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एक तरफ स्मार्ट बैंकिंग, दूसरी तरफ स्मार्ट ठगी, क्या AI के दौर में सुरक्षित पैसा?

डिजिटल बैंकिंग में AI का खतरा बढ़ गया है जहां ठग आवाज क्लोन करके लोगों को फंसा रहे हैं। अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए अब पहले से ज्यादा सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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आज के समय में बैंकिंग बहुत आसान हो गई है लेकिन इसी तकनीक का फायदा उठाकर अपराधी अब बहुत चालाकी से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके भी अब अपराधी बहुत चलाकी से लोगों को लूट रहे हैं और हमारी मेहनत की कमाई को खतरे में डाल रहे हैं। भारतीय बैंक अब इस खतरे को लेकर बहुत ज्यादा परेशान हैं और लगातार लोगों को सावधान कर रहे हैं। बैंकों का कहना है कि जिस तेजी से तकनीक बदल रही है उसी तेजी से ठगी के नए और खतरनाक तरीके भी सामने आ रहे हैं जिससे आम लोगों का पैसा असुरक्षित हो गया है।  

 

बायोकैच ने बैंकों को लेकर एक बड़ा सर्वे किया है जिसमें बहुत डराने वाली बातें सामने आई हैं। सर्वे के मुताबिक, 90 प्रतिशत भारतीय बैंकों के बड़े अधिकारियों ने माना है कि उनके यहां धोखाधड़ी की कोशिशें बहुत तेजी से बढ़ गई हैं। अगर दुनिया के दूसरे देशों की बात करें तो वहां यह आंकड़ा 81 प्रतिशत है यानी भारत में यह स्थिति उससे भी ज्यादा गंभीर है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि 84 प्रतिशत बैंकिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में 'AI एजेंट्स' सबसे बड़ा खतरा होंगे। इसके अलावा, 93 प्रतिशत अधिकारियों का यह भी मानना है कि AI की वजह से ठगों को पकड़ना अब बहुत मुश्किल हो गया है।  

 

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कैसे काम कर रहें है आज के ठगी?

अब ठग पुराने तरीकों के अलावा 'वॉयस क्लोनिंग' का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तकनीक में ठग आपकी आवाज की कुछ सेकंड की रिकॉर्डिंग चुराकर, बिल्कुल आपकी जैसी आवाज बना लेते हैं। फिर वे आपके घर वालों या बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं और पैसे मांगते हैं। यह आवाज इतनी असली लगती है कि सामने वाला इंसान आसानी से धोखा खा जाता है।  

 

भारत में हम सब यूपीआई का बहुत इस्तेमाल करते हैं, और अब यही ठगों का सबसे बड़ा निशाना बन गया है। सर्वे में शामिल 95 प्रतिशत बैंकिंग अधिकारियों का कहना है कि ठगी इतनी तेजी से हो रही है कि उसे फौरन रोकना एक बहुत बड़ी चुनौती है। करीब 66 प्रतिशत अधिकारियों का मानना है कि यूपीआई के जरिये होने वाली धोखाधड़ी फिलहाल उनके लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।  

बैंकों को हो रहा भारी नुकसान

यह सिर्फ ग्राहकों का नुकसान नहीं है बल्कि बैंकों को भी इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। करीब आधे बैंकों ने बताया है कि धोखाधड़ी के चक्कर में उन्हें हर साल 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 83 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। बैंक अपनी सुरक्षा और जांच के तरीकों को बेहतर करने में लगे हैं लेकिन ठग हर बार कोई न कोई नया तरीका ढूंढ निकालते हैं जिससे बैंक हमेशा मुश्किल में रहते हैं।  

 

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ठगी से कैसे बचें?

इस डिजिटल जमाने में सिर्फ बैंक की सुरक्षा के भरोसे न बैठें बल्कि खुद भी सावधानी बरतें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अपना ओटीपी किसी को कभी न बताएं। अगर कोई अनजान नंबर से फोन करके पैसे मांगे तो पहले बैंक के असली नंबर पर फोन करके सच पता करें। आप अपने परिवार के साथ एक 'फैमिली कोड' तय कर लें जिससे अगर कोई आपकी आवाज निकालकर फोन करे तो घर वाले उसे तुरंत पकड़ लें। अगर आपके साथ कभी ऐसी ठगी हो जाए तो फौरन साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर फोन करें या उनकी वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।  

 


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