केरल में मतदान से एक दिन पहले कांग्रेस ने बीजेपी प्रत्याशी शोभा सुरेंद्रन पर वोट फॉर कैश का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि उन्हें पलक्कड़ में मतदाताओं को पैसे बांटते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। उधर, बीजेपी प्रत्याशी का कहना है कि आरोप मनगढ़ंत हैं। उन्होंने वोट फॉर कैश के आरोपों से साफ इनकार किया। कांग्रेस का आरोप है कि सुरेंद्रन के चुनाव प्रचार टीम की एक महिला ने पलक्कड़ जिले की कन्नाडी पंचायत में एक बुजुर्ग महिला को पैसे दिए थे। पार्टी ने एक वीडियो भी जारी किया।
कुछ फोटो के माध्यम से दावा किया है कि पैसा बांटने वाली महिला शोभा सुरेंद्रन की करीबी सहयोगी है। उधर, चुनाव आयोग की फ्लाइंग स्क्वाड ने सुरेंद्रन के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेज दी है। जिला कलेक्टर ने केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी को बताया कि आगे की जांच की जरूरत है।
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शोभा सुरेंद्रन का आरोप है कि इसके पीछे एक कांग्रेस नेता और एक टीवी पत्रकार है। दोनों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने आगे यह भी दावा किया कि टीवी चैनल में एक वीडियो दिखाया गया। इसमें कुछ महिलाएं एक बुजुर्ग महिला को कुछ देती दिख रही हैं। कांग्रेस ने इस वीडियो को गलत तरीके से पेश किया है, ताकि यह आरोप लगाया जा सके कि वोट के बदले पैसा बांटा जा रहा है। उधर, बुजुर्ग महिला ने पैसे मिलने की बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि दवा खरीदने की खातिर 5000 रुपये मांगे थे।
वायरल वीडियो में यह भी दिख रहा है कि शोभा सुरेंद्रन अपनी कार से बाहर निकलती हैं। उनकी कुछ लोगों से बहस होती हैं। इन्हीं लोगों ने पूरा वीडियो बनाया था। सुरेंद्रन उनसे पूछती हैं कि वह बिना अनुमति उनका वीडियो कैसे बना सकते हैं। शोभा सुरेंद्रन ने बताया कि वह कार से तब बाहर आईं, जब एक शख्स ने उनके प्रति यौन उत्पीड़न वाले इशारे किए।
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कांग्रेस ने चुनाव आयोग और बीजेपी को घेरा
घटना पर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'पलक्कड़ में बीजेपी उम्मीदवार को चुनाव की पूर्व संध्या पर मतदाताओं को नकद पैसे बांटते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह सब तब हो रहा है, जब चुनाव आयोग गहरी नींद में सो रहा है। उसे चुनावी कदाचार के बारे में कोई खबर नहीं है। चुनाव में हेरफेर करना बीजेपी के डीएनए में है, चाहे कुछ भी हो जाए और चाहे कोई भी जगह हो। यह एक अपराध है। चुनाव नियमों के इस खुले उल्लंघन के लिए उम्मीदवार को सजा मिलनी चाहिए। चुनाव में बने रहने का उनके पास कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।'