अमेरिकी सीज फायर को अपनी जीत क्यों बता रहा है ईरान? वजहें जिनमें दम है
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान थक चुका है, वह शांति चाहता है इसलिए संघर्ष विराम का एलान किया है गया है। ईरान ने कहा है कि अमेरिका झुका है, इस्लामिक रिपब्लिक नहीं।

ईरान में आयतुल्ला के समर्थन में रैली। Photo Credit: PTI
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला किया था। जंग में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिकी भी मरे हैं, इजरायली भी और ईरानी भी। जंग का खामियाजा लेबनान को भी भुगतना पड़ा है। अमेरिका और इजरायल की ओर से थोपे गए इस जंग में 10 से ज्यादा देशों को नुकसान पहुंचा। पहले इजरायल और अमेरिका ने हमला किया, फिर ईरान ने दोनों देशों के सहयोगी देशों पर हमला किया। ईरान की सभ्यता को मिटा देने का दावा करने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक, बुधवार को एलान किया कि वह, पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के खिलाफ जंग रोक रहे हैं।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन जैसे देशों में अमेरिकी प्रतिष्ठानों को तगड़ा नुकसान हुआ। जंग के जब 35 से ज्यादा दिन बीत गए तो अमेरिका ने एलान किया कि ईरान की सभ्यता को ही मिटा देंगे। उनका यह दावा फुस्स हो चुका है। ईरान ने कहा है कि जंग, अमेरिका नहीं, उसकी शर्तों पर रुकी है। ईरान ने यह तो माना है कि वह 2 सप्ताह के लिए युद्ध विराम पर सहमत हुआ है लेकिन तभी, जब उसकी शर्तें मानी जाएं।
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ईरान ने वह 10 सूत्रीय समझौता भी साझा किया है, जिस पर राजी है-
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान:-
आपने जंग शुरू किया था, ईरान ने खत्म होने की शर्तें रखीं। ईरान ने 10 शर्तें रखी हैं, जिसे अमेरिका मान गया है, इस पर काम किया जा सकता है। अब जंग नहीं होगी, होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण होगा, यूरेनियम संवर्धन होगा, सभी प्रतिबंध हटाए जाएंगे, यूएन के सारे प्रस्ताव रद्द होंगे, IAEA बोर्ड के प्रस्ताव बर्खास्त होंगे, ईरान को पैसे दिए जाएंगे, अमेरिकी सेना पूरे इलाके से हटेगी। लेबनान से भी हटना होगा।
ईरान के जीत के दावे में दम क्यों है, ईरान, अमेरिका के झुकने के दावे कर क्यों रहा है, क्या हैं ईरान की शर्तें, जिन्हें अमेरिका मानेगा, आइए समझते हैं-
संघर्ष विराम, अमेरिका नहीं, ईरान की जीत है, लेकिन क्यों?
28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला बोला। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई के आवास पर गोलीबारी की गई, उनकी मौत हो गई। उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए। मोजतबा अली खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाया गया लेकिन वह इतने जख्मी हैं कि नजर नहीं आए।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। सऊदी अरब, दुबई, कतर, बहरीन, कुवैत, इराक, साइप्रस और जॉर्डन तक हमले किए। खाड़ी के देशों में भीषण तबाही मचाई। अमेरिकी सैन्य बेस ध्वस्त हुए, अमेरिकी फाइटर जेट मारे गए गए,कई सैनिक शहीद हुआ। ट्रंप ने धमकी दी कि ईरान को मिटा देंगे, खुद ही सीज फायर के लिए तैयार हो गए।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का कंट्रोल नहीं देगा ईरान
जंग के कुछ हफ्ते बीते कि डोनाल्ड ट्रंप, होर्मुज को 'ट्रंप स्ट्रेट' बताने लगे। अमेरिकी नौसेना ने अपना जंगी बेड़ा, USS ट्रिपोली और USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप जैसे बेड़ों को आगे करने की कवायद करने लगे। ईरान ने होर्मुज में तबाही मचाई। रिमोट से चलने वाली जहाजों के जरिए ईरान ने कई आत्मघाती हमले किए, जिसमें अमेरिका का नुकसान हुआ। होर्मुज ने 10 से ज्यादा जहाजों पर होर्मुज में हमले किए, उन्हें खत्म कर दिया। अमेरिका न तो आगे बढ़ पा रहा था, न पीछे जा पा रहा था। यहां भी ट्रंप की हार हुई। होर्मुज का नियंत्रण अब भी अमेरिका के पास ही है। ईरानी सेना के नियंत्रण में ही जहाज गुजरेंगे।
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ईरान यूरेनियम संवर्धन नहीं रोकेगा
डोनाल्ड ट्रंप, ईरान के यूरेनियम संवर्धन वाली शर्त मान गए हैं। भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने जिस 10 सूत्रीय समझौते का जिक्र किया है, उसमें एक यह भी शर्त है। अब ईरान, यूरेनियम संवर्धित करेगा, जिसे डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू अपने लिए खतरा मानते हैं। अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन, क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। यह खतरा जारी रहेगा, ईरान नहीं झुकेगा।
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ईरान पर सभी प्राथमिक प्रतिबंध हटाए जाएंगे
अमेरिका ने ईरान पर कई व्यापारिक प्रतिबंध लगाए हैं। ईरान पर आरोप है कि वह इजरायल और खाड़ी के देशों के खिलाफ प्रॉक्सी आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद देता है। जब ईरान में साल 1979 में इस्लामिक क्रांति हुई तभी कई प्रतिबंधों का एलान हुआ था। ईरान पर आतंकवाद को समर्थन देने, मानवाधिकार उल्लंघन और बैलिस्टिक मिसाइल, यूरेनियम संवर्धन जैसे आरोप लगे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने परमाणु कार्यक्रमों को रोकने के लिए कई सैन्य और आर्थिक प्रतिबंध लगाए। यूरोपियन यूनियन (EU) ने भी परमाणु अप्रसार और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए ईरान के तेल, गैस और बैंकिंग सेक्टर पर प्रतिबंध लगाए। ईरान पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के भी आरोप लगते रहे हैं।
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सभी सेकेंड्री प्रतिबंध हटाए जाएंगे
डोनाल्ड ट्रंप ने 28 फरवरी के बाद एलान किया था कि जो देश, ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगे, उन पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। अब ईरान का कहना है कि इसे भी अमेरिका को हटाना होगा। ईरान के तेल, गैस, व्यापार, शिप इंडस्ट्री पर भी दुनिया के बड़े देशों ने प्रतिबंध लगाए हैं। ईरान की मानें तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए इन शर्तों को भी हटाना होगा।
सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध हटाए जाएं
ईरान का दावा है कि अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से थोपे गए प्रतिबंधों को भी हटाने पर राजी हुआ है। UNSC ने साल 2006 से 2010 के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर 6 प्रस्ताव पारित किए। ईरान IAEA की जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और यूरेनियम संवर्धन जारी रखे हुए था। इन प्रस्तावों का मुख्य मकसद ईरान से संवर्धन गतिविधियां तुरंत रोकने, रिएक्टर पर काम रोकने और IAEA के अतिरिक्त प्रोटोकॉल को मंजूरी देने की मांग करना था। ईरान पर 2006 से लेकर 2025 तक अलग-अलग प्रतिबंध लागू रहे।
IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर प्रस्ताव पर ईरान की जीत
ईरान की मानें तो इंटरनेशनल एटमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने ईरान के खिलाफ जो प्रस्ताव पारित किया था, उसे हटाने के लिए भी अमेरिका तैयार हो गया है। IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने नवंबर 2025 को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें ईरान से पूर्ण सुरक्षा उपाय लागू करने और संवर्धित यूरेनियम स्टॉक की जानकारी देने की मांग की गई। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका द्वारा प्रायोजित प्रस्ताव पर 19 सदस्यों ने समर्थन किया, जबकि चीन और रूस ने विरोध किया। ईरान ने जून में इजरायली-अमेरिकी हमलों के बाद IAEA के साथ सहयोग निलंबित कर दिया था। प्रस्ताव के जवाब में ईरान ने क्षतिग्रस्त साइटों पर सुरक्षा उपाय बहाल करने के काहिरा समझौते को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया।
ईरान को जंग घाटा हुआ, वह भरेंगे अमेरिका इजरायल
ईरान ने दावा किया है अमेरिका और इजरायल के हमले में जो भी नुकसान हुए हैं, उसकी क्षतिपूर्ति की जाएगी। ईरान के सैन्य ठिकानों, नागरिक प्रतिष्ठानों, सरकारी दफ्तरों, पेट्रोल-प्लांट जैसी कई रणनीतिक तौर पर अहम जगहों पर हमले हुए। अब ईरान, कैसे इसकी भरपाई करेगा, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है।
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अमेरिका को ईरानी जद से दूर जाना होगा
अमेरिका, जिन इलाकों से ईरान को प्रभावित कर सकता है, वहां से उसे हटना ही होगा। ईरान के मुताबिक अमेरिका अब अपनी सेना हटाने के लिए तैयार हो गया है।
हूती, हिजबुल्लाह विद्रोहियों पर कार्रवाई भूलनी होगी
ईरान ने कहा है कि अमेरिका इस बात पर भी तैयार हुआ है कि ईरान समर्थक विद्रोही गुटों पर भी हमले रोके जाएंगे। यमन के हूती विद्रोहियों को अब निशाना नहीं बनाया जाएगा। लेबनान में हिजबुल्लाह पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। खाड़ी के देशों और पश्चिम एशिया में ईरान के कई प्रॉक्सी संगठन हैं, जो ईरान के लिए जंग लड़ते हैं। ईरान ने इनका भी जिक्र संघर्ष विराम समझौते में किया है।
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