अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की पहल पर दो हफ्ते का युद्धविराम हो चुका है। बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। अमेरिका अब ईरान के साथ मिलकर काम करेगा। तेहरान के साथ टैरिफ और प्रतिबंधों पर बातचीत होगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान में यूरेनियम का संवर्धन नहीं किया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ मिलकर अमेरिका गहराई में दबी सभी परमाणु धूल को खोदकर निकालेगा। एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने ईरान को हथियार बेचने वाले देशों पर 50 फीसद टैरिफ लगाने की धमकी दी है।
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ईरान के साथ मिलकर काम करेंगे: ट्रंप
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा, 'अमेरिका ईरान के साथ मिलकर काम करेगा। हमने यह तय किया है कि वह एक बहुत ही सफल सत्ता परिवर्तन के दौर से गुजरा है। अब यूरेनियम का संवर्धन नहीं किया जाएगा। ईरान के साथ मिलकर अमेरिका जमीन में बहुत गहराई में दबी हुई (B-2 बॉम्बर्स) सारी परमाणु धूल को खोदकर बाहर निकालेगा।'
कई बिंदुओं पर बनी सहमति
ट्रंप ने आगे कहा, 'यह (परमाणु प्लांट) अब भी और पहले से अधिक कड़ी सैटेलाइट निगरानी में है। हमले की तारीख से अब तक किसी भी चीज को छुआ नहीं गया है। हम ईरान के साथ टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत देने के मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। 15 में से कई बिंदुओं पर पहले ही सहमति बन चुकी है।'
ईरान को जिसने भी दिया हथियार, उस पर लगेगा टैरिफ
डोनाल्ड ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, 'जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार सप्लाई करेगा, अमेरिका को बेचे जाने वाले उसके सभी सामानों पर तत्काल प्रभाव से 50% टैरिफ लगाया जाएगा। इसमें कोई छूट या रियायत नहीं मिलेगी।'
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दोबारा हमले को तैयार हैं: अमेरिकी सेना
उधर, अमेरिका के टॉप जनरल डैन केन का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर अमेरिकी सेना ईरान पर दोबारा हमला करने को तैयार है। उन्होंने कहा, 'यह स्पष्ट कर दें कि युद्धविराम एक विराम है। संयुक्त बल आदेश मिलने या बुलाए जाने पर तैयार रहेगा।' इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री पीट हेगसेथ का कहना है कि ईरान की नई सरकार के पास कोई विकल्प नहीं बचा था। समय भी खत्म हो चुका था। इस कारण उन्होंने एक नई डील की है। ईरान के साथ डील का मतलब यह है कि वे कभी किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल न कर पाए।