मेघालय और बांग्लादेश की सीमा से सटे कूच बिहार जिले की पश्चिम बंगाल में काफी अहमियत है। बंगाली में जिले के 'कोच बिहार' के नाम से पुकारा जाता है। कोच बिहार से मतलब वह भूमि है जहां से 'कोच' के जरिए यहां के राजा यात्रा करते थे। 28 अगस्त 1949 से पहले कूच बिहार एक रियासत थी जिसपर यहां के राजा जगदीशेंद्र नारायण का शासन था। यहां के राजा ब्रिटिश सरकार के अधीन एक सामंती शासक थे। हालांकि, 1949 के एक समझौते के बाद कूच बिहार के राजा ने इस राज्य को भारत सरकार को सौंप दिया। इसके बाद कूच बिहार 19 जनवरी, 1950 को आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल में शामिल हो गया और इसी दिन से यह बंगाल का एक जिला बन गया।
कूच बिहार के उत्तर में जलपाईगुड़ी जिला है और इसके पूर्व में मेघायल राज्य। इसके ठीक नीचे यानि कि दक्षिण में बांग्लादेश है। कूच बिहार के बीचो-बीच से सिंगमारी नदी बहती है, जो यहां की जीवनदायिनी है। इसके अलावा जिले से होकर सात नदियां बहती हैं- तीस्ता, जलढाका, तोरशा, कालजानी, रैदक, संकोश और घरघरिया। मगर, यह जिला बंगाल के प्राकृतिक सुंदरता से भरा हुआ है, साथ ही यह शांत है। यहां जगह-जगह कूच बिहार के राजाओं के जुड़ी हुई धरोहरें और उनकी कहानियां सुनने को मिल जाती हैं।
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जिले का इतिहास
मुस्लिम सेना के निकाले जाने के बाद कामता राज में अराजकता फैल गई। उस समय, कोच राजा का उदय शुरू हुआ। 1498 में कूच बिहार को मुस्लिम सेना ने जीत लिया था, लेकिन वे ज्यादा समय तक यहां राज नहीं कर पाए। मुस्लिम सेना के जाने के बाद कोच राजा का उदय शुरू हुआ। 1522 में बिस्वसिंह कामतेश्वर यहां के राजा बने। तब से लेकर 1949 तक बिस्वसिंह कामतेश्वर के वंशजों का ही कूच बिहार पर राज स्थापित रहा। यहां के आखिरी राजा जगदीशेंद्र नारायण थे।
मगर, वर्तमान में आधुनिक कूच बिहार एकदम से बदल चुका है। यहां का प्रशासन बंगाल सरकार द्वारा गठित प्रशासनिनक अधिकारी देखते हैं और यहां के विकास में योगदान देते हैं।
तहसील और ब्लॉक:
कूच बिहार जिले में पांच सब-डिवीजन हैं। यह डिवीजन कूचबिहार सदर, दिनहाटा, माथाभांगा, तूफानगंज और मेखलीगंज हैं। वहीं, 12 ब्लॉक हैं। इनमें कूचबिहार-I, कूचबिहार-II, दिनहाटा-I, दिनहाटा-II, हल्दीबाड़ी, माथाभांगा-I, माथाभांगा-II, मेखलीगंज, सिताई, सीतलकुची, तूफानगंज-I और तूफानगंज-II शामिल हैं।
विधानसभा सीटें:
कूच बिहार जिले में कुल 9 विधानसभा सीटे हैं। ये विधानसभा सीटें मेकलीगंज, माथाभांगा, कूचबिहार उत्तर, कूचबिहार दक्षिण, सीतलकुची, सिताई, दिनहाटा, नटबाड़ी और तूफानगंज हैं। सभी विधानसभा सीटें कूच बिहार लोकसभा में आती हैं। पिछले 2021 के चुनाव में यहां दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला था। बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पिछले चुनाव में 9 में से कुल 6 सीटें जीत ली थीं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस को महज 3 सीटें ही मिली थीं।
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धार्मिक स्थल
कूच बिहार में मदन मोहन मंदिर, बनेश्वर शिव मंदिर, देवी बारी मंदिर, बारा देवी बारी और कामाख्यागुड़ी जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं।
सामाजिक ताना बाना
साल 2011 की जनगणना के मुताबिक कूच बिहार की कुल जनसंख्या 2,819,086 है। इनमें 1,304,916 पुरुष और 1,224,736 महिलाएं हैं। यहां 1000 पुरुषों में 939 महिलाएं हैं। अगर सामाजिक ताने-बाने की बात करें तो कूच बिहार में 74.05 फीसद हिंदू और 25.54 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। यहां की अधिकतर आबादी बांग्ला भाषा बोलती है।
कूच बिहार में में कौन मजबूत
2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 9 में से 6 विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया था। टीएमसी महज तीन सीटें ही जीत पाई है। बंगाल में बीजेपी जिन जिलों में मजबूत स्थिती में है, उन जिलों में से कूच बिहार भी है। 2019 के लोकसभा में बीजेपी के निशित प्रमाणिक यहां से सांसदी जीते थे। हालांकि, पिछले लोकसभा 2024 में टीएमसी के जगदीश चंद्र बर्मा चुनाव जीते थे। इस लिहाज से इस विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
जिले की स्थिति
क्षेत्रफल- 3,387 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर- 65.64%
विधानसभा सीटें- 09
नगर पालिका- 6
नगर निगम- 1
ब्लॉक- 12
ग्राम पंचायत- 65