देशभर में पहले जहां चीनी के दाम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे थे, वहीं अब प्याज की बढ़ती कीमतों ने भी आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। अगस्त में खुदरा बाजारों में प्याज के दाम अचानक बढ़े हैं और इसकी अधिकतम कीमत 77 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। प्याज के दामों में आई इस तेजी से लोगों की चिंता बढ़ गई है कि आने वाले त्योहारी सीजन यानी दिवाली तक कहीं इसकी कीमतें और न बढ़ जाएं।
महंगाई के अचानक बढ़ने के बाद हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक से कांदा एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इन ट्रेनों के जरिए लोगों तक रियायती दरों पर प्याज की सप्लाई तेजी से पहुंचाई जाएगी। बता दें कि पिछले साल भी सरकार ने प्याज की सप्लाई के लिए कांदा एक्सप्रेस चलाई थी।
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एक महीने में कैसे बढ़े प्याज के दाम?
सरकारी वेबसाइट fcainfoweb.nic.in के आंकड़ों के मुताबिक, 4 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव 35.55 रुपये प्रति किलो था। 11 अगस्त को इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई और कीमत 35.99 रुपये हो गई। इसके बाद 18 अगस्त को प्याज का औसत भाव 37.61 रुपये और 25 अगस्त को बढ़कर 44.72 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। यानी सिर्फ 18 से 25 अगस्त के बीच प्याज की औसत कीमत में 7.11 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान प्याज का अधिकतम खुदरा भाव भी 70 रुपये से बढ़कर 77 रुपये प्रति किलो हो गया।

पिछले तीन साल में अगस्त से दिवाली सीजन का खुदरा ट्रेंड
- सरकारी डेटा के अनुसार 2023 में अगस्त में प्याज का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 29.86 रुपये प्रति किलो था। सितंबर में यह 33.38 रुपये, अक्टूबर में 37.26 रुपये और नवंबर में 58.99 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। यानी दिवाली वाले महीने में कीमत अगस्त के मुकाबले काफी ऊपर थी।
- 2024 में अगस्त के दौरान प्याज का औसत भाव 45.03 रुपये प्रति किलो था। सितंबर में यह बढ़कर 51.17 रुपये और अक्टूबर में 54.32 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। यानी दिवाली तक प्याज लगातार महंगा होता गया।
- 2025 में कहानी बिल्कुल अलग रही। अगस्त में प्याज का औसत भाव 28.24 रुपये प्रति किलो था, जो सितंबर में घटकर 27.50 रुपये और अक्टूबर में 26.54 रुपये प्रति किलो रह गया। यानी 2025 में अगस्त से दिवाली तक प्याज के दाम बढ़ने के बजाय लगातार कम हुए।
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इसकी एक बड़ी वजह सरकार की सप्लाई को बेहतर करने की पहल थी। सरकार ने कांदा एक्सप्रेस के जरिए प्याज को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया। 2024-25 में इसके तहत 5 शहरों में 14 रेक के जरिए करीब 12,000 टन प्याज भेजा गया। इससे बाजार में प्याज की सप्लाई बनी रही और कीमतों पर दबाव कम हुआ। इस साल भी सरकार ने प्याज की सप्लाई बेहतर रखने के लिए कांदा एक्सप्रेस पहल को अपनाया है। इससे सरकार को उम्मीद है कि दिवाली तक त्योहारी सीजन में प्याज के दाम काबू में रहेंगे और लोगों की जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा।
इस वक्त क्यों बढ़ने लगते हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतें अगस्त-सितंबर में अक्सर इसलिए बढ़ती हैं, क्योंकि इस दौरान बाजार में प्याज की सप्लाई कम हो जाती है। पुरानी रबी फसल का स्टॉक घटने लगता है, जबकि नई खरीफ फसल की आवक अभी पूरी तरह शुरू नहीं होती। इस साल भी दक्षिण भारत से खरीफ प्याज को आने में देरी हुई है। वहीं, महाराष्ट्र में मानसून की वजह से प्याज की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे सप्लाई पर और दबाव बढ़ गया है। कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने अपने 1.21 लाख टन के बफर स्टॉक में से प्याज बाजार में उतारने का फैसला किया है। साथ ही कांदा एक्सप्रेस के जरिए भी प्याज की सप्लाई बढ़ाई जा रही है।