logo

मूड

ट्रेंडिंग:

मुस्तफाबाद में AIMIM के ताहिर हुसैन ने कैसे बिगाड़ा AAP का खेल?

बीजेपी के लिए यह सीट जीतना आसान नहीं थी, लेकिन एआईएमआईएम की वजह से बीजेपी को यह सीट जीतने में आसानी रही।

Mustafabad assembly seat

ताहिर हुसैन। Photo Credit- PTI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

आम आदमी पार्टी पूरी दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से महज 22 सीट ही जीत पाई, जबकि 48 सीटें जीतकर बीजेपी सरकार बनाने जा रही है। 'आप' में आतिशी और सत्येंद्र जैन को छोड़कर पूरी टॉप लीडरशिप अरविंद केजरीवाल और 'टीम केजरीवाल' धराशायी हो चुकी है। ऐसी ही एक विधानसभा सीट है 'मुस्तफाबाद'। चुनाव के दौरान मुस्तफाबाद खासी चर्चा में रहने वाली सीटें में से एक थी। यह सीट बीजेपी जीत ली है।

 

मुस्तफाबाद से अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी आदिल अहमद खान आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार थे, लेकिन वह बीजेपी के मोहन सिंह बिष्ट से 17,578 वोटों से चुनाव हार गए हैं। 

 

आम आदमी पार्टी का खेल बिगाड़ा

 

मुस्तफाबद में आदिल अहमद खान को 67,637 वोट मिले, वहीं बीजेपी के जीते प्रत्याशी मोहन सिंह बिष्ट को 85,215 मिले। लेकिन इसमें एक तीसरा प्रत्याशी भी है, जिसने आम आदमी पार्टी का खेल बिगाड़ दिया। यह प्रत्याशी दिल्ली दंगों के आरोपी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के ताहिर हुसैन हैं। ताहिर को मुस्तफाबाद से 33,474 वोट हासिल हुए हैं। वह तीसरे नंबर पर रहे। 

 

यह भी पढ़ें: 27 साल बाद BJP की जीत, अब चुनावी वादों पर टिकी दिल्लीवालों की निगाह

'आप' के आदिल अहमद खान जितने वोट से चुनाव हारे हैं ताहिर को उससे 15,896 ज्यादा वोट हासिल किए। इस तरह से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के ताहिर हुसैन ने आम आदमी पार्टी की एक सीट कम करने में अहम भूमिका निभाई है। दरअसल, मोहन सिंह बिष्ट इससे पहले करावल नगर से विधायक थे, एन वक्त पर उनकी सीट बदलकर मुस्तफाबाद कर दी गई। 

 

 

बीजेपी को मिला फायदा

 

बीजेपी के लिए यह सीट जीतना आसान नहीं थी, लेकिन एआईएमआईएम की वजह से बीजेपी को यह सीट जीतने में आसानी रही। माना जा रहा है कि अगर ताहिर हुसैन को यहां से नहीं उतारा जाता तो उसके सारे वोट आम आदमी पार्टी को मिलते और आदिल खान की आसान जीत हो जाती। मुस्तफाबाद मुस्लिम बहुल सीट है। यहां 40 फीसदी से भी ज्यादा मुस्लिम आबादी रहती है। आंकड़ों से पता चलता है कि मुस्तफाबाद में मुस्लिम वोट बंट गए, जिसका एक तरफा फायदा बीजेपी को हुआ। बता दें कि यहां कांग्रेस प्रत्याशी अली मेहंदी को 11,763 वोट मिले हैं। 

 

बता दें कि 24 फरवरी 2020 को दिल्ली में दंगे हुए थे। इन दंगों में 53 लोगों की जानें गई थीं। ताहिर पर आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या करने का आरोप है। ताहिर ने चुनाव प्रचार के लिए 14 जनवरी से 9 फरवरी तक अंतरिम जमानत की मांग की थी। ताहिर को कस्टोडियल बेल मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने ताहिर को 29 जनवरी से 3 फरवरी तक दिन में प्रचार करने की अनुमति दी थी।


और पढ़ें