किए। पारंपरिक कोर्ट की तुलना में यह बहुत सस्ता और तेज है, यहां तक कि छोटी-छोटी रकम के लिए भी इसकी ओर रुख लोग कर सकते हैं ।

MSME का भविष्य क्या है?

बीते दो साल में स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (SME) IPO में भारी बढ़ोतरी हुई है। 2024-25 में SME IPO की संख्या 87 प्रतिशत बढ़ी। UPI से आसानी से आवेदन करने की सुविधा और अच्छे लिस्टिंग गेन ने रिटेल निवेशकों को आकर्षित किया है। अब इसका दायरा बढ़ रहा है और रक्षा क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाने की योजना सरकार तैयार कर रही है। 


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