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भारत ने रूस-ईरान से तेल खरीदा तो पड़ेगी टैरिफ की मार, अमेरिका ने अब क्या किया?

अमेरिका ने ईरान संकट की वजह से रूस के तेल से प्रतिबंध हटाया था। अब अमेरिका ने कहा है कि तेल खरीदने की समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI

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अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एलान किया है कि अमेरिका, रूसी तेल खरीदने के लिए भारत को दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन, अब रूस और ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंधों से छूट को खत्म कर रहे हैं। भारत को रूस और ईरान के तेल से प्रतिबंध हटने की वजह से बड़ी राहत मिली थी लेकिन एक बार फिर अमेरिका ने भारत पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका में रिपब्लिकन इस फैसले की आलोचना कर रहे थे। उनका कहना था कि रूस और ईरान, दोनों देशों को इससे फायदा पहुंच रहा है।  

मार्च 2025 को अमेरिका ने भारत को 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी, जिसेस भारतीय रिफाइनरी पहले से टैंकरों पर लदे रूसी तेल को खरीद सकें। इस छूट का मकसद था कि वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बनी रहे। तेल की कीमतें ज्यादा न बढ़ने पाएं। तब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर थीं।

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स्कॉट बेसेंट,ट्रेजरी सेक्रेटरी, अमेरिका:-
हम रूस और ईरान के तेल के जनरल लाइसेंस को रिन्यू नहीं करेंगे। 11 मार्च से पहले जो तेल, समुद्र में था, वह इस्तेमाल हो चुका है। 

भारत के लिए राहत क्यों थी?

भारत ने इस छूट के बाद रूस से करीब 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए थे। रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरी पहले रूसी कंपनियों से तेल खरीदना बंद कर चुकी थीं, लेकिन छूट मिलने पर फिर से खरीद शुरू हुई। कई अमेरिकी सीनेटरों और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस छूट की कड़ी आलोचना की। 

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क्यों अमेरिका ने फिर लगाए प्रतिबंध?

अमेरिकी नेताओं का कहना था कि इससे रूस को रोजाना 150 अरब डॉलर अतिरिक्त फायदा हो रहा है, जो वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल कर रहा है। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और चक शूमर समेत कई सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन से मांग की कि यह छूट तुरंत बंद की जाए।

अमेरिका ने ठुकराई मांग

अब अमेरिका ने फैसला किया है कि प्रतिबंध दोबारा लागू किए जाएंगे। रूस से तेल खरीदने की समय सीमा 11 अप्रैल तक थी, ईरान से तेल खरीदने की समयसीमा 19 अप्रैल तक थी। एक खत्म हो गई है, एक 3 दिन बाद खत्म हो जाएगी। भारत समेत कई एशियाई देशों ने छूट बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन अमेरिका ने इसे ठुकरा दिया है।


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