पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के बाद अब चुनाव आयोग के हाथ में कमान आ चुकी है। चुनावों की घोषणा होने के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। बंगाल में पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल और दूसरे चरण की 29 अप्रैल को होगी। इन चुनावों की घोषणा के बाद से बंगाल में बड़े प्रशासनिक फेरबदल किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने पहले पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव का तबादला किया और अब इसके बाद पुलिस के 4 बड़े अधिकारियों का भी ट्रांसफर कर दिया है।
चुनाव आयोग ने राज्य के डीजीपी, आईजी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को उनके पद से हटा जिया है और उनकी जगह नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंप दी है। चुनाव की घोषणा के बाद पुलिस विभाग में इस बड़े तबादते से हचलत है और अभी माना जा रहा है कि चुनाव आयोग कई अन्य तबादले भी कर सकता है।
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चीफ सेक्रेटरी और होम सेक्रेटरी को भी हटाया
चुनाव आयोग ने पुलिस विभाग में इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल से पहले पश्चिम बंगाल की चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला को नया चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है।
इसके अलावा राज्य के होम सेक्रेटरी जगदीश प्रसाद मीणा की जगह 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संगमित्रा घोष को प्रिंसिपल सेक्रेटरी, होम एंड हिल अफेयर्स के पद पर तैनात किया गया है। आयोग की ओ से जारी आदेश में कहा गया है कि यह फैसला चुनान की तैयारियों का रिव्यू करने के बाद लिया गया है।
कौन बना नया डीजीपी?
चुनाव आयोग ने पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य के डीजीपी पीयूष पांडेय को उनके पद से हटाकर सिद्ध नाथ गुप्ता को नया डीजीपी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा कोलकाता के पुलिस कमिश्नर सुप्रतीम सरकार को हटाकर अजय कुमार नंद को पुलिस कमिश्नर बनाया गया है। अजय मुकुंद रानाडे को एडीजी और आईजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) की जिम्मेदारी दी गई है। आयोग ने यह भी कहा है कि जिन अधिकारियों को हटाया गया है, उन्हें चुनाव खत्म होने तक कोई भी चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
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ममता बनर्जी को झटका?
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीति तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद शताब्दी रॉय ने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए सरकारी संसाधनों का गलत इस्तेमाल कर रही है। जिन अधिकारियों को हटाया गया है उनकी नियुक्ति ममता बनर्जी सरकार ने की थी और कई अधिकारियों को सीएम का भरोसेमंद भी माना जाता था। रिपोर्ट्स के अनुसार,सीएम ममता बनर्जी इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाली हैं और इसे लेकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी तैयार रहने को कहा गया है।