आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज के समय दुनियाभर में सबसे चर्चित टॉपिक बन चुका है। हर देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में दूसरे से आगे निकलना चाह रहा है क्योंकि इसे भविष्य की तकनीक कहा जा रहा है। भारत में 16 परवरी से 19 फरवरी तक एआई का सबसे बड़ा सम्मेलन हो रहा है, जिसमें दुनिया के तमाम दिग्गज पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही युवाओं में भी एआई में करियर बनाने की इच्छा हो रही है। भारत में कई कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में एआई से जुड़े कोर्स करवाए जा रहे हैं लेकिन इससे जुड़ी कोई यूनिवर्सिटी नहीं बनी थी। अब आंध्र प्रदेश में देश की पहली एआई यूनिवर्सिटी खुलने जा रही है।
आंध्र प्रदेश के अमरावती में देश की पहली एआई यूनिवर्सिटी बनने जा रही है। इस हाईटेक यूनिवर्सिटी की आधारशिला 19 फरवरी को रखी जाएगी, जिसमें माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स केसाथ-साथ कई दिग्गजों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि दुनिया की टॉप चिप मेकर कंपनी एनवीडिया इस प्रोजेक्ट में पार्टनर के तौर पर जुड़ चुकी है और कंपनी यहां के सिलेबस से लेकर कोर्स किट तक तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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8वीं क्लास से होगी एडमिशन
यह यूनिवर्सिटी भारत के अन्य सभी संस्थानों से बिल्कुल अलग होगी। यहां एडमिशन के लिए छात्रों को 12वीं पास कर ग्रेजुएशन का इंतजार नहीं करना होगा। इस यूनिवर्सिटी में 8वीं क्लास से ही एडमिशन शुरू हो जाएगी। यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए ऐसे बच्चों को चुना जाएगा जिनमें एआई को लेकर समझ और इंट्रेस्ट हो। हालांकि, एडमिशन और कोर्स को लेकर विस्तार से जानकारी अभी शेयर नहीं की गई है। 8वीं के बाद इन स्टूडेंट्स को सीधे पीएचडी तक की पढ़ाई कराई जाएगी और सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। अन्य संस्थानों की तरह यहां किताबों पर नहीं बल्कि हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस पर ज्यादा ध्यान रहेगा।
कब से शुरू होंगी एडमिशन?
आंध्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी सचिव भास्कर कटमनेनी के मुताबिक इस यूनिवर्सिटी में 2028 या 2029 से एडमिशन शुरू हो जाएंगी। इस यूनिवर्सिटी में देश का पहला स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल तैयार होगा, जो चैटजीपीटी और Gemini से आगे भारतीय भाषाओं, संस्कृति और सामाजिक जरूरतों के हिसाब से होगा। इस यूनिवर्सिटी के जरिए देश-दुनिया के 500 एआई स्टार्टअप्स को भी मदद भी की जाएगी।
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कैसे अलग होगी पढ़ाई?
सूचना प्रौद्योगिकी सचिव भास्कर कटमनेनी के अनुसरा, यह यूनिवर्सिटी देश की अन्य यूनिवर्सिटी से बिल्कुल अलग होगी। इसमें सबसे पहले तो 8वीं क्लास से ही एडमिशन दिया जाएगा। इसके साथ ही पढ़ाई पूरी तरह प्रोजेक्ट-आधारित और प्रैक्टिकल होगी, जिसमें आपकी डिग्री के बजाय आपकी स्किल्स को महत्व दिया जाएगा।
यूनिवर्सिटी के करिकुलम में सिलेबस को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। सबसे पहले स्कूल लेवल पर छात्रों को एआई की बुनियादी पढ़ाई के साथ ही मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विजन, नेशनल लैंग्वेज प्रोसेसिंग के बारे में बताया जाएगा। इसके बाद कॉलेज लेवल के करिकुलम में पढ़ाई नाम मात्र की रहेगी, सिर्फ प्रैक्टिकल होंगे। स्टूडेंट नए-नए एआई मॉडल बनाएंगे। इंजीनियरिंग, मेडिकल,लॉ जैसे विषयों में छात्र एआई मॉडल बनाएंगे।
तीसरे लेवव पर पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी को शामिल किया जाएगा। इसमें भविष्य की मशीनों की समझ विकसित करना, नए एल्गोरिद्म, बड़े भाषा मॉडल बनाने जैसे टास्क शामिल होंगे। इसमें रिसर्च पर ही फोकस रहेगा।