logo

ट्रेंडिंग:

1.6 लाख करोड़ का निवेश, अब तक कहां पहुंचा भारत का सेमीकंडक्टर मिशन?

साल 2021 में भारत में सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत की गई थी और इस मिशन का 2.0 शुरू हो रहा है। क्या आप जानते हैं कि इतने साल में इस क्षेत्र में क्या काम हुआ है?

chip designing people

चिप डिजाइनिंग करते लोगों की प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

डिजिटल दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक कार, कंप्यूटर और नए जमाने के अन्य गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर के मामले में खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भाकत ने यह मिशन साल 2021 में शुरू किया था। 5 साल में अरबों रुपये खर्च किए जा चुके हैं ताकि इस क्षेत्र में भारत अगुवा बन सके। पिछले साल 15 अगस्त के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2026 तक भारत में 80 अरब डॉलर के सेमीकंडक्टर की खपत होने लगेगी और 2030 तक यह आंकड़ा 110 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। भारत 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है और कई कंपनियां अपना काम शुरू भी कर चुकी हैं।

 

साल 2026-27 के बजट में भी 40 हजार करोड़ रुपये अलग से सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए रखे गए हैं। इससे पहले अगस्त 2025 तक ही लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ देश में कुल 10 सेमीकंडक्टर प्लांट और यूनिट को मंजूरी दी जा चुकी है। आइए जानते हैं कि सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में पिछले 5 साल में भारत कितना आगे बढ़ा है।

 

यह भी पढ़ें: 600+ स्टार्टअप, 500+ सेशन, AI समिट में क्या-क्या होने वाला है?

संसद में क्या पूछा गया?

 

हाल ही में खत्म हुए बजट सत्र में सेमीकंडक्टर मिशन को लेकर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने एक सवाल पूछा था। उनके सवाल थे कि अभी तक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कुल कितना घरेलू और विदेशी निवेश हुआ है? उनका दूसरा सवाल था कि अगर प्रोजक्ट वाइज डीटेल है तो वह दी जाए। 

 

 

इसी सवाल के जवाब में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी मिनिस्ट्री में राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने संसद में लिखित जवाब दिया है। उन्होंने कुल 6 योजनाओं का जिक्र किया है जो इसी सेमीकंडक्टर मिशन से जुड़ी हुई हैं। 

ये योजनाएं हैं:-

  1. सेमीकॉन इंडिया स्कीम
  2. PLI स्कीम फॉर IT हार्डवेयर एंड लार्ज स्केल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
  3. इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चिंग स्कीम (ECMS)
  4. स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स एंड सेमीकंडक्टर्स (SPECS)
  5. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स स्कीम (EMC)
  6. मोडिफाइड स्पेशल इंसेंटिव पैकेज स्कीम (M-SIPS)

 

इसमें से 76 हजार करोड़ रुपये की लागत के साथ सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम शुरू किया गया है ताकि भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चिंग ईकोसिस्टम तैयार किया जा सके। इसी के तहत कुल 10 प्रोजेक्ट को सरकार ने मंजूरी दी है जिनकी कुल लागत 1.6 लाख करोड़ रुपये है। 

 

यह भी पढ़ें: पहले प्लांट से विक्रम चिप तक; कैसी रही भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा?

 

india semiconductor mission

 

इन 10 में से दो 8 पैकेजिंग यूनिट हैं और दो फैब्रिकेशन यूनिट हैं। इसमें सिलिकिन फैब्रिकेशन, सिलिकन कार्बाइड फैब्रिकेशन, अडवांस्ड पैकेजिंग और मेमोरी पैकेजिंग यूनिट आदि शामिल हैं। सरकार ने बताया है कि इसमें से कुछ यूनिट अभी लगाई जानी हैं और 4 यूनिट में उत्पादन शुरू कर दिया गया है।

कितनी कंपनियों को मिली मदद?

 

सरकार ने अपने जवाब में बताया है कि स्टार्टअप मिशन के जरिए कुल 24 चिप डिजाइन प्रोजेक्ट को मदद दी गई है।  16 यूनिट ने टेपआउट स्टेज पार कर लिया है और 13 प्रोजेक्ट को वेंचर कैपिटलिस्ट से फंडिंग मिली है। साथ ही साथ, 350 विश्वविद्यालयों में EDA टूल्स दिए गए हैं जिनका इस्तेमाल 65 हजार इंजीनियर्स ने किया है।

 

यह भी पढ़ें: सेमीकंडक्टर पर दुनिया की निगाहें, क्यों कहा जा रहा 'डिजिटल डायमंड'?

 

सरकार का कहना है कि चिप डिजाइन के मामले में भारत मजबूत है और यही उसकी क्षमता भी है। भारत में डिजाइन टैलेंट भरपूर है और दुनियाभर में जितने सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर हैं, उनमें से 20 पर्सेंट भारतीय मूल के हैं। 

कंपनियों की स्थिति क्या है?

 

माइक्रॉन टेक्नॉलजी गुजरात में 22,516 करोड़ रुपये की लागत से सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चिंग यूनिट लगा रही है। इस यूनिट में DRAM और NAND प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चिंग और असेंबलिंग की जाएगी। इस यूनिट की क्षमता हर हफ्ते 1.4 करोड़ यूनिट सेमीकंडक्टर बनाने की होगी।

 

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (TEPL) 91,526 करोड़ की मदद से गुजरात में एक यूनिट लगा रही है। यह यूनिट ताइवान की PSMC की पार्टनरशिप में लग रही है। इस कंपनी में हर महीने 50 हजार वेफर बनाए जाएंगे।

 

यह भी पढ़ें: डिजिटल दुनिया का 'पेट्रोल' क्यों है सेमीकंडक्टर? भारत कितना मजबूत

 

TEPL ही 27,120 करोड़ की लागत से असम में एक प्लांट लगा रही है जो घरेलू और विदेशी मांग पूरी करेगी। इस प्लांट में हर दिन 4.8 करोड़ यूनिट का उत्पादन किया जा सकेगा। CG पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्युशन लिमिटेड का एक प्लांट गुजरात में लग रहा है जिसकी लागत 7584 करोड़ रुपये है। यह यूनिट थाईलैंड की STARS माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक और अमेरिका की रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स का ज्वाइंट वेंचर है। यह कंपनी हर दिन 1.5 करोड़ यूनिट का उत्पादन कर सकेगी। 

 

india semiconductor mission status

 

काएन्स टेक्नॉलजी इंडिया लिमिटेड (KTIL) 3307 करोड़ की लागत से गुजरात में एक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा रही है। इस यूनिट में 64 लाख चिप हर दिन बनाई जा सकेंगी।

HCL-Foxconn मिलकर 3706 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर प्रदेश में एक प्लांट लगा रहे हैं। इस प्लांट में गोल्ड बंप टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करके डिस्प्ले ड्राइवर IC यानी DCIC बनाई जाएंगी। इसके लिए ताइवान की Hon Hai कंपनी टेक्नॉलजी देगी। इस कंपनी ने 20 हजार वेफर हर महीने या 3.6 करोड़ चिप हर महीने बनाई जा सकेंगी।

 

इसी तरह 3D ग्लास सॉल्युशन्स नाम की एक कंपनी ओडिशा में 1943 करोड़ रुपये का निवेश करके एक प्लांट लगा रही है। SiSCem की ओर से ओडिशा में 2066 करोड़, कॉन्टिनेंटल डिवाइस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (CDIL) की ओर से पंजाब में 117 करोड़ का और ASIP की ओर से आंध्र प्रदेश में 480 करोड़ का निवेश किया जा रहा है।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap