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BJP की बढ़ती ताकत, पंजाब में अकेले लड़ने का प्लान, अकाली दल का प्लान समझिए

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन की अटकलों पर विराम लग गया है।

Amit Shah and Sukhbir Singh Badal

अमित शाह और बादल परिवार, Photo Credit: @officeofssbadal

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पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते शनिवार मोगा जिले के किल्ली चहलां गांव में 'बदलाव रैली' को संबोधित किया। इस रैली में शाह ने साफ कह दिया है कि अब तक बीजेपी छोटे भाई की भूमिका में रही है लेकिन अब बीजेपी छोटा भाई नहीं बनेगी। पंजाब में बीजेपी लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में रही है लेकिन किसान कानूनों की वजह से अलग हो गई थी। 

 

पंजाब में भारतीय जनता पार्टी ने अपने दम पर सरकार बनाने की बात कही है। रैली में अमित शाह ने कहा , 'पहले हम आपके सामने छोटे साथी के रूप में आते थे। लेकिन आज से बीजेपी पंजाब में अपनी अलग सरकार बनाने की मुहिम शुरू कर रही है। आपने कांग्रेस, अकाली और आप को आजमाया, अब हमें एक मौका दीजिए।'

 

यह भी पढ़ें: पंजाब में बीजेपी अकेले लड़ने का बना रही प्लान, शाह बोले- छोटा भाई नहीं बनेंगे

 

जूनियर पार्टनर थी बीजेपी

अकाली दल बीजेपी का सबसे पुराना सहयोगी था। इस दौरान चुनाव भी बीजेपी ने जूनियर पार्टनर के तौर पर ही लड़े लेकिन कभी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाई और ना ही इस स्थिति में पहुंची की किसी अन्य दल के साथ जाकर सरकार बना ले। 2020 में किसान कानूनों के कारण गठबंधन टूटने के बाद बीजेपी ने 2022 में अकेले चुनाव लड़ा और सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली। ऐसे में 2027 चुनाव से पहले दोनों दलों के एक बार फिर से साथ आने की अटकलें लगाई जा रही थीं। राज्य के नेता दोनों तरफ से साथ आने की अपील भी कर रहे थे और जरूरत भी बता रहे थे।

 

अब अमित शाह ने साफ कर दिया है कि बीजेपी छोटे भाई की भूमिका में नहीं रहेगी। इसका साफ मतलब है कि बीजेपी अकाली दल के साथ तो गठबंधन नहीं करने वाली है। शाह ने वादा किया है कि पंजाब में केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार राज्य को ड्रग्स और कर्ज से मुक्ति दिलाएगी।

अब क्या करेगा अकाली दल?

अमित शाह ने शनिवार को अकाली दल के साथ गठबंधन की अटकलों को खारिज कर अकेले मैदान में कूदने का मन बना लिया है। अमित शाह के इस ऐलान के अगले ही दिन उसी मोगा में अकाली दल प्रमुख सुखबीर बादल भी पहुंचे। उन्होंने रविवार को कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ-साथ बीजेपी पर भी निशाना साधा। सुखबीर बादल ने रैली में कहा कि पंजाब के हितों की जितनी चिंता प्रकाश सिंह बादल करते थे उतनी चिंता मोदी भी नहीं कर सकते। उन्होंने मोदी और केजरीवाल को दिल्ली वाला और खुद को पंजाब का रक्षक बताया। इसके साथ ही कहा कि अगर अकाली दल कमजोर हुआ तो पंजाब के हितों की रक्षा करना मुश्किल हो जाएगा। 

बीजेपी की बढ़ती ताकत

  • बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में पहले की तुलना में ज्यादा वोट हासिल किए, भले ही सीट ना मिली हो। 
  •  2024 में बीजेपी को 19 प्रतिश वोट मिले। अमित शाह ने कहा कि जहां बीजेपी को 19 प्रतिशत वोट मिलते हैं, वहां अगली सरकार बीजेपी की ही बनती है। 
  • बीजेपी पंजाब में लगातार अपने कैडर का विस्तार कर रही है। मोगा रैली के लिए भी मंडल और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 
  • इसके अलावा ग्रामीण स्तर पर मीटिंग कर बीजेपी अपने कमजोर पक्ष को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 
  • सिख समुदाय को अपनी ओर करने के लिए बीजेपी हर संभव कोशिश कर रही है। केंद्र में कई सिख नेताओं को बीजेपी ने आगे बढ़ाया है। ऐसे में सिख समुदाय में लगातार पैठ बढ़ा रही है। 

यह भी पढ़ें: 'नीतीश को बर्बाद कर दिया, अब निशांत कुमार को लेकर क्या बोले तेजस्वी यादव?

 

क्या अकाली दल से गठबंधन नहीं होगा?

अमित शाह ने एलान कर दिया है कि छोटा भाई बीजेपी अब नहीं बनेगी। वहीं, सुखबीर बादल ने भी कह दिया है कि सभी 117 सीटों पर अपने चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में दोनों दलों के बीच गठबंधन की अटकलों को विराम लग गया है। हालांकि, राजनीति में कब, क्या हो जाए इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। जब बीजेपी से गठबंधन टूटा था तब भी सुखबीर बादल साथ रहने की बात कर रहे थे लेकिन कुछ ही दिनों में मंत्रिमंडल से इस्तीफा, सरकार से समर्थन हटाना और विरोध में उतरना यह सब हुआ। अभी भी गठबंधन को नकारने के बावजूद दोनों दल एक दूसरे पर सख्त हमले नहीं कर रहे हैं। 

 

दोनों दलों के निशाने पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ही हैं। सुखबीर बादल भले ही कह रहे हों कि दिल्ली वालों को हराना है लेकिन वह बीजेपी और बीजेपी नेताओं पर सीधे हमले नहीं कर रहे हैं। अमित शाह का भी अकाली दल के के प्रति नरम रुख रहा। उनके निशाने पर भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ही रही। दोनों तरफ एक दूसरे  के लिए सॉफ्ट कॉर्नर अभी भी है। शायद इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि दोनों दल जानते हैं कि सरकार बनाने के लिए उन्हें एक दूसरे की जरूरत पड़ सकती है। 


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