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54 में से 41 वस्तुओं के दाम बढ़े, GST में मिली छूट भी काम नहीं आई

ईरान जंग ने दुनियाभर में महंगाई बढ़ा दी है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। सरकारी निगरानी सूची में शामिल 54 में से 41 वस्तुओं के दामों में इजाफा हो चुका है। आगे और भी दाम बढ़ने की आशंका है।

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प्रतीकात्मक फोटो। (AI-generated image)

केंद्र सरकार ने पिछले साल 22 सितंबर को वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी में कटौती की थी। सरकार ने 12% और 28% के स्लैब को हटा दिया था। इसकी जगह 5% और 18% की दो मुख्य स्लैब रखी। लग्जरी और तंबाकूयुक्त पदार्थों को 40 फीसद वाले स्लैब में रखा। नतीजा यह हुआ कि कार से खाने-पीने वाले सामान के दामों में गिरावट आई। मगर यह अधिक दिनों तक नहीं चला।

 

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग की शुरुआत हुई। तेल निर्यात पर इसका असर पड़ा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से गैस और तेल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। नतीजा मंहगाई के रूप में सामने आया।

 

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दैनिक भास्कर ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि 90 दिन में सरकार की निगरानी सूची में शामिल 80 फीसद वस्तुओं के दाम 21 सितंबर 2025 की तुलना में अधिक बढ़ चुके हैं। मतलब जीएसटी स्लैब से आए सस्ते दिन युद्ध के कारण महंगे दिनों में तब्दील हो गए।  

किस-किस चीज के बढ़े दाम?

  • अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जीएसटी में बदलाव से पहले कंडेंस्क मिल्क (अमूल मिठाई, 100ग्राम) 40 रुपये का था। अब इसकी कीमत 42 रुपये हो चुकी है। जीएसटी में कटौती के बाद कीमत 37.6 रुपये हो गई थी। चीज (क्रॉफ्ट ओरिजनल, 1 किलो) का दाम अभी 650 रुपये है। जीएसटी संसोधन से पहले 630 रुपये कीमत थी। जीएसटी घटाने के बाद इसका मूल्य 604.8 रुपये हो गया था।   

 

  • 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने वाले दिन एक किलो अमूल घी का मूल्य 645 रुपये था। अब यह 665 रुपये हो गया है। 21 सितंबर 2025 को यह कीमत 650 रुपये थी। जीएसटी घटने पर कीमत 611 रुपये हो गई थी।

 

  • 800 ग्राम पारले बिस्किट युद्ध के बाद से 6 रुपये मंहगा हो गया है। 28 फरवरी को कीमत 89 रुपये थी और अब बढ़कर 95 रुपये हो गई है। जीएसटी में परिवर्तन से पहले इसकी कीमत 100 रुपये थी। संसोधन के बाद 94 रुपये हुई।

 

  • 50 किलो सीमेंट की बोरी की कीमत 410 रुपये हो चुकी है। 28 फरवरी का इसका मूल्य 365 रुपये था। जीएसटी में कटौती से पहले 380 रुपये में एक बोरी मिलती थी। संसोधन के बाद कीमत घटकर 349.6 रुपये हो गई थी।

 

  • 28 फरवरी को 190 रुपये में मिलने वाला टैल्कम पाउडर (डेवर, 300 ग्राम) अब 210 रुपये में मिल रहा है। पहले 100 एमएल हेयर ऑयल 68 रुपये का मिलता था। अब यह 73 रुपये में मिल रहा है। जीएसटी संसोधन के बाद इसकी कीमत 60.52 रुपये हो गई थी।

 

  • 28 फरवरी को एक किलो बादाम की कीमत 800 रुपये थी। महज 90 दिन में कीमत बढ़कर 900 रुपये हो गई। जीएसटी संसोधन के बाद एक लीटर पानी की बोतल की कीमत 14 रुपये हो गई थी। 28 फरवरी को कीमत 15 रुपये थी और यह बोतल 20 रुपये में मिल रही है। 175 एमएल शैंपू अब 124 रुपये में मिल रहा है। युद्ध शुरू होने वाले दिन इसकी कीमत 115 रुपये थी। 

 

  • जिलेट की 70 ग्राम की सेविंग क्रीम 88 रुपये की हो गई। जंग शुरू होने से पहले यह 80 रुपये में मिल जाती थी। डाइकिन की डेढ़ टन की एसी 28 फरवरी को 34490 रुपये की थी। अब इसकी कीमत 39765 हो गई है।

क्यों बढ़ रही महंगाई?

अखबार ने बताया कि नेफ्था के दामों में 70 फीसद तक इजाफा होने से भी मंहगाई बढ़ी है। नेफ्था पेट्रोलियम प्रोडक्ट से ही तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल वाशिंग मशीन समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट, प्लास्टिक उत्पाद व पैकेजिंग में किया जाता है। इसके अलावा धातु पैकेजिंग, पेपर बोर्ड, पैकेजिंग फिल्म, कार्डबोर्ड और रेजिन के दाम बढ़ने से भी महंगाई बढ़ी है। 


रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 54 में से 26 वस्तुओं के दाम बढ़ने के पीछे नेफ्था वजह है। 28 फरवरी को नेफ्था के दाम 620 डॉलर प्रति टन था। अब यही 1300 डॉलर प्रति टन पर बिक रहा है। वहीं तांबा की बढ़ती कीमत का असर एसी, मोटर और वायरिंग पर पड़ है। इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने वाला कंट्रोल बोर्ड, चिप और अन्य सेंसर को बाहर से मंगवाया जाता है। परिवहन लागत बढ़ने और रुपये में गिरावट से इनकी लागत बढ़ चुकी है।

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