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13 घंटे एंट्रेंस एग्जाम, एयरपोर्ट, ऑफिस बंद, दक्षिण कोरिया में यह कैसी परीक्षा?

साउथ कोरिया में यूनिवर्सिटी एंट्रेस एग्जाम 13 घंटे तक लंबा चल सकता है। इस एग्जाम को कोरिया में सफलता का पैमाना माना जाता है और छात्रों पर इसे पास करने का दबाव रहता है।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: Grok

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दुनियाभर में अलग-अलग यूनिवर्सिटी, कॉलेज में एडमिशन और भर्तियों के लिए परीक्षाएं होती हैं। इन परीक्षाओं के आधार पर युवाओं के भविष्य की दिशा तय होती है। भारत में भी CLAT, CAT, MET, CUET, NEET,JEE जैसे सैंकड़ों परीक्षाएं होती हैं।  इन परीक्षाओं को 1 से 2 घंटे के निर्धारित समय में करवा लिया जाता है लेकिन साउथ कोरिया में यूनिवर्सिटी एडमिशन के लिए 13 घंटे लंबी परीक्षा आयोजित की जाती है। खास बात यह है कि इस परीक्षा के लिए पूरा देश कुछ घंटों के लिए थम जाता है। इस परीक्षा को पास करना हर कोरियाई युवा का सपना होता है क्योंकि इस पर उनका भविष्य टिका है। शादी से लेकर नौकरी तक पर इस परीक्षा का असर होता है। 

 

इस एंट्रेस परीक्षा को दुनिया की सबसे लंबी परीक्षा भी कहा जा रहा है। यह यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए एंट्रेस टेस्ट है और इसका नाम कॉलेज स्कोलास्टिक एबिलिटी टेस्ट (CSAT) है। इसे सुनेउंग के नाम से भी जाना जाता है। आप इस परीक्षा को भारत में होने वाली CUET परीक्षा के उदाहरण से समझ सकते हैं। सुनेउंग साउथ कोरिया का नेशनल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम है। यह परीक्षा हर साल नवंबर के तीसरे गुरुवार को होती है और इसमें हर साल लाखों युवा बैठते हैं। इस परीक्षा के लिए बच्चे कई साल तक तैयारी करते हैं।

 

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13 घंटे तक चल सकती है परीक्षा

हर साव होने वाली इस परीक्षा के लिए आम तौर पर 9 घंटे का समय दिया जाता है। हर छात्र को 5 पार्ट्स में बंटी इस परीक्षा को 9 घंटे में पूरा करना होता है लेकिन कुछ छात्रों के लिए यह परीक्षा 13 घंटे लंबी भी हो सकती है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस परीक्षा के लिए सुबह 8:40 बजे से 5:40 बजे तक का समय निर्धारित होता है। हालांकि, जिन छात्रों की आंख की रोशनी में गंभीर समस्या है, उन्हें सामान्य समय की तुलना में 1.7 गुना ज्यादा समय दिया जाता है। इसके अलावा एक्स्ट्रा विदेशी भाषा का पेपर देने पर भी छात्रों को ज्यादा समय दिया जाता है। ऐसे में अगर आंखों की रोशनी में गंभीर समस्या का सामना कर रहे युवा इस परीक्षा में एक्स्ट्रा विदेशी भाषा का चयन करते हैं तो उन्हें 13 घंटे तक का समय दिया जाता है। बीबीसी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परीक्षा के बीच में कोई लंच या डिनर ब्रेक नहीं होता है।

ब्रेल टेस्ट के कारण लंबा होता है पेपर

दृष्टिबाधित छात्रों के लिए सुनेउंगा परीक्षा 13 घंटे तक लंबी चल सकती है। छात्रों का मानना है कि इस परीक्षा के इतना लंबा होने का मुख्य कारण ब्रेल टेस्ट पेपर का बड़ा बंडल है। ब्रेल के माध्यम से पेपर के हर वाक्य, संकेत ब्रेल में बदला जाता है। इससे ब्रेल टेस्ट बुकलेट बहुत मोटी हो जाती है और इससे दृष्टिबाधित छात्रों को परीक्षा देने में ज्यादा समय लगता है। हालांकि, पिछले कुछ सालों से छात्रों को इस परीक्षा में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए बने कंप्यूटर डिवाइस इस्तेमाल करने की मंजूरी मिल चुकी है लेकिन फिर भी छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

 

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परीक्षा में पूछे जाते हैं 200 प्रश्न

दक्षिण कोरिया का नेशनल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम सुनेउंग में कुल 200 साल पूछे जाते हैं। इस परीक्षा में कोरियाई भाषा, गणित, इंग्लिश, सोशल साइंस, प्राकृतिक साइंस के अलावा एक एक्स्ट्रा सब्जेक्ट भी शामिल होता है। इसके अलावा छात्रा विदेशी भाषा का विकल्प भी चुन सकते हैं। छात्र सुनेउंग की तैयारी में महीनों या सालों लगा देते हैं। कोरियाई सरकार से मान्यता प्राप्त स्कूलों से 12वीं पास करने के बाद छात्र इस परीक्षा को दे सकते हैं। छात्रों के माता-पिता प्राइमरी स्कूल से ही छात्रों को इस परीक्षा के लिए तैयार करना शुरू कर देते हैं। 

परीक्षा के दिन रुक जाता है देश

कोरिया में यह परीक्षा एक खास मौका होता है। इसके लिए देशभर में लाखों युवा तैयारी करते हैं और उनके माता-पिता भी बच्चों को इस मुश्किल परीक्षा को पास करने में अपनी ओर से मदद करते हैं। जिस दिन सुनेउंग परीक्षा होती है उस दिन पूरा देश थम सा जाता है। हर साल इस दिन छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के लिए बस, पुलिस की गाड़ियां और अन्य सारे साधन लगा दिए जाते हैं। छात्रों के लिए रास्ते खाली करवा दिए जाते हैं। अगर किसी छात्र को देरी होती है तो उसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। इन नंबरों पर फोन करके छात्र मदद मांग सकते हैं। इस दिन 3000 से ज्यादा पुलिस की गाड़ियां तैयार रहती हैं। इस दिन ज्यादातर ऑफिस परीक्षा शुरू होने के बाद खुलते हैं और परीक्षा खत्म होने से पहले ही बंद कर दिए जाते हैं तारि ट्रैफिक को मैनेज किया जा सके। 

आसमान में नहीं उड़ते जहाज

इस परीक्षा का महत्तव आप इस बात से समझ सकते हैं कि सरकार छात्रों का ध्यान ना भटके इसके लिए हर संभव कोशिश करती है। परीक्षा शुरू होने से पहले आसमान खामोश हो जाता है। सरकार के आदेश पर सारे हवाई जहाजों की सेवाएं रोक दी जाती हैं या फिर उनका रास्ता बदल दिया जाता है। अगर कोई छात्र परीक्षा में पहुंचने के लिए लेट हो जाता है तो वह निशुक्ल पुलिस एस्कॉर्ट की मांग कर सकता है। पुलिस उसे किसी वीआईपी की तरह एस्कॉर्ट करके परीक्षा केंद्र तक पहुंचाएगी। लेखक डैनियल ट्यूडर ने बीबीसी से कहा कि ऐसा महसूस होता है कि अगर आप इस परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं करेंगे तो आप जीवन में असफल हो जाएंगे। 

 

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छात्रों में बढ़ रहे सुसाइड केस

इस परीक्षा को दुनिया की सबसे मुश्किल परीक्षा माना जाता है। घंटों लंबी चलने वाली इस परीक्षा की तैयारी का छात्रों पर बहुत ज्यादा दबाव होता है। हम कह सकते हैं कि इस परीक्षा को पास करना कोरियाई लोगों के लिए जीवन में सफलता का पैमाना है। अगर कोई इस परीक्षा को पास नहीं कर पाता तो उसे असफल माना जाता है और इसका असर भविष्य में नौकरी से लेकर शादी तक में दिखता है। इस परीक्षा को लेकर साउथ कोरिया में सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि इस परीक्षा को सरल बनाया जाना चाहिए। इस परीक्षा के कारण युवा डिप्रेशन में जा रहे हैं और सुसाइड केस भी बढ़ रहे हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 24 साल के युवाओं में आत्महत्या की दर पिछले पांच सालों में 10 प्रतिशत बढ़ गई है। इस परीक्षा में फेल होने पर कई युवा सुसाइड कर लेते हैं। 


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