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कॉन्सर्ट, भजन और क्लबिंग, बदल रही है भारत के मनोरंजन की दुनिया

भारत में लाइव इवेंट्स और भजन क्लबिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जहां Gen-z अब चीजों के बजाय यादगार पलों और अपने पसंदीदा अनुभवों पर पैसा खर्च करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

आजकल हमारे देश में मनोरंजन के तरीके पूरी तरह बदल गए हैं। पहले हम लोग कॉन्सर्ट या इवेंट्स को सिर्फ मजे करने की एक जगह मानते थे लेकिन अब यह एक बड़ा कारोबार बन चुका है। 'बुक माय शो' की 'इवेंट्स इंडस्ट्री रिपोर्ट' के मुताबिक, भारत में लाइव इवेंट्स का मार्केट अभी 13,000 करोड़ रुपये का है जिसके 2028 तक 19,600 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। आज का युवा घर पर बैठकर स्क्रीन देखने के बजाय बाहर जाकर उन पलों को जीना चाहता है। अब लोग अपने पसंदीदा म्यूजिक शो या किसी खास इवेंट के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाने में भी बिल्कुल नहीं हिचकिचाते। सबसे मजेदार बात यह है कि अब इसमें सिर्फ बड़े पॉप कॉन्सर्ट ही नहीं, बल्कि 'भजन क्लबिंग' जैसे अनोखे अनुभव भी शामिल हो गए हैं।

 

आजकल के युवाओं के लिए चीजें खरीदने से ज्यादा जरूरी है अच्छी यादें बनाना। लोग ऐसी जगह पैसा खर्च करना चाहते हैं जो उनके शौक और उनकी पहचान से जुड़ी हो। आज के युवा बड़े म्यूजिक शो और अलग-अलग तरह के एडवेंचर इवेंट्स में जाने को अपना निवेश मानते हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक टिकट नहीं है बल्कि जीवन भर साथ रहने वाली एक यादगार खुशी है।

 

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युवाओं की बदली सोच

आजकल के युवा करियर की पुरानी सोच से अलग अपने मनपसंद कामों को बहुत ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। 'अंडर25' के डेटा के हिसाब से, आज की पीढ़ी सफलता को सिर्फ पैसे के नजरिए से नहीं देखती। वे नई चीजें सीखने और काम में खुशी ढूंढने में भरोसा रखते हैं। लॉकडाउन के बाद से युवा अब ज्यादा बाहर निकल रहे हैं और ऐसे ग्रुप्स में जाना पसंद कर रहे हैं जहां उनके जैसे शौक वाले लोग मिलते हैं। इसीलिए ऐसे इवेंट्स में आजकल पहले से कहीं ज्यादा भीड़ नजर आ रही है।

 

कंपनियां अब सिर्फ अपना नाम दिखाकर विज्ञापन नहीं कर रही हैं। वे अब ऐसे बड़े इवेंट्स में पैसा लगा रही हैं जहां उन्हें युवाओं का पूरा ध्यान मिलता है। इंटरनेट पर तो लोग विज्ञापन को स्किप कर देते हैं लेकिन कॉलेज फेस्टिवल या बड़े लाइव इवेंट्स में उन्हें लोगों के साथ सीधे जुड़ने का मौका मिलता है। वहां उन्हें युवाओं का पूरा फोकस मिलता है।

 

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भजन क्लबिंग का नया ट्रेंड

आजकल कीर्तन, मंत्रों के कॉन्सर्ट और भक्ति सभाएं युवाओं को बहुत पसंद आ रही हैं। यूके के कलाकार राधिका दास का कहना है कि इंटरनेट से जुड़े होने के बावजूद आज के युवा अकेलापन महसूस करते हैं। वे भजन में शांति और मानसिक सुकून ढूंढ रहे हैं। ये प्रोग्राम अब सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं हैं।

 

अब ये इवेंट्स बड़े शहरों के नाइट क्लबों, आलीशान होटलों, योग सेंटर्स और ओपन-एयर में भी आयोजित किए जा रहे हैं। युवा बिना किसी नशे के सिर्फ मंत्रों और संगीत के साथ जुड़कर खुशी महसूस कर रहे हैं। यह ट्रेंड अब भारत के साथ-साथ लंदन, बर्लिन, दुबई, न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स जैसे बड़े विदेशी शहरों में भी खूब फैल रहा है।

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