पीएचडी करने वाले छात्रों को मोटी-मोटी थीसिस लिखकर अपनी डिग्री पूरी करनी होती है लेकिन अब इसका एक दूसरा विकल्प भी उभरकर सामने आ रहा है। पंजाब के रूपनगर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) रोपड़ ने डॉक्टरेट की पढ़ाई में नया बदलाव किया है। संस्थान ने प्रोडक्ट या स्टार्टअप-ड्रिवन पीएचडी नाम से नया तरीका शुरू किया है। बताया जा रहा है कि चीन के कुछ संस्थानों की तर्ज पर यह प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसके जरिए छात्रों पर थीसिस लिखने का बोझ भी कम होगा।
इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) रोपड़ के इस प्लान के तहत छात्र पारंपरिक रिसर्च थीसिस के बजाय कोई उपयोगी प्रोडक्ट तैयार करके, पेटेंट हासिल करके या अपना स्टार्टअप खड़ा करके पीएचडी की डिग्री पूरी कर सकेंगे। इस पहल का मकसद रिसर्च को सिर्फ किताबों और रिसर्च पेपर तक सीमित रखने के बजाय उद्योग और आम लोगों की जरूरतों से जोड़ना है।
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क्या है नया मॉडल?
इस नए मॉडल का विचार IIT रोपड़ के डायरेक्टर प्रोफेसर राजीव आहूजा ने दिया है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में उनके हवाले से लिखा गया है कि इस रास्ते से पीएचडी करने वाले स्कॉलर को पारंपरिक थीसिस लिखने की जरूरत नहीं होगी। संस्थान के मुताबिक, डिग्री का आधार ऐसी रिसर्च होगी जिससे कोई नया प्रोडक्ट बने, तकनीक विकसित हो या स्टार्टअप तैयार हो। यानी छात्र को अपनी रिसर्च का ऐसा नतीजा दिखाना होगा, जिसका वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल हो सके।
प्रोफेसर राजीव आहूजा ने समझाया कि किसी छात्र को ऐसा प्रोडक्ट बनाने और उसे बेचकर 10 लाख रुपये कमाने का लक्ष्य दिया जा सकता है। इसके लिए उन्हें मार्गदर्शन भी दिया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक उदाहरण है लेकिन इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कैसे होगी पीएचडी?
बताया जा रहा है कि इस मॉडल में पीएचडी हासिल करने के लिए मुख्य रूप से तीन रास्ते रखे गए हैं। पहला, छात्र अपने आविष्कार का पेटेंट हासिल कर सकता है। दूसरा, वह अपना स्टार्टअप शुरू करके प्रोडक्ट तैयार कर सकता है और उसे बाजार में बेच सकता है। तीसरा रास्ता टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का है। इसमें छात्र अपनी विकसित की गई तकनीक किसी बड़ी कंपनी को दे सकता है। कंपनी उस तकनीक से प्रोडक्ट बनाएगी और छात्र को इसके बदले रॉयल्टी मिल सकती है। इस तरह रिसर्चर के काम का मूल्यांकन सिर्फ थीसिस के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी रिसर्च के प्रैक्टिकल नतीजों के आधार पर होगा।
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चीन से कॉपी किया मॉडल?
IIT रोपड़ की यह पहल चीन में शुरू हुए प्रैक्टिकल पीएचडी मॉडल से मिलती-जुलती है। फरवरी 2026 में चीन में एक सिविल इंजीनियरिंग रिसर्चर ने पुल के खंभे के नए डिजाइन से जुड़े प्रोडक्ट को अपने डॉक्टरेट रिसर्च के रूप में पेश किया था। उसे पारंपरिक लिखित थीसिस के बजाय प्रैक्टिकल उपलब्धि के आधार पर पीएचडी मिली। भारत में BITS पिलानी का WHILSP कार्यक्रम भी उद्योग से जुड़े रिसर्च का एक उदाहरण है। IIT रोपड़ का दावा है कि इस तरह का रास्ता शुरू करने वाला वह देश का पहला IIT है।
इस बदलाव से उन छात्रों को फायदा हो सकता है, जो रिसर्च के जरिए कोई नई तकनीक या कारोबार खड़ा करना चाहते हैं। संस्थान का इनोवेशन और इन्क्यूबेशन सिस्टम छात्रों को प्रोटोटाइप बनाने, तकनीकी मदद लेने, मेंटर और निवेशकों तक पहुंच बनाने में सहायता देता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पीएचडी में रिसर्च की अहमियत खत्म हो जाएगी।